टाटा ट्रस्ट्स में घमासान, अपनों ने ही खोला मोर्चा
*श्रीनिवासन-विजय सिंह की शिकायतों पर नोएल टाटा खेमे का पलटवार, चैरिटी कमिश्नर ने 12 अक्टूबर तक मांगा जवाब*
मृत्युंजय बर्मन
जमशेदपुर/मुम्बई
टाटा संस के नेतृत्व और लिस्टिंग को लेकर चल रहा विवाद अब टाटा ट्रस्ट्स के भीतर भी खुलकर सामने आ गया है। वरिष्ठ ट्रस्टी वेंणु श्रीनिवासन और विजय सिंह की शिकायतों के बाद महाराष्ट्र के चैरिटी कमिश्नर ने सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट से 12 अक्टूबर तक जवाब मांगा है। इसी बीच नोएल टाटा समेत चार ट्रस्टियों ने दोनों के रुख पर सवाल उठाते हुए पलटवार किया है।
नोएल टाटा, दारियस खंबाटा, नेविल टाटा और भास्कर भट्ट ने अपने पत्र में कहा कि श्रीनिवासन और विजय सिंह पहले टाटा संस को गैर-सूचीबद्ध रखने के सामूहिक फैसलों का हिस्सा रहे हैं, लेकिन बाद में उन्होंने लिस्टिंग के पक्ष में अलग रुख अपनाया। ट्रस्टियों ने दोनों के आचरण और उनके दायित्वों को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
विवाद टाटा संस की प्रस्तावित पुनर्संरचना को लेकर भी है। ट्रस्ट के एक पक्ष की ओर से टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम्स सॉल्यूशंस और टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स के टाटा संस में विलय का विकल्प सामने रखा गया है। इसका उद्देश्य टाटा संस को मौजूदा नियामकीय ढांचे में रहते हुए लिस्टिंग से बचाने का रास्ता तलाशना बताया जा रहा है। श्रीनिवासन और सिंह ने इस प्रस्ताव पर पर्याप्त विचार-विमर्श नहीं होने का आरोप लगाया है।
चैरिटी कमिश्नर के समक्ष शिकायतों में ट्रस्टियों की नियुक्ति, आंतरिक शासन व्यवस्था और टाटा संस के व्यावसायिक मामलों में ट्रस्ट की कथित भूमिका जैसे मुद्दे उठाए गए हैं। हालांकि, फिलहाल कमिश्नर ने केवल जवाब मांगा है। इसे किसी आरोप की पुष्टि या जांच के निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जा सकता।
अब 12 अक्टूबर तक ट्रस्ट के जवाब और उसके बाद चैरिटी कमिश्नर की संभावित कार्रवाई पर निगाह रहेगी। इस बीच टाटा संस के नेतृत्व, लिस्टिंग और ट्रस्ट्स की आंतरिक एकजुटता, तीनों मोर्चों पर विवाद गहराता दिखाई दे रहा है।

