लेखक: राष्ट्र संवाद डेस्क
सबल संस्था की पहल पर दृष्टिबाधित पर्वतारोहियों ने असंभव को संभव कर दिखाया है। कहानी का सिर्फ आखिरी पड़ाव था, जो इससे बहुत पहले शुरू हो चुकी थी।
यह सबल की उस सोच को भी दर्शाता है, जिसका उद्देश्य दिव्यांगजनों के समावेशन को अलग-अलग प्रयासों तक सीमित रखने के बजाय ऐसा सामुदायिक तंत्र तैयार करना है, जहाँ दिव्यांगजन अपने अधिकारों का इस्तेमाल कर सकें, अवसरों तक पहुँच बना सकें और सम्मान व आत्मनिर्भरता के साथ समाज में पूरी तरह भागीदारी कर सकें।
सबल, दिव्यांगजनों के अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत मान्यता प्राप्त 21 प्रकार की दिव्यांगताओं के लिए काम करता है। इसके तहत देशभर में विभिन्न साझेदारियों का एक बढ़ता नेटवर्क तैयार किया गया है। प्रशिक्षण, जागरूकता, सरकारी सुविधाओं और अधिकारों तक पहुँच तथा क्षमता विकास के माध्यम से यह नेटवर्क दिव्यांगजनों के समावेशन को मजबूत करने का काम करता है।
संभावनाओं की नई परिभाषा
पश्चिमी सिंहभूम के एक दूरदराज़ गाँव से हिमालय की चोटी तक का सफर केवल किलोमीटर और ऊँचाई का सफर नहीं है।
यह उस आत्मविश्वास की कहानी है, जो कदम-दर-कदम बढ़ा; उन अवसरों की कहानी है, जिन्होंने नई राहें खोलीं; उन डर की कहानी है, जिन्हें पीछे छोड़ा गया; और उन अनगिनत संभावनाओं की कहानी है, जिन्हें हौसले और सही अवसर ने हकीकत में बदल दिया।
शेखर और धीरोज का अद्भुत सफर
शेखर और धीरोज के लिए दृष्टिबाधित पर्वतारोही बनना कभी सिर्फ पहाड़ की चोटी तक पहुँचने की बात नहीं थी। यह साबित करने का सफर था कि परिस्थितियाँ, भौगोलिक सीमाएँ या लोगों की सोच किसी व्यक्ति की क्षमता तय नहीं कर सकती।
उनकी उपलब्धि पूरे भारत के समुदायों के लिए एक मजबूत संदेश है—जब समावेशन के साथ अवसर और दृढ़ संकल्प जुड़ते हैं, तो असाधारण उपलब्धियाँ हासिल की जा सकती हैं।
जहाँ बुनियादी सुविधाओं और आने-जाने में मदद करने वाले साधनों तक पहुँच भी एक चुनौती थी, वहीं से लद्दाख की ऊँची पहाड़ियों तक का उनका सफर पहुँचा। शेखर ने समुद्र तल से 20,000 फीट से अधिक ऊँची चोटी पर तिरंगा लहराया, जबकि स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के बावजूद धीरोज 16,732 फीट की ऊँचाई तक स्थित बेस कैंप तक पहुँचे। उन्होंने साबित कर दिया कि बड़ी से बड़ी यात्रा भी आत्मनिर्भरता की दिशा में उठाए गए एक छोटे से कदम से शुरू होती है।
उन्होंने 25 अगस्त को अपना सफर शुरू किया और 31 अगस्त 2026 को इसे पूरा किया।
समावेशन की शक्ति: सबल का योगदान
इस सफर में इन दोनों दृष्टिबाधित पर्वतारोहियों ने न केवल परिस्थितियों और लोगों की सोच से बनी सीमाओं को चुनौती दी, बल्कि यह भी दिखाया कि इंसान की क्षमता की कोई तय सीमा नहीं होती। सबल द्वारा प्रदान किए गए प्रशिक्षण और संसाधनों ने उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार किया। संस्था के नेटवर्क ने सरकारी योजनाओं तक उनकी पहुँच सुनिश्चित की, जिससे उन्हें आवश्यक उपकरण और वित्तीय सहायता मिल सकी।
भारत में दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के कार्यान्वयन में सबल जैसे संगठनों की भूमिका महत्वपूर्ण है। यह अधिनियम 21 प्रकार की दिव्यांगताओं को मान्यता देता है और समान अवसर, अधिकारों की सुरक्षा और पूर्ण भागीदारी सुनिश्चित करता है। संयुक्त राष्ट्र दिव्यांगजन अधिकार कन्वेंशन भी समावेशी समाज के निर्माण पर जोर देता है।
प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण
पर्वतारोहण के लिए विशेष प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है। दृष्टिबाधित व्यक्तियों के लिए यह प्रशिक्षण और भी जटिल होता है। सबल ने विशेषज्ञ प्रशिक्षकों के साथ मिलकर एक अनुकूलित पाठ्यक्रम विकसित किया जिसमें दिशा-निर्देशन तकनीक, सुरक्षा प्रोटोकॉल और उच्च ऊंचाई पर अनुकूलन शामिल थे। शेखर और धीरोज ने महीनों तक कठोर प्रशिक्षण लिया, जिसमें शारीरिक सहनशक्ति, मानसिक लचीलापन और टीम वर्क पर ध्यान केंद्रित किया गया।
सामाजिक प्रभाव और जागरूकता
इस अभियान का प्रभाव व्यक्तिगत उपलब्धि से कहीं आगे जाता है। इसने ग्रामीण झारखंड और पूरे देश में दिव्यांगजनों के प्रति धारणा को बदलने का काम किया है। स्थानीय समुदाय अब दिव्यांगता को अक्षमता नहीं, बल्कि एक अलग क्षमता के रूप में देख रहे हैं। स्कूलों और कॉलेजों में उनकी कहानी प्रेरणा का स्रोत बन गई है।
भविष्य की राह: समावेशी साहसिक पर्यटन
इस सफलता ने समावेशी साहसिक पर्यटन के द्वार खोल दिए हैं। सबल अब अन्य दिव्यांगजनों के लिए समान अवसर बनाने की योजना बना रहा है, जिसमें ट्रैकिंग, रिवर राफ्टिंग और पैराग्लाइडिंग जैसी गतिविधियाँ शामिल हैं। सरकार और निजी क्षेत्र की साझेदारी से बुनियादी ढांचे को सुलभ बनाया जा सकता है, जिससे अधिक से अधिक दिव्यांगजन रोमांच का अनुभव कर सकें।
अंततः, शेखर और धीरोज की कहानी यह साबित करती है कि जब समाज बाधाओं को हटाने और अवसर प्रदान करने के लिए एकजुट होता है, तो हर व्यक्ति अपनी पूरी क्षमता का एहसास कर सकता है। सबल इस दृष्टि को साकार करने में अग्रणी बना हुआ है।
