लेखक: इंद्र यादव
राष्ट्र संवाद इंद्र यादव/मुंबई/ठाणे। सड़क हादसों पर अंकुश लगाने और आम लोगों में यातायात नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से ठाणे में ‘ट्रैफिक स्कूल ऑन व्हील्स’ की शुरुआत की गई। 31 अगस्त 2026 को ठाणे पुलिस आयुक्तालय की ओर से आयोजित कार्यक्रम में राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने इस मोबाइल ट्रैफिक स्कूल का उद्घाटन किया।
कार्यक्रम में ठाणे की महापौर श्रीमती शर्मिला पिंपलोळकर, कल्याण-डोंबिवली की महापौर श्रीमती हर्षाली चौधरी, विधायक संजय केळकर, विधायक रविंद्र फाटक, ठाणे पुलिस आयुक्त आशुतोष डुंबरे, सहआयुक्त डॉ. ज्ञानेश्वर चव्हाण और यातायात डीसीपी पंकज नवनाथ शिरसाट समेत पुलिस एवं प्रशासन के अधिकारी तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
नियमों का उल्लंघन जिंदगी पर पड़ सकता है भारी : सरनाईक
इस अवसर पर परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा कि सड़क पर यातायात नियमों का उल्लंघन केवल चालान या जुर्माने का मामला नहीं है, बल्कि इससे किसी परिवार की खुशियां हमेशा के लिए खत्म हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा सभी की साझा जिम्मेदारी है। लोगों को नियमों का पालन पुलिस के डर या चालान से बचने के लिए नहीं, बल्कि अपनी और दूसरों की जिंदगी सुरक्षित रखने के लिए करना चाहिए।
क्या है ‘ट्रैफिक स्कूल ऑन व्हील्स’
‘ट्रैफिक स्कूल ऑन व्हील्स’ एक हाईटेक मोबाइल बस है, जिसके माध्यम से शहरों और विभिन्न इलाकों में जाकर लोगों को यातायात नियमों और सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जाएगा। इसके जरिए स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों को सुरक्षित ड्राइविंग और सड़क सुरक्षा के प्रति प्रशिक्षित किया जाएगा।
वहीं ऑटो, टैक्सी और बस चालकों को लेन अनुशासन, गति सीमा और सुरक्षित वाहन संचालन के बारे में जानकारी दी जाएगी। लोगों को हेलमेट, सीट बेल्ट और ट्रैफिक सिग्नल के पालन की आवश्यकता भी समझाई जाएगी।
मोबाइल बस में आधुनिक स्क्रीन और अन्य माध्यमों से ड्रंक ड्राइविंग के खतरों और सड़क दुर्घटनाओं के गंभीर परिणामों को भी प्रदर्शित किया जाएगा, ताकि लोगों में यातायात नियमों को लेकर जिम्मेदारी की भावना विकसित हो।
पूरे महाराष्ट्र तक पहुंचेगा सड़क सुरक्षा का संदेश
ठाणे से शुरू हुई यह पहल आगे चलकर महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाई जाएगी। इसका उद्देश्य सड़क सुरक्षा को लेकर व्यापक जनजागरूकता पैदा करना और लोगों को यातायात नियमों के पालन के लिए प्रेरित करना है। अधिकारियों के अनुसार, ‘ट्रैफिक स्कूल ऑन व्हील्स’ को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता का प्रभावी माध्यम बनाने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है।
सड़क सुरक्षा के लिए मोबाइल जागरूकता की आवश्यकता
भारत में हर साल सड़क हादसों में लाखों लोग अपनी जान गंवाते हैं। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2022 में देश भर में 4.6 लाख से अधिक सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 1.68 लाख से अधिक लोगों की मृत्यु हुई। महाराष्ट्र इस सूची में अग्रणी राज्यों में से एक है। ऐसे में ठाणे पुलिस की यह पहल न केवल सराहनीय है बल्कि अनुकरणीय भी है। ट्रैफिक स्कूल ऑन व्हील्स जैसी मोबाइल इकाइयां ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सीधे नागरिकों तक पहुंचकर व्यवहारिक प्रशिक्षण दे सकती हैं, जो पारंपरिक जागरूकता अभियानों से अधिक प्रभावी साबित होती हैं।
इस मोबाइल बस में अत्याधुनिक सिम्युलेटर, इंटरैक्टिव डिस्प्ले और ऑडियो-विजुअल माध्यमों का उपयोग करके यातायात नियमों को सरल भाषा में समझाया जाएगा। विशेष रूप से नए ड्राइविंग लाइसेंस धारकों, स्कूली बच्चों और व्यावसायिक वाहन चालकों के लिए यह प्रशिक्षण जीवनरक्षक साबित हो सकता है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय भी राज्यों को ऐसी पहल के लिए प्रोत्साहित करता रहा है।
भविष्य की योजना और विस्तार
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने घोषणा की है कि इस पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद महाराष्ट्र के सभी प्रमुख शहरों जैसे मुंबई, पुणे, नागपुर, नासिक और औरंगाबाद में भी ऐसी मोबाइल ट्रैफिक स्कूल शुरू की जाएंगी। इसके लिए कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड और राज्य सरकार के बजट का संयुक्त उपयोग किया जाएगा। लक्ष्य है कि अगले दो वर्षों में 50 से अधिक ऐसी मोबाइल इकाइयां सड़कों पर उतारी जाएं, जिससे प्रतिवर्ष लाखों नागरिकों को प्रत्यक्ष प्रशिक्षण दिया जा सके।
यह पहल सड़क सुरक्षा सप्ताह और राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह जैसे अभियानों को पूरे वर्ष चालू रखने का एक व्यावहारिक मॉडल प्रस्तुत करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रवर्तन (Enforcement) के साथ-साथ शिक्षा (Education) और इंजीनियरिंग (Engineering) के इस त्रिकोणीय दृष्टिकोण से ही सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सकती है। ठाणे से निकली यह छोटी सी पहल आने वाले समय में पूरे देश के लिए एक मॉडल बन सकती है।

