कर्मचारियों ने लगाए कमीशनखोरी के आरोप, तीन साल में 28 लाख की गाड़ी खरीदने पर चर्चाओं का बाजार गर्म
राष्ट्र संवाद संवाददाता
*जादूगोड़ा |* यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (UCIL) के सिविल विभाग में हो रहे करोड़ों रुपये के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। कर्मचारियों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि विभाग में कमीशनखोरी चरम पर है और अधिकांश कार्य घटिया क्वालिटी के हो रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, विभाग में हजारों टन गिट्टी और बालू की खरीद की गई थी, जिसका आज तक उपयोग नहीं हुआ। आरोप है कि खुले में पड़ी बालू अब मिट्टी में तब्दील हो रही है।
*एक बरसात में ही उखड़ा टारफेल्टिंग, तीन महीने में खराब हुआ पेंट*
कर्मचारियों का कहना है कि मिल विभाग के अंतर्गत लाखों रुपये का पेंटिंग कार्य कराया गया था जो तीन महीने में ही खराब हो गया। इसी तरह सभी विभागों की छतों पर लाखों की लागत से कराया गया टारफेल्टिंग का कार्य एक ही बरसात में बर्बाद हो गया।
*करोड़ों के गेटों में सीपेज*
आरोप है कि मौजूदा सिविल प्रभारी सुलभ कुमार बेस के कार्यकाल में UCIL का मुख्य द्वार, आवासीय कॉलोनी का द्वार और अस्पताल चौक का द्वार करोड़ों की लागत से बनवाया गया, लेकिन बरसात में जगह-जगह सीपेज और गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
*अच्छे टाइल्स उखाड़ कर घटिया टाइल्स लगाने का आरोप*
लेखा और क्रय विभाग के भवन में पहले से अच्छी क्वालिटी के टाइल्स लगे होने के बावजूद उसे उखाड़ कर नया टाइल्स लगाया गया। आरोप है कि इसमें ठेकेदार से मिलीभगत कर लाखों का खर्च दिखाया गया। इसी तरह बी-टाइप क्वार्टरों की पेंटिंग भी घटिया बताई जा रही है।
अब अस्पताल के फर्श का करीब 90 लाख रुपये का कार्य कराया जा रहा है, जिस पर भी कर्मचारी गुणवत्ता को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
*30 लाख की गाड़ी पर चर्चा*
कर्मचारियों में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर है कि सिविल प्रभारी के तौर पर करीब 3 साल के कार्यकाल में ही लगभग 28-30 लाख रुपये की नई गाड़ी खरीदी गई है। कर्मचारी सवाल उठा रहे हैं कि वेतन के अनुपात में यह कैसे संभव है। कार्यालय में दिनभर चहेते ठेकेदारों के जमावड़े की भी बात सामने आ रही है।
इस मामले में जब सिविल विभाग के अधिकारियों से पक्ष जानने की कोशिश की गई तो कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। कर्मचारियों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच और सभी कार्यों के एस्टीमेट, बिल और क्वालिटी टेस्ट की ऑडिट कराने की मांग की है।

