भाजपा की राज्यसभा सूची में संगठन को तरजीह, ब्राह्मण चेहरे को जगह नहीं
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जेपी गुप्ता
लखनऊ। उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के लिए चुने जाने वाले दस सदस्यों में भाजपा ने आठ प्रत्याशियों के नाम घोषित कर दिए हैं। इन दस सदस्यों का कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त हो रहा है। भाजपा की सूची में किसी भी मौजूदा सदस्य को दोबारा प्रत्याशी नहीं बनाया गया है। खास बात यह है कि घोषित आठ प्रत्याशियों में एक भी ब्राह्मण चेहरा शामिल नहीं है। इसके साथ ही हरदीप पुरी, बीएल वर्मा, नीरज शेखर और अरुण सिंह जैसे नामों को भी इस बार मौका नहीं मिला है।
गीता शाक्य, सीमा द्विवेदी और बृजलाल भी दोबारा पार्टी का भरोसा हासिल करने में सफल नहीं रहे। आठवीं सीट डॉ. दिनेश शर्मा के इस्तीफे के कारण रिक्त हुई है। उन्हें अंडमान-निकोबार का राज्यपाल नियुक्त किया गया है।
भाजपा ने जिन नेताओं को राज्यसभा के लिए प्रत्याशी बनाया है, उनमें धर्मपाल सिंह प्रमुख नाम हैं। वह योगी सरकार में दो बार मंत्री रह चुके हैं और वर्तमान में आंवला से विधायक तथा प्रदेश सरकार में मंत्री हैं। राधाकांत ओझा जाने-माने अधिवक्ता हैं और दो बार इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रह चुके हैं।
प्रकाश पाल वर्तमान में भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष हैं। इससे पहले वह कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र के क्षेत्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। विद्यासागर सोनकर विधान परिषद में उपनेता रह चुके हैं। उन्हें भाजपा का प्रमुख दलित चेहरा माना जाता है और वह प्रदेश संगठन में महामंत्री की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं।
गोपी कृष्ण पांडेय को संघ की पृष्ठभूमि से आने वाला प्रमुख संगठनकर्ता माना जाता है। प्रियंका सिंह रावत वर्ष 2014 में बाराबंकी से सांसद रह चुकी हैं। राम प्रताप सिंह चौहान पूर्व विधायक, प्रदेश भाजपा के महामंत्री और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रभारी हैं। आठवां नाम श्रुति गंगवार का है, जो झारखंड और आंध्र प्रदेश के राज्यपाल संतोष गंगवार की बेटी हैं।
प्रत्याशियों की सूची पर नजर डालें तो भाजपा ने संगठन में सक्रिय रूप से काम करने वाले नेताओं को अपेक्षाकृत अधिक तरजीह दी है। हालांकि, सूची में किसी भी ब्राह्मण चेहरे को जगह न मिलना राजनीतिक दृष्टि से चर्चा का विषय बन गया है
