पाकिस्तान से 300 करोड़ आने का डर, डिजिटल अरेस्ट कर 4.50 लाख की ठगी।
आपके बैंक खाते में पाकिस्तान से 300 करोड़ रुपये आए हैं… आपके खिलाफ कार्रवाई होने वाली है… गिरफ्तारी से बचना है तो हमारी बात मानिए।
बस इसी डर और धमकी के जाल में फंसाकर साइबर अपराधियों ने बोकारो के एक व्यक्ति को डिजिटल अरेस्ट कर लिया और उसके परिवार से 4 लाख 50 हजार रुपये की ठगी कर ली।
लेकिन इस साइबर क्राइम की कहानी यहीं खत्म नहीं हुई… बोकारो साइबर पुलिस ने तकनीकी जांच के सहारे ठगी के नेटवर्क तक पहुंच बनाई और उत्तर प्रदेश के आगरा से दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
मामला बोकारो के गोमिया थाना क्षेत्र का है।
साइबर अपराधियों ने खुद को महाराष्ट्र ATS का अधिकारी बताया और गिरीश चंद्र त्रिपाठी को फोन कर कहा कि उनके खाते में पाकिस्तान के एक खाते से 300 करोड़ रुपये आए हैं।
इतना ही नहीं, आरोपियों ने गिरीश चंद्र त्रिपाठी पर 16 लाख रुपये कमीशन लेने का भी आरोप लगाया और गिरफ्तारी का डर दिखाना शुरू कर दिया।
पाकिस्तान… 300 करोड़… ATS… गिरफ्तारी…
इन शब्दों ने गिरीश चंद्र त्रिपाठी को इतना डरा दिया कि वह साइबर अपराधियों के बताए तरीके से डिजिटल अरेस्ट के जाल में फंस गए।
डिजिटल अरेस्ट के दौरान अपराधियों ने लगातार दबाव बनाया।
डर और घबराहट के बीच गिरीश चंद्र त्रिपाठी ने इस पूरे मामले की जानकारी अपनी पत्नी पुष्पलता त्रिपाठी को दी।
इसके बाद साइबर अपराधियों ने अलग-अलग तरीकों से दबाव बनाकर परिवार से कुल 4 लाख 50 हजार रुपये अपने बताए बैंक खातों में ट्रांसफर करा लिए।
ठगी का अहसास होने के बाद पुष्पलता त्रिपाठी ने 13 मार्च 2026 को बोकारो साइबर थाना में शिकायत दर्ज कराई।
मामला दर्ज होते ही बोकारो एसपी के निर्देश पर साइबर थाना की विशेष टीम गठित की गई।
पुलिस ने मोबाइल नंबर, बैंक खातों और दूसरे तकनीकी साक्ष्यों की जांच शुरू की।
जांच की कड़ियां जब उत्तर प्रदेश के आगरा तक पहुंचीं, तो पुलिस टीम आगरा पहुंची और दो संदिग्ध आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान 23 वर्षीय रवि कुमार और 21 वर्षीय ऋतिक कुशवाहा के रूप में हुई है।
पुलिस के मुताबिक, यह गिरोह दूसरे लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम ट्रांसफर करने के लिए करता था।
पुलिस ने आरोपियों के पास से iPhone 15 और Nothing Phone 3a बरामद किया है।
पुलिस के अनुसार, मोबाइल फोन की जांच में साइबर ठगी से जुड़े ऑडियो और मैसेज के डिजिटल साक्ष्य मिले हैं।
पुलिस का कहना है कि ऋतिक कुशवाहा कई वर्षों तक कंबोडिया में रहा था और भारत लौटने के बाद कथित तौर पर साइबर ठगी के इस नेटवर्क से जुड़ा।
फिलहाल बोकारो साइबर पुलिस बरामद मोबाइल और दूसरे डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि 4 लाख 50 हजार की इस ठगी के पीछे सिर्फ दो आरोपी हैं या फिर इसके पीछे साइबर अपराधियों का कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है।

