
निर्दोषों को दोषी लिखकर,
दोषी को बेचारा लिख दूँ?
सूखे खेत को हरियाली कह,
बंजर को गलियारा लिख दूँ?
मैं कैसे जयकारा लिख दूँ?
और जीते को हारा लिख दूँ?
अँधियारे को सूरज लिखकर,
सूरज को अँधियारा लिख दूँ?
लुटते सपनों को उत्सव लिखकर,
आँसू को जलधारा लिख दूँ?
मातृभूमि के अपराधी को,
कैसे मैं तारणहारा लिख दूँ?
झूठ सिंहासन पर आजाये,
तो क्या सच को हारा लिख दूँ?
बिकते देखूँ न्याय व्यवस्था,
कैसे न्याय तुम्हारा लिख दूँ?
मैं कैसे जयकारा लिख दूँ?
सूरज को अँधियारा लिख दूँ?
मंदिर में अँधियारा लिखकर,
गिरजाघर उजियारा लिख दूँ?
लहू बहाते हाथों को मैं,
कैसे हाथ सहारा लिख दूँ?
अपने भाग्य पर मैं रोता हूँ,
कैसे भाग्य तुम्हारा लिख दूँ?
मैं सागर में बहती कश्ती,
कैसे तुम्हें किनारा लिख दूँ?
मैं कैसे जयकारा लिख दूँ?
और जीते को हारा लिख दूँ?
अँधियारे को सूरज लिखकर,
सूरज को अँधियारा लिख दूँ?
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सूरज सिंह राजपूत ( जमशेदपुर, झारखण्ड )
Suraj Singh Rajput

