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    Home » चुनाव आयोग ने फॉर्म-6 से हटाया SIR घोषणा का कॉलम, अब अलग आवेदन की व्यवस्था, छह सप्ताह में तीसरी बार बदला
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    चुनाव आयोग ने फॉर्म-6 से हटाया SIR घोषणा का कॉलम, अब अलग आवेदन की व्यवस्था, छह सप्ताह में तीसरी बार बदला

    News DeskBy News DeskNovember 4, 2026No Comments3 Mins Read
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    नई दिल्ली. भारतीय निर्वाचन आयोग ने नए मतदाताओं के पंजीकरण से जुड़े फॉर्म-6 में बदलाव करते हुए SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) की घोषणा वाला कॉलम हटा दिया है. अब नए मतदाताओं को वोटर रजिस्ट्रेशन और SIR की प्रक्रिया के लिए ECINet पोर्टल पर अलग-अलग फॉर्म भरने होंगे. यह व्यवस्था उन राज्यों में भी लागू होगी, जहां SIR की प्रक्रिया चल रही है. पिछले छह सप्ताह में यह तीसरी बार है, जब आयोग ने फॉर्म-6 में बदलाव किया है.

    दरअसल, आयोग ने ऑनलाइन फॉर्म-6 में SIR से संबंधित एक अतिरिक्त कॉलम जोड़ा था. इसे भरना अनिवार्य था. इसमें आवेदक को तीन विकल्पों में से एक चुनकर बताना होता था कि उसका, उसके माता-पिता या दादा-दादी का नाम वर्ष 2000 के बाद हुए विशेष गहन पुनरीक्षण की मतदाता सूची में शामिल था या नहीं. इस घोषणा के बिना आवेदन आगे नहीं बढ़ सकता था. अब यह कॉलम हटाकर SIR के लिए अलग फॉर्म की व्यवस्था की गई है.

    फॉर्म-6 में SIR घोषणा जोड़ने के फैसले पर चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आपत्ति जताई थी. रिपोर्ट के अनुसार, विवेक जोशी ने 16 मई को कहा था कि निर्धारित फॉर्म में बदलाव के लिए कानूनी संशोधन जरूरी है. वहीं, सुखबीर सिंह संधू ने 13 अगस्त को इस बदलाव को अनधिकृत और अवैध बताते हुए इसे हटाने की मांग की थी. इसके बावजूद जुलाई में ऑनलाइन फॉर्म-6 में यह कॉलम जोड़ दिया गया.

    फॉर्म-6 का प्रारूप मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के तहत निर्धारित है. इसमें संशोधन का अधिकार केंद्र सरकार के पास है. ऐसे में आयोग द्वारा अपने स्तर पर बदलाव किए जाने पर सवाल उठे थे.

    आयोग ने 26 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल जवाबी हलफनामे में बताया था कि उसकी इलेक्टोरल रोल डिवीजन ने 21 अक्टूबर को दोनों प्रक्रियाओं को अलग करने का निर्णय लिया था. आयोग के मुताबिक, पहले दोनों प्रक्रियाओं को एक फॉर्म में रखने का उद्देश्य आवेदकों को सुविधा देना था, ताकि उन्हें दो बार OTP और ई-सिग्नेचर की प्रक्रिया से न गुजरना पड़े. हालांकि, आयोग ने स्वीकार किया कि ऑनलाइन फॉर्म में घोषणा शामिल करने से ऐसा प्रतीत हो सकता था कि निर्धारित प्रारूप में संशोधन किया गया है. इसी कारण दोनों प्रक्रियाओं के लिए अलग-अलग फॉर्म करने का फैसला लिया गया.

    आयोग के भीतर फैसलों को लेकर अन्य आपत्तियां भी सामने आई हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 10 महीनों में दोनों चुनाव आयुक्तों ने आयोग के निर्णयों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कराई थीं. इनमें मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और बहाल करने के अलावा सॉफ्टवेयर तथा प्रशासनिक कामकाज से जुड़े मुद्दे शामिल थे.

    ECINet की कार्यप्रणाली में भी बदलाव

    आयोग ने ECINet सॉफ्टवेयर की प्रक्रिया में भी कई बदलाव किए हैं. अब दस्तावेजों की कमी या तार्किक विसंगतियों के मामलों में मतदाताओं की व्यक्तिगत सुनवाई अपवादस्वरूप होगी. ऐसे मामलों में बूथ लेवल अधिकारी (BLO) मतदाताओं के घर जाकर जरूरी दस्तावेज जुटाएंगे. मतदाता निर्धारित 13 श्रेणियों के अलावा अन्य दस्तावेज भी जमा कर सकेंगे. वहीं, इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) को ऐसे मामलों में स्वयं निर्णय लेने का अधिकार दिया गया है.

    इसके अलावा आयोग की बैठकों से पहले एजेंडा साझा करने और बाद में कार्यवाही का विवरण जारी करने का निर्णय लिया गया है. अधिकारियों के विदेश दौरों के लिए आयोग की मंजूरी अनिवार्य होगी. नए आईटी मॉड्यूल और पोर्टल लागू करने से पहले अधिकारियों की समिति और फिर आयोग की स्वीकृति लेनी होगी. ECINet की कार्यप्रणाली और कानूनी प्रावधानों के अनुपालन की समीक्षा के लिए विशेषज्ञ समिति भी गठित की गई है.

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