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    गंगा का रौद्र रूप: बिहार में बाढ़, बर्बादी और बेबसी का सैलाब, नाव के सहारे जिंदगी; आठ जिले त्राहि-त्राहि

    News DeskBy News DeskSeptember 4, 2026Updated:September 4, 2026No Comments4 Mins Read
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    गंगा का रौद्र रूप: बिहार में बाढ़, बर्बादी और बेबसी का सैलाब, नाव के सहारे जिंदगी; आठ जिले त्राहि-त्राहि

    खतरे के निशान से ऊपर गंगा, भीषण कटाव से गांवों पर संकट | फसल नष्ट, किसान-दुकानदार और आमजन परेशान | लाखों लोगों पर बेघर होने का खतरा

    राष्ट्र संवाद संवाददाता

    बिहार में इस समय बाढ़, बर्बादी और बेबसी का ऐसा मंजर दिखाई दे रहा है, जिसे देखकर हर किसी की चिंता बढ़ गई है। गंगा उफान में है, जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और कई स्थानों पर नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। गंगा और उसकी सहायक नदियों के बढ़ते जलस्तर ने पटना से लेकर भागलपुर तक कई इलाकों में जल सैलाब की स्थिति पैदा कर दी है।

    कहीं गांव पानी में डूबे हैं तो कहीं भीषण कटाव ने लोगों की जमीन और आशियाने को खतरे में डाल दिया है। हालात ऐसे हैं कि कई इलाकों में सड़क और संपर्क मार्ग जलमग्न होने के बाद नाव के सहारे जिंदगी आगे बढ़ रही है। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना बड़ी चुनौती बन गया है।

    त्रिवेणी का तांडव, डूबे खेत और उजड़ती उम्मीदें

    गंगा के उफान और सहायक नदियों के बढ़ते दबाव ने त्रिवेणी का तांडव जैसा दृश्य पैदा कर दिया है। पटना, वैशाली, बेगूसराय, भागलपुर, मोकामा, दानापुर, लखीसराय और हाथीदह समेत कई इलाकों में बाढ़ का असर साफ दिखाई दे रहा है।

    बाढ़ के पानी ने खेतों को अपनी आगोश में ले लिया है। फसल नष्ट होने से किसान परेशान हैं। महीनों की मेहनत पानी में डूबती देखकर किसानों की आंखों के सामने भविष्य का संकट खड़ा हो गया है। दूसरी ओर दुकानदारों और छोटे कारोबारियों के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है। दुकानदार और आमजन भी बेहद परेशान हैं।

    गांव में जल सैलाब, जिंदगी बेबस

    कई गांवों में चारों तरफ पानी ही पानी दिखाई दे रहा है। घरों के आसपास जलजमाव और तेज बहाव ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। निचले इलाकों में रहने वाले परिवारों को सुरक्षित स्थानों की ओर जाने की मजबूरी है।

    लाखों लोग बेघर होने के संकट से जूझ रहे हैं और जिंदगी बेबस नजर आ रही है। सबसे बड़ी चिंता उन परिवारों की है, जिनके घर और खेत दोनों बाढ़ और कटाव की चपेट में हैं।

    आठ जिले बाढ़ से त्राहि-त्राहि

    बिहार के आठ जिले बाढ़ से त्राहि-त्राहि कर रहे हैं। लगातार बढ़ते जलस्तर ने प्रशासन और ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। कई इलाकों में बाढ़ का पानी लगातार फैल रहा है, जबकि नदी किनारे रहने वाले लोगों पर कटाव का खतरा मंडरा रहा है।

    गंगा के साथ उसकी सहायक नदियों का जलस्तर बढ़ने से स्थिति और जटिल हो रही है। आने वाले समय में जलस्तर में और वृद्धि हुई तो प्रभावित इलाकों में संकट और गहरा सकता है।

    बिहार सरकार अलर्ट मोड में

    बिगड़ते हालात को देखते हुए बिहार सरकार अलर्ट मोड में है। प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित इलाकों पर नजर रखी जा रही है और राहत-बचाव व्यवस्था को सक्रिय रखा गया है। लोगों से नदी के तेज बहाव और कटाव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की जा रही है।

    प्रशासन की ओर से लोगों को विशेष रूप से गंगा की लहरों से दूर रहने और अनावश्यक रूप से नाव या नदी के किनारे जाने से बचने की सलाह दी जा रही है।

    अब सबसे बड़ा सवाल

    गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। गांवों में जल सैलाब है, खेतों में फसलें डूब रही हैं, कटाव से जमीन खिसक रही है और लोगों के सामने सुरक्षित रहने की चुनौती है। ऐसे में सरकार और प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती है—हर प्रभावित परिवार तक समय पर राहत पहुंचाना और बाढ़ के इस भीषण संकट में जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करना।

    बिहार में गंगा और सहायक नदियों का यह उफान सिर्फ पानी का बढ़ना नहीं, बल्कि हजारों परिवारों के सामने खड़ी एक बड़ी मानवीय त्रासदी है।

    राष्ट्र संवाद — खबर वही, जो सच के करीब हो।

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