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    Home » चांडिल में भूस्खलन: पहाड़ का ढलान धंसा, सड़क पर आया मलबा
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    चांडिल में भूस्खलन: पहाड़ का ढलान धंसा, सड़क पर आया मलबा

    Devanand SinghBy Devanand SinghAugust 18, 2026No Comments3 Mins Read
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    चांडिल
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    लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता

    झारखंड के चांडिल क्षेत्र में मंगलवार को हुई मूसलाधार बारिश ने निर्माणाधीन बुनियादी ढांचे की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरायकेला-खरसावां जिले के इस महत्वपूर्ण इलाके में पहाड़ी ढलान का अचानक दरकना प्राकृतिक आपदा के साथ-साथ मानवीय चूक की ओर भी इशारा करता है।

    चांडिल में भूस्खलन की घटना

    चांडिल गोलचक्कर के समीप निर्माणाधीन रेलवे ओवरब्रिज के पास मंगलवार को मूसलाधार बारिश के दौरान पहाड़ का एक हिस्सा अचानक दरक गया। पहाड़ काटकर बनाई गई नई सड़क पर मिट्टी और पत्थरों का बड़ा हिस्सा आ गिरा। मलबा सड़क पर फैलने से आवागमन प्रभावित है।

    काण्ड्रा की ओर जाने वाले इस मार्ग पर मलबा गिरने की घटना ने निर्माणाधीन सड़क की सुरक्षा व्यवस्था के साथ पहाड़ी ढलान की स्थिरता को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है। स्थानीय लोगों के मुताबिक सड़क निर्माण के दौरान पहाड़ काटे जाने के बाद ढलान के संवेदनशील हिस्सों को सुरक्षित करने के पर्याप्त उपाय नहीं किए गए। बारिश के दौरान ऐसे हिस्सों से मिट्टी और चट्टानों के खिसकने का खतरा लगातार बना हुआ है।

    बारिश के साथ बढ़ सकता है भूस्खलन का खतरा

    पर्यावरण विशेषज्ञ एवं शोधकर्ता डॉ. ईशा बर्मन, पीएच.डी., आईआईटी (ISM) धनबाद के अनुसार, भारी बारिश में पहाड़ी ढलान का धंसना केवल वर्षा का स्वाभाविक परिणाम नहीं माना जा सकता। पहाड़ की कटाई से ढलान की प्राकृतिक संरचना, वनस्पति आवरण और वर्षाजल के प्रवाह में बदलाव होने पर उसकी स्थिरता प्रभावित हो सकती है।

    उन्होंने बताया कि लगातार बारिश का पानी मिट्टी और चट्टानों की दरारों में पहुंचकर ढलान के भीतर जल-दाब बढ़ाता है। इससे मिट्टी की पकड़ कमजोर हो सकती है और भूस्खलन का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे क्षेत्रों में सड़क निर्माण के साथ Slope Stability Assessment, प्रभावी Drainage System, Erosion Control और Native Vegetation-based Slope Stabilisation को प्राथमिकता देना जरूरी है।

    डॉ. बर्मन ने कहा कि सड़क से मलबा हटा देना स्थायी समाधान नहीं है। ढलान की स्थिरता और वर्षाजल के प्राकृतिक निकास का तकनीकी एवं पर्यावरणीय मूल्यांकन किया जाना चाहिए।

    ग्रामीणों ने संबंधित विभाग और निर्माण एजेंसी से पहाड़ी ढलान का तत्काल निरीक्षण कराने, मलबा हटाने तथा संवेदनशील हिस्सों में रिटेनिंग वॉल, सुरक्षा जाल और प्रभावी जलनिकासी की व्यवस्था करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि समय रहते सुरक्षा उपाय नहीं किए गए तो भारी बारिश में दोबारा ऐसी घटना गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है।

    इस घटना ने चांडिल प्रशासन और निर्माण एजेंसियों के लिए एक चेतावनी की तरह काम किया है। पहाड़ी क्षेत्रों में विकास कार्यों के दौरान भू-तकनीकी जांच और पर्यावरण प्रभाव आकलन को अनिवार्य बनाने की मांग अब जोर पकड़ने लगी है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ढलान स्थिरीकरण की आधुनिक तकनीकों जैसे सॉइल नेलिंग, रॉक बोल्टिंग और जियो-टेक्सटाइल का उपयोग किया जाना चाहिए। अधिक जानकारी के लिए आईआईटी (ISM) धनबाद की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।

    चांडिल पहाड़ भूस्खलन
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