संघ के प्रमुख उत्सव शरद पूर्णिमा पर हिंदू एकता, संस्कार और राष्ट्रधर्म का संदेश
बेगूसराय /राष्ट्र संवाद ब्यूरो
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख उत्सवों में शामिल शरद पूर्णिमा महोत्सव के माध्यम से हिंदू समाज को संगठित करने, सांस्कृतिक चेतना जगाने और राष्ट्र के प्रति कर्तव्य बोध मजबूत करने हेतु संघ की तेघड़ा नगर इकाई की ओर से रविवार की रात रामजी लाल शिशु सरस्वती विद्या मंदिर, तेघड़ा में स्वामी विवेकानंद प्रौढ़ व्यवसाय संयुक्त शाखा के तत्वावधान में आयोजित महोत्सव में धार्मिक महत्व के साथ सामाजिक एकता और भगवान श्रीराम के जीवन आदर्शों पर बौद्धिक चर्चा हुई।
हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा का धार्मिक मान्यताओं के प्रति प्रकाश डालते हुए वक्ताओं ने कहा कि इस दिन चंद्रमा सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है। यह रात्रि भगवान श्रीकृष्ण की महारास लीला, मां लक्ष्मी की आराधना और चंद्रमा की शीतल चांदनी से जुड़ी है। कई परंपराओं में चंद्रमा की रोशनी में खीर रखने और प्रसाद के रूप में ग्रहण करने की मान्यता भी है। यह पर्व आस्था, साधना और भारतीय सांस्कृतिक परंपरा की निरंतरता का प्रतीक माना जाता है।
तेघड़ा खंड के बौद्धिक प्रमुख सत्यम कुमार सिन्हा ने शरद पूर्णिमा के धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला। जिला प्रचार प्रमुख रजनीश कुमार ने हिंदू समाज की एकजुटता, सामाजिक समरसता और राष्ट्र के प्रति समर्पण की आवश्यकता बताई।
नगर कार्यवाह उमेश कुमार ने शाखा के माध्यम से अनुशासन, संस्कार और सामाजिक उत्तरदायित्व विकसित करने पर जोर दिया। जिला कार्यकारिणी सदस्य सुरेंद्र कुमार ने भगवान श्रीराम के जीवन से मर्यादा, त्याग, कर्तव्यपालन और लोककल्याण की प्रेरणा लेने का आह्वान किया।
महोत्सव में भारतीय संस्कृति के संरक्षण, समाज की एकता और राष्ट्रहित में सक्रिय योगदान देने का संदेश दिया गया।
संघ के प्रमुख उत्सव शरद पूर्णिमा पर हिंदू एकता, संस्कार और राष्ट्रधर्म का संदेश
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