मध्य विद्यालय परिहारा से नौ बोरा चावल की चोरी का मामला सामने आने के बाद ग्रामीणों की सतर्कता से सरकारी संपत्ति बचाई गई।
मध्य विद्यालय परिहारा से नौ बोरा चावल की चोरी: जांच शुरू
बखरी-बेगूसराय। परिहारा मध्य विद्यालय परिहारा से ई-रिक्शा पर लादकर चावल ले जाने का मामला सामने आया है। वार्ड सदस्य एवं ग्रामीणों ने ई-रिक्शा को रोककर उस पर लदे नौ बोरा चावल को पकड़ लिया। इसके बाद तत्काल पुलिस प्रशासन को सूचना दी गई, जिसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने चावल को बरामद कर लिया।
घटना की सूचना मिलने पर जिला परिषद सदस्य अमित कुमार देव भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने मामले की जानकारी लेते हुए बीईओ बखरी से दूरभाष पर बात की और पूरे मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करने का अनुरोध किया।
ग्रामीणों की सतर्कता से पकड़ा गया चावल
वार्ड सदस्य एवं ग्रामीणों के अनुसार, विद्यालय परिसर से चावल ई-रिक्शा पर लादकर बाहर ले जाया जा रहा था। इसी दौरान ग्रामीणों की नजर ई-रिक्शा पर पड़ी और उसे रोक लिया गया। ई-रिक्शा पर कुल नौ बोरा चावल लदा पाया गया।
मामले की सूचना पुलिस प्रशासन को दिए जाने के बाद चावल को बरामद कराया गया। घटना के बाद विद्यालय के खाद्यान्न की सुरक्षा एवं व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों में चर्चा है।
जिला परिषद सदस्य अमित कुमार देव ने कहा कि विद्यालय के खाद्यान्न से संबंधित मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित लोगों पर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
पुलिस एवं शिक्षा विभाग द्वारा मामले की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि चावल किस उद्देश्य से विद्यालय परिसर से बाहर ले जाया जा रहा था।
मध्याह्न भोजन योजना के तहत विद्यालयों में बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के लिए खाद्यान्न की आपूर्ति की जाती है। ऐसी घटनाएं योजना की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करती हैं। अधिक जानकारी के लिए शिक्षा मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट देखें।
बिहार में मध्याह्न भोजन योजना का संचालन शिक्षा विभाग द्वारा किया जाता है, जिसके तहत प्राथमिक एवं मध्य विद्यालयों में नामांकित बच्चों को प्रतिदिन गर्म पका भोजन दिया जाता है। इस योजना के लिए खाद्यान्न का आवंटन भारतीय खाद्य निगम के माध्यम से होता है।
खाद्यान्न की चोरी या हेराफेरी न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि गरीब बच्चों के पोषण अधिकार का भी हनन करती है। पूर्व में भी राज्य के विभिन्न जिलों से इस तरह की शिकायतें मिलती रही हैं, जिसके चलते विभाग ने निगरानी तंत्र को मजबूत करने के निर्देश दिए हैं।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी से ही ऐसी अनियमितताओं पर अंकुश लगाया जा सकता है। परिहारा की यह घटना सामुदायिक निगरानी का एक उदाहरण है, जिसने समय रहते सरकारी संपत्ति को बचा लिया।
प्रशासन से अपेक्षा है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो ताकि भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति न हो।


