*खरसावां की शिक्षा, छऊ कला और सांस्कृतिक परंपरा के लिए अपूरणीय क्षति : सुखराम*
मृत्युंजय बर्मन
राष्ट्र संवाद संवाददाता सरायकेला
राजकीय +2 उच्च विद्यालय खरसावां के पूर्व प्राचार्य एवं सेवानिवृत्त शिक्षक, प्रख्यात छऊ गुरु तथा महावीर संघ ओड़िया नाटक के निर्देशक रहे कामाख्या प्रसाद षाड़ंगी के निधन से खरसावां में शोक की लहर है। 86 वर्षीय षाड़ंगी का मेडिट्रीना अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया। वे पिछले कई दिनों से बीमार चल रहे थे और इलाजरत थे।
कुम्हारसाही निवासी षाड़ंगी ने शिक्षा के साथ कला, साहित्य, नाट्य एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। शिक्षक और प्राचार्य के रूप में उन्होंने विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास में भूमिका निभाई, वहीं छऊ गुरु के रूप में अनेक कलाकारों को पारंपरिक खरसावां शैली की बारीकियों का प्रशिक्षण देकर उनकी प्रतिभा को निखारा।
वे खरसावां छऊ नृत्य कला केन्द्र के पूर्व निदेशक, जिला उत्कल सम्मेलन के सलाहकार तथा मां बसंती पूजा कमेटी के सचिव भी रहे। महावीर संघ ओड़िया नाटक के निर्देशक के रूप में उन्होंने ओड़िया नाट्य परंपरा को भी समृद्ध किया।
निधन की खबर मिलते ही कलाकारों, शिक्षकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं सांस्कृतिक संगठनों से जुड़े लोगों का उनके कुम्हारसाही स्थित आवास पर पहुंचना शुरू हो गया। चक्रधरपुर विधायक सह वरिष्ठ छऊ कलाकार सुखराम उरांव, छऊ गुरु तपन पटनायक, छऊ गुरु मोहम्मद दिलदार, सुमंत मोहंती समेत कई लोगों ने अंतिम दर्शन कर श्रद्धांजलि दी।
सुखराम उरांव ने कहा कि षाड़ंगी का निधन खरसावां की शिक्षा, छऊ कला और सांस्कृतिक परंपरा के लिए अपूरणीय क्षति है। उनका मार्गदर्शन और नई पीढ़ी को पारंपरिक कला से जोड़ने का प्रयास लंबे समय तक याद किया जाएगा।
षाड़ंगी अपने पीछे पत्नी, दो पुत्र और दो पुत्रियों का परिवार छोड़ गए हैं। उनके निधन पर विभिन्न सामाजिक, शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक संगठनों ने शोक व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति की प्रार्थना की।

