लेखक: देवानंद सिंह
निर्वाचन साक्षरता क्लब के माध्यम से निर्वाचन आयोग ने युवा मतदाताओं तक पहुंच बनाने की महत्वाकांक्षी योजना शुरू की है, जिसका उद्देश्य 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले लोकतंत्र की अगली पीढ़ी को तैयार करना है।
निर्वाचन साक्षरता क्लब का विस्तार और उद्देश्य
निर्वाचन आयोग का जेनरेशन जी और जेन अल्फा तक पहुंच बनाने का फैसला महज मतदाता जागरूकता अभियान नहीं, बल्कि लोकतंत्र की अगली पीढ़ी तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। 2029 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए आयोग ने जिस बड़े पैमाने पर स्कूली विद्यार्थियों, कॉलेज छात्रों और विश्वविद्यालयों तक पहुंच बनाने की योजना तैयार की है, उसकी जरूरत आज पहले से कहीं अधिक महसूस होती है।
आज का युवा जिस तेजी से डिजिटल दुनिया से जुड़ रहा है, उसी तेजी से उसके सामने सूचनाओं और भ्रामक सूचनाओं की चुनौती भी बढ़ रही है। सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली हर जानकारी सही नहीं होती। ऐसे में लोकतंत्र के बारे में केवल मतदान की तारीख या प्रक्रिया जानना पर्याप्त नहीं है। युवा मतदाता को यह समझना होगा कि वह अपने मत का इस्तेमाल किस जिम्मेदारी के साथ करे, चुनावी सूचना की विश्वसनीयता कैसे परखे और लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका क्या है।
आयोग की योजना प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में 10 निर्वाचन साक्षरता क्लब के हिसाब से करीब 50 हजार ईएलसी स्थापित करने की है। इसके तहत कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को जोड़ा जाएगा। यह प्रयास इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 18 से 26 वर्ष आयु वर्ग में 14.78 करोड़ लोग हैं। इतनी बड़ी युवा आबादी देश की चुनावी दिशा और लोकतांत्रिक विमर्श को प्रभावित करने की क्षमता रखती है।
लेकिन सवाल यह है कि क्या केवल क्लब बना देने से उद्देश्य पूरा हो जाएगा? निश्चित रूप से नहीं। निर्वाचन साक्षरता क्लबों को सक्रिय, संवादपरक और डिजिटल रूप से प्रभावी बनाना होगा। उन्हें केवल औपचारिक गतिविधियों तक सीमित रखने के बजाय युवाओं को चुनावी प्रक्रिया, संविधान, मतदान अधिकार, फर्जी खबरों की पहचान और जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार से जोड़ना होगा।
2018 में शुरू किए गए ईएलसी का अब ईएलसी 2.0 के रूप में पुनर्गठन बदलते समय की जरूरत को स्वीकार करता है। यह सकारात्मक कदम है, लेकिन इसकी सफलता क्रियान्वयन की गुणवत्ता पर निर्भर करेगी। युवाओं को राजनीतिक विचारधारा से प्रभावित करने के बजाय उन्हें निष्पक्ष, तथ्यपरक और संवैधानिक दृष्टिकोण से शिक्षित करना आयोग की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होगी।
लोकतंत्र केवल मतपेटी तक सीमित व्यवस्था नहीं है। यह जागरूक नागरिकों की निरंतर भागीदारी से मजबूत होता है। इसलिए निर्वाचन आयोग की इस पहल का वास्तविक लक्ष्य 2029 का चुनाव नहीं, बल्कि ऐसी नई पीढ़ी तैयार करना होना चाहिए जो अपने मताधिकार को समझे, सवाल पूछे, तथ्यों की जांच करे और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति जिम्मेदार रहे। यदि ईएलसी 2.0 इस दिशा में सफल होता है, तो यह भारतीय लोकतंत्र के भविष्य में एक महत्वपूर्ण निवेश साबित होगा।
इस पहल की सफलता युवाओं की सक्रिय भागीदारी और आयोग के प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी। अधिक जानकारी के लिए निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट देखें।

