लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
जमशेदपुर के गायत्री ज्ञान मंदिर, भालूबासा में गायत्री परिवार के युवाओं ने किया पितृ तर्पण, जिसके माध्यम से पितृपक्ष के अंतिम दिन 25 परिजनों ने अपने पूर्वजों को तर्पण कर भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। इस आध्यात्मिक आयोजन का उद्देश्य पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करना और शांति की कामना करना था।
गायत्री परिवार के युवाओं ने किया पितृ तर्पण और कर्मकांड
गायत्री परिवार के आचार्य पंडित मुन्ना पांडेय ने पितृपक्ष के महत्व की विस्तृत जानकारी देते हुए समस्त कर्मकांड संपन्न कराया। उन्होंने बताया कि पितृ तर्पण न केवल एक परंपरा है, बल्कि यह हमारी जड़ों से जुड़ने और पूर्वजों के आशीर्वाद को प्राप्त करने का एक माध्यम है।
नवरात्र अनुष्ठान और कलश स्थापना
नवरात्र के अवसर पर 10 अक्टूबर की शाम छह बजे मंदिर में कलश स्थापना की गई। परिजनों ने 24 हजार गायत्री महामंत्र जप का कठिन संकल्प लिया है। यह अनुष्ठान आध्यात्मिक शुद्धि और मानसिक शांति के लिए समर्पित है।
नवरात्र के दौरान प्रतिदिन सुबह सात बजे हवन-यज्ञ का आयोजन किया जाएगा। इस अनुष्ठान की पूर्णाहुति 20 अक्टूबर को पांच कुंडीय यज्ञ के साथ होगी, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद है।
विजयादशमी पर सेवा कार्य
वहीं, 21 अक्टूबर को विजयादशमी विसर्जन जुलूस के अवसर पर देवदत्त होटल के पास प्याऊ सेवा शिविर लगाया जाएगा। गायत्री परिवार का मानना है कि सच्ची भक्ति समाज सेवा में निहित है, इसलिए इस विशेष दिन पर राहगीरों और श्रद्धालुओं के लिए पेयजल की व्यवस्था की जाएगी।
अधिक जानकारी के लिए आप All World Gayatri Pariwar की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं, जहाँ आपको गायत्री मंत्र और आध्यात्मिक जीवन के बारे में विस्तृत जानकारी मिलेगी।
इस प्रकार जमशेदपुर के भालूबासा क्षेत्र में धार्मिक आस्था और सेवा भाव का संगम देखने को मिल रहा है, जहाँ युवा पीढ़ी अपनी संस्कृति और परंपराओं का संरक्षण कर रही है।

