लेखक: नितेश सिंह राजपूत
बिहार में 2026 में होने वाले पंचायत चुनाव से पहले EBC आरक्षण को लेकर सरकार ने बड़ी तैयारी शुरू कर दी है। पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने गुरुवार को मीडिया से रूबरू होते हुए कहा है कि इस बार EBC आरक्षण राज्य स्तर के तय प्रतिशत से नहीं, बल्कि हर पंचायत में जमीनी सर्वे के आधार पर तय किया जाएगा।
EBC आरक्षण के लिए नई गाइडलाइन तैयार
मंत्री के अनुसार पंचायती राज विभाग की विशेषज्ञ टीम नई गाइडलाइन तैयार कर रही है। इस गाइडलाइन में हर पंचायत में EBC की आबादी, उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति और राजनीतिक प्रतिनिधित्व का आकलन किया जाएगा। एक महीने के भीतर यह गाइडलाइन अत्यंत पिछड़ा वर्ग आयोग को भेजी जाएगी। आयोग ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया पूरी कर सरकार को रिपोर्ट सौंपेगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस बार पंचायत चुनाव से पहले किसी भी पंचायत का नया परिसीमन नहीं होगा। चुनाव मौजूदा पंचायत सीमाओं पर ही कराए जाएंगे।
10 साल बाद बदलेगा आरक्षण रोस्टर
मंत्री दीपक प्रकाश ने बताया कि बिहार पंचायत राज अधिनियम 2006 के तहत हर 10 साल पर आरक्षित सीटों का रोस्टर बदला जाता है। पिछली बार 2016 में रोस्टर तैयार हुआ था, जिस पर 2016 और 2021 के दो चुनाव हुए। अब 10 साल पूरे हो गए हैं, इसलिए 2026 के चुनाव में नया रोस्टर लागू होगा।
नए रोस्टर के लागू होने से कई सामान्य सीटें आरक्षित हो सकती हैं और कई आरक्षित सीटें सामान्य हो सकती हैं। मंत्री ने कहा कि आरक्षण की पूरी प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और कानून के अनुसार पारदर्शी तरीके से पूरी की जाएगी।
ट्रिपल टेस्ट प्रक्रिया और उसका महत्व
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार आरक्षण निर्धारण के लिए ट्रिपल टेस्ट प्रक्रिया अनिवार्य है। इसमें तीन चरण शामिल हैं: पहला, संबंधित वर्ग की आबादी का सटीक आंकड़ा जुटाना; दूसरा, उनकी सामाजिक-आर्थिक पिछड़ेपन का आकलन; और तीसरा, राजनीतिक प्रतिनिधित्व में उनकी भागीदारी की समीक्षा। बिहार सरकार द्वारा गठित विशेषज्ञ टीम इसी प्रक्रिया के तहत हर पंचायत में EBC समुदाय की वास्तविक स्थिति का अध्ययन करेगी। यह प्रक्रिया पारदर्शिता सुनिश्चित करेगी और आरक्षण का लाभ वास्तविक हकदारों तक पहुंचाने में मदद करेगी। अधिक जानकारी के लिए भारत निर्वाचन आयोग की वेबसाइट देखें।
बिहार पंचायत राज अधिनियम 2006 के प्रावधान
बिहार पंचायत राज अधिनियम 2006 के अनुसार प्रत्येक दस वर्ष पर आरक्षित सीटों का रोस्टर पुनर्निर्धारित किया जाता है। वर्ष 2016 में तैयार रोस्टर पर 2016 और 2021 के दो चुनाव संपन्न हुए। अब दस वर्ष की अवधि पूर्ण होने पर 2026 के चुनाव हेतु नया रोस्टर लागू होगा। इस परिवर्तन से अनेक सामान्य सीटें आरक्षित हो सकती हैं, जबकि कई आरक्षित सीटें सामान्य श्रेणी में आ सकती हैं। मंत्री दीपक प्रकाश ने स्पष्ट किया कि पूरी प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और कानून के अनुसार पारदर्शी तरीके से पूरी की जाएगी।
आगामी चुनाव की तैयारियों पर एक नजर
पंचायती राज विभाग की विशेषज्ञ टीम द्वारा तैयार की जा रही नई गाइडलाइन एक माह के भीतर अत्यंत पिछड़ा वर्ग आयोग को प्रेषित की जाएगी। आयोग द्वारा ट्रिपल टेस्ट पूर्ण कर रिपोर्ट सरकार को सौंपी जाएगी। इसके आधार पर ही अंतिम आरक्षण सूची जारी होगी। मंत्री ने यह भी साफ किया कि चुनाव वर्तमान पंचायत सीमाओं पर ही होंगे, कोई नया परिसीमन नहीं होगा। इस निर्णय से चुनावी प्रक्रिया में विलंब की आशंका कम होगी। EBC समुदाय के प्रतिनिधित्व को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की दिशा में यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विशेषज्ञों की राय और राजनीतिक प्रभाव
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंचायत स्तर पर EBC आबादी के आधार पर आरक्षण तय करने से ग्रामीण राजनीति में नए समीकरण उभर सकते हैं। जिन पंचायतों में अत्यंत पिछड़ा वर्ग की आबादी अधिक है, वहां उनकी भागीदारी बढ़ेगी। वहीं, रोस्टर परिवर्तन से वर्तमान जनप्रतिनिधियों के चुनावी क्षेत्र बदल सकते हैं। यह कदम सामाजिक न्याय की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है, बशर्ते सर्वेक्षण प्रक्रिया निष्पक्ष और समयबद्ध हो।
निष्कर्ष
बिहार में 2026 के पंचायत चुनाव EBC आरक्षण के नए मानदंडों के साथ ऐतिहासिक होंगे। सरकार की पहल सुप्रीम कोर्ट के मापदंडों के अनुरूप है। पारदर्शी सर्वेक्षण और ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया सुनिश्चित करेगी कि आरक्षण का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचे। मतदाताओं और उम्मीदवारों को नए रोस्टर के अनुसार अपनी रणनीति बनानी होगी। यह लोकतंत्र के जमीनी स्तर को मजबूत करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।

