बच्चों की बस सेवा पर कब जागेगा शहर का नेतृत्व?
अमन शांडिल्य
जमशेदपुर में छोटी-बड़ी सैकड़ों स्कूल-कॉलेज हैं और रोज हजारों बच्चे अपने घरों से शिक्षण संस्थानों तक आते-जाते हैं। इसके बावजूद शहर में बच्चों के लिए व्यवस्थित सरकारी स्कूल बस सेवा का नहीं होना एक ऐसा सवाल है, जिसे अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। निजी स्कूलों अथवा एजेंसियों की बसें अपनी जगह हैं, लेकिन सार्वजनिक परिवहन की पर्याप्त व्यवस्था आखिर क्यों नहीं विकसित हो सकी, यह सवाल जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से पूछा जाना चाहिए। पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त की यह टिप्पणी कि उन्हें यह देखकर आश्चर्य होता है कि जमशेदपुर जैसा शहर ऐसा है, जहां स्कूल बसें नहीं चलतीं, इस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करती है। यदि जिला प्रशासन भी इस आवश्यकता को महसूस कर रहा है तो फिर अब तक इस दिशा में ठोस पहल क्यों नहीं हुई?
विडंबना देखिए कि इसी जमशेदपुर ने राज्य और देश को मुख्यमंत्री, मंत्री, सांसद, विधायक और कई प्रभावशाली जनप्रतिनिधि दिए हैं। सरकारें बदलीं, राजनीतिक समीकरण बदले, विकास के बड़े-बड़े दावे हुए, लेकिन बच्चों के सुरक्षित और सुलभ परिवहन जैसी बुनियादी जरूरत आज भी सवाल बनी हुई है। सवाल केवल नेताओं से नहीं, राज्य सरकार, जिला प्रशासन और शहर के औद्योगिक प्रबंधन से भी है। जमशेदपुर के विकास में टाटा स्टील की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, इसलिए सार्वजनिक परिवहन जैसी नागरिक सुविधा के लिए सरकार और टाटा स्टील प्रशासन के बीच समन्वित पहल क्यों नहीं हो सकती?
यह मामला किसी दल के पक्ष या विपक्ष का नहीं, शहर के बच्चों और अभिभावकों की रोजमर्रा की जरूरत का है। जनप्रतिनिधियों को अब केवल बयान देने के बजाय प्रशासन और टाटा स्टील प्रबंधन के साथ बैठकर ठोस कार्ययोजना बनानी चाहिए। शहर के प्रबुद्ध नागरिक भी इस मुद्दे पर सामूहिक पहल कर सकते हैं। आखिर बच्चों की सुरक्षा और सुविधा राजनीति से ऊपर होनी चाहिए। सवाल सीधा है जब जमशेदपुर में इतने बड़े स्तर पर शिक्षा व्यवस्था मौजूद है, तो बच्चों के लिए सार्वजनिक बस सेवा क्यों नहीं? जनप्रतिनिधि बताएं, सरकारी स्कूल बस सेवा शुरू कराने के लिए उनकी पहल कब दिखाई देगी?

