तदाशा मिश्रा की डीजीपी नियुक्ति पर सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में रखा पक्ष, कहा- नियमों के तहत हुआ चयन
राष्ट्र संवाद संवाददाता
रांची। झारखंड की डीजीपी तदाशा मिश्रा की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मामले में राज्य सरकार ने अनुपालन हलफनामा दाखिल कर पूरी नियुक्ति प्रक्रिया का सिलसिलेवार ब्यौरा दिया है। सरकार ने स्पष्ट किया कि तदाशा मिश्रा की नियुक्ति मनमाने ढंग से नहीं, बल्कि लागू नियमों, वरिष्ठता और योग्यता के आधार पर की गई।
सरकार के अनुसार, 2024 में तत्कालीन डीजीपी अजय कुमार सिंह के पद पर बने रहने को लेकर स्थिति उत्पन्न होने के बाद अनुराग गुप्ता को डीजीपी का अतिरिक्त प्रभार दिया गया। विधानसभा चुनाव के दौरान चुनाव आयोग के निर्देश पर अजय कुमार सिंह को फिर जिम्मेदारी दी गई और चुनाव के बाद 28 नवंबर 2024 को अनुराग गुप्ता को दोबारा प्रभार मिला।
UPSC से पैनल नहीं मिला तो बने नए नियम
सरकार ने बताया कि सितंबर से दिसंबर 2024 के बीच यूपीएससी से लगातार पत्राचार के बावजूद नियमित डीजीपी के लिए पैनल नहीं मिल सका। इसके बाद जनवरी 2025 में नए डीजीपी चयन एवं नियुक्ति नियम लागू किए गए। छह सदस्यीय चयन समिति ने 21 जनवरी 2025 को तीन डीजी रैंक के अधिकारियों का पैनल तैयार किया, जिसके आधार पर अनुराग गुप्ता को नियमित डीजीपी नियुक्त किया गया।
अनुराग गुप्ता के 6 नवंबर 2025 को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने के बाद तदाशा मिश्रा को कार्यवाहक डीजीपी बनाया गया और 12 नवंबर को उन्हें डीजी रैंक में प्रोन्नत किया गया।
सीमित अधिकारियों की उपलब्धता का दिया हवाला
सरकार ने बताया कि उस समय झारखंड कैडर में केवल चार डीजी रैंक के अधिकारी उपलब्ध थे, जबकि आठ एडीजी रैंक के अधिकारी थे, जिनमें पांच केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर थे। इसके बाद नियमों में संशोधन कर 30 वर्ष के पुलिस सेवा अनुभव तथा एडीजी/डीजी स्तर का अनुभव रखने वाले अधिकारियों को भी चयन के दायरे में लाया गया।
30 दिसंबर 2025 को चयन समिति की बैठक में विचार के बाद तदाशा मिश्रा को नियमित डीजीपी (HoPF) नियुक्त किया गया। सरकार ने कहा कि नियुक्ति के समय वह राज्य के चार वरिष्ठतम डीजी रैंक अधिकारियों में शामिल थीं।
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को यह भी बताया कि तदाशा मिश्रा झारखंड की पहली महिला डीजीपी हैं और उन्हें 30 वर्ष से अधिक का पुलिस सेवा अनुभव है। हलफनामे में नक्सलवाद, संगठित अपराध और महिला सुरक्षा के क्षेत्र में उनके कार्यों का भी उल्लेख करते हुए सरकार ने नियुक्ति को नियमसम्मत और प्रशासनिक जरूरत के अनुरूप बताया है।

