लेखक: महेन्द्र तिवारी
दिल्ली और उत्तर प्रदेश में हाल के दिनों में एक बेहद संक्रामक विषाणु जनित रोग का प्रकोप तेजी से बढ़ा है जिसे आम भाषा में सूकर ज्वर कहा जाता है। इस जानलेवा ज्वर ने आम जनमानस के साथ ही स्वास्थ्य प्रशासन की चिंताएं बहुत गहरी कर दी हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो अकेले दिल्ली राज्य में अब तक 2300 से अधिक संक्रमित रोगी सामने आ चुके हैं और यह संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इस तेजी से फैलते संक्रमण की गंभीरता को देखते हुए दोनों राज्यों के स्वास्थ्य विभागों ने कई आपातकालीन बैठकें आयोजित की हैं और सभी चिकित्सालयों को उच्च सतर्कता अवस्था में रखा है। यह रोग मानव शरीर के श्वसन तंत्र को सबसे अधिक प्रभावित करता है और एक संक्रमित व्यक्ति से दूसरे स्वस्थ व्यक्ति में हवा, सांस और सीधे संपर्क के माध्यम से बहुत ही तेजी से फैलता है।
दिल्ली में संक्रमण के लक्षण और गंभीरता
इस संक्रामक रोग के शुरुआती लक्षण साधारण मौसमी ज्वर से बहुत अधिक मिलते जुलते हैं जिसके कारण अक्सर लोग शुरुआत में इसे अनदेखा कर देते हैं और यह भूल भारी पड़ जाती है। इसके मुख्य लक्षणों में अचानक से बहुत तेज बुखार आना, गले में भयंकर दर्द और खराश रहना, लगातार सूखी खांसी आना और पूरे शरीर में तेज पीड़ा होना शामिल है। संक्रमित रोगियों को अत्यधिक थकान महसूस होती है और उनकी नाक लगातार बहती या बंद रहती है। कई बार छोटे बच्चों के मामलों में उल्टी और दस्त की शिकायत भी मुख्य रूप से देखी जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यदि किसी रोगी को सांस लेने में भारी कठिनाई हो रही हो, छाती में लगातार दर्द या भारीपन महसूस हो या उसके होंठ और नाखून नीले पड़ने लगें, तो यह स्थिति बेहद गंभीर मानी जाती है। ऐसे रोगियों को बिना कोई समय गंवाए तुरंत किसी योग्य चिकित्सक के पास ले जाना अत्यंत आवश्यक हो जाता है।
प्रशासन की तैयारियाँ और इलाज
प्रशासन इस संकटपूर्ण स्थिति से निपटने के लिए युद्ध स्तर पर सघन प्रयास कर रहा है। सभी बड़े सरकारी और निजी चिकित्सालयों में संक्रमित रोगियों के उपचार के लिए विशेष पृथक्करण कक्ष तैयार किए गए हैं ताकि यह संक्रमण वहां आने वाले अन्य स्वस्थ लोगों तक बिल्कुल ना पहुंचे। इस विषाणु को नियंत्रित करने वाली विशेष रोगनाशक औषधियों का पर्याप्त भंडार हर जगह सुनिश्चित किया जा रहा है ताकि समय पर उपचार शुरू किया जा सके। इसके साथ ही रक्त जांच प्रयोगशालाओं की क्षमता भी दोगुनी कर दी गई है जिससे रोगियों की पहचान जल्द से जल्द हो सके।
दिल्ली वासियों के लिए बचाव के उपाय
इस गंभीर संक्रमण से बचाव ही इसका सबसे प्रभावी और सच्चा उपचार है। जब भी घर से बाहर सार्वजनिक जगहों पर निकलें अपने मुंह और नाक को किसी मोटे साफ कपड़े या सुरक्षित मुखावरण से अच्छी तरह ढक कर रखें। अपने हाथों को दिन में कई बार साबुन और स्वच्छ पानी से बीस सेकंड तक धोएं या किसी अच्छे कीटाणुनाशक तरल का उपयोग करें। वातानुकूलित और पूरी तरह से बंद स्थानों पर ज्यादा लोगों के साथ समूह में बैठने से पूरी तरह बचें। शरीर की प्राकृतिक रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए खट्टे फलों का सेवन अधिक करें, ताजा भोजन खाएं और दिन भर गरम पानी पिएं। बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों और पहले से किसी गंभीर श्वसन बीमारी से पीड़ित लोगों को इस समय विशेष रूप से अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। हर साल इस विषाणु से बचाव का टीका लगवाना भी एक बेहद समझदारी भरा कदम है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी इन्फ्लुएंजा की रोकथाम के लिए विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए हैं। अधिक जानकारी के लिए WHO इन्फ्लुएंजा दिशानिर्देश देखें। केंद्र सरकार ने राज्यों को अतिरिक्त टीके और एंटीवायरल दवाएं मुहैया कराने का निर्देश दिया है। निगरानी तंत्र को मजबूत करने के लिए जिला स्तर पर रैपिड रिस्पांस टीमें गठित की गई हैं। नागरिकों से अपील है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल प्रमाणित स्रोतों से जानकारी प्राप्त करें। स्कूलों और कार्यालयों में भी जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। यदि किसी में लक्षण दिखें तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर संपर्क करें।

