यूसील में महिला सुरक्षा कठघरे में! प्रताड़ना और धमकी के मामलों ने खड़े किए गंभीर सवाल
राष्ट्र संवाद संवाददाता
*जादूगोड़ा :* देश की अति संवेदनशील और नवरत्न कंपनी यूसील (यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड) जादूगोड़ा इन दिनों सुर्खियों में है। वजह है महिलाओं से जुड़े लगातार सामने आ रहे विवाद। कभी महिला अधिकारी को रात में फोन कर गालियां और क्वार्टर पर हंगामा कर जान से मारने की धमकी, तो कभी लेखा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी पर उनकी पत्नी द्वारा ही गंभीर आरोप लगाकर प्रताड़ना की शिकायत। इन दोनों घटनाओं ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है – क्या यूसील परिसर और कॉलोनी में महिलाएं सुरक्षित हैं?
*पहला मामला : महिला अधिकारी को धमकाया गया*
यूसील कॉलोनी में रहने वाली एक महिला अधिकारी ने जादूगोड़ा थाने में रविवार को लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया था कि रात 12:35 बजे से उसे लगातार फोन कर अभद्र भाषा में गालियां दी गईं और सुबह 6:45 बजे उसके क्वार्टर पर आकर हंगामा और जान से मारने की धमकी दी गई। पीड़िता ने कॉल रिकॉर्ड और स्क्रीनशॉट पुलिस को सौंपे हैं। पुलिस ने इस मामले में एक महिला नेत्री से पूछताछ भी की है।
*दूसरा मामला : लेखा एवं विभाग के वरिष्ठ अधिकारी पर पत्नी ने लगाए आरोप*
अब दूसरा मामला लेखा विभाग से जुड़ा है। लेखा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी पर उनकी पत्नी ने ही दूसरी महिला से संबंध और मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं। पत्नी का कहना है कि वह मानसिक रूप से काफी परेशान हैं और इसकी शिकायत यूसील के उच्च अधिकारियों तक पहुंचा चुकी हैं।
यह भी दावा किया गया है कि यह अधिकारी शुरू से ही विवादों में रहे हैं और उनका तबादला भी इसी कारण हुआ था, लेकिन एक अन्य वरीय अधिकारी के संरक्षण के कारण वे फिर से लेखा विभाग में प्रभावशाली बने हुए हैं।
*सिफारिश और संरक्षण का खेल?*
इन दोनों घटनाओं के बाद यूसील कर्मचारियों और कॉलोनीवासियों में आक्रोश है। लोगों का कहना है कि यूसील जैसी बड़ी PSU में POSH एक्ट (कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न रोकथाम अधिनियम) के तहत इंटरनल कंप्लेंट कमेटी बनी हुई है, लेकिन क्या वह सक्रिय है?
स्थानीय लोगों और महिला कर्मियों में चर्चा है कि क्या कार्रवाई सिर्फ छोटे कर्मचारियों पर ही होती है और वरिष्ठ अधिकारी सिफारिश और संरक्षण के खेल में बच जाते हैं?
*जांच की मांग तेज*
अब दोनों ही मामलों में पीड़िताओं ने उच्च प्रबंधन और पुलिस प्रशासन से निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते जांच नहीं हुई तो यूसील में काम करने वाली महिलाओं का मनोबल टूटेगा।
फिलहाल यूसील प्रबंधन की ओर से इन मामलों पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। राष्ट्र संवाद इन आरोपों की पुष्टि नहीं करता, लेकिन यह सवाल जरूर खड़ा होता है कि आखिर जांच में देरी क्यों।
*क्या कहता है कानून?* POSH एक्ट के तहत किसी भी कार्यस्थल पर महिला की शिकायत पर 90 दिनों के अंदर जांच पूरी करना अनिवार्य है। ऐसे में देखना होगा कि यूसील प्रबंधन इन शिकायतों पर कितनी गंभीरता दिखाता है। कोई इससे पहले भी यूसिल की एक महिला अधिकारी ने यूसिल के पूर्व सीएमडी पर भी यो यौन्न उत्पीड़न का गंभीर मामला लगाकर थाना में मामला दर्ज कराया गया लगातार महिलाओं के द्वारा अधिकारियों पर आरोप लगाया जा रहा है।

