मृत्युंजय बर्मन
राष्ट्र संवाद संवाददाता, सरायकेला
दुनिया के सांस्कृतिक मानचित्र पर सरायकेला की विशिष्ट पहचान बनाने वाली छऊ कला के संरक्षण और उसके संस्थागत आधार को मजबूत करने के लिए कलाकारों ने एकजुट होकर आवाज उठाई है। राजकीय छऊ नृत्य कला केंद्र के पुनरुत्थान, कला संरक्षण और कलाकारों के लंबित हितों को लेकर गुंडिचा मंदिर परिसर में सरायकेला छऊ आर्टिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष भोला महंती की अध्यक्षता में बैठक हुई।
बैठक में कला केंद्र की वर्तमान स्थिति तथा कला-कलाकारों से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई। कलाकारों ने कहा कि उपायुक्त द्वारा विभागीय निर्देश के आलोक में चार प्रमुख बिंदुओं पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। इन सभी पर आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर ठोस प्रस्ताव तैयार करने और संबंधित विभाग व राज्य सरकार को शीघ्र भेजने पर सहमति बनी। कलाकारों के हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन अनुमंडल पदाधिकारी, सरायकेला को सौंपकर समयबद्ध कार्रवाई का आग्रह करने का निर्णय लिया गया।
*गौरवशाली विरासत, संस्थागत चुनौती*
कलाकारों ने कहा कि राजाश्रय से विकसित इस परंपरा को संस्थागत आधार देने के लिए 1960 में राजकीय छऊ नृत्य कला केंद्र की स्थापना हुई थी। इसी विरासत ने सरायकेला को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। ऐसे में केंद्र में स्थायी नेतृत्व, विभिन्न पदों की रिक्तता तथा नियमित प्रशिक्षण और कलाकारों के प्रोत्साहन से जुड़े सवालों का समाधान जरूरी है।
भोला महंती ने कहा कि जिला प्रशासन और राज्य सरकार ने छऊ कला व कलाकारों के उत्थान के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। कलाकारों को विश्वास है कि लंबित विषयों का भी शीघ्र समाधान होगा और वे प्रशासन के प्रयासों में सकारात्मक सहयोग करेंगे।
संरक्षक मनोज कुमार चौधरी ने कहा कि ऐतिहासिक चैत्र पर्व को भव्य स्वरूप देकर जिला प्रशासन ने छऊ की प्रतिष्ठा बढ़ाई है। कलाकारों ने कहा कि उद्देश्य आलोचना नहीं, बल्कि इन प्रयासों को मजबूत आधार देना है, ताकि छऊ की गौरवशाली परंपरा अगली पीढ़ी तक सुरक्षित पहुंचे।बैठक में गुरु श्री तपन कुमार पटनायक सहित बड़ी संख्या में कलाकार उपस्थित थे।

