मृत्युंजय बर्मन
राष्ट्र संवाद संवाददाता, सरायकेला
विश्व आदिवासी दिवस पर नगर भवन में आयोजित जिला स्तरीय कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सिंहभूम सांसद जोबा मांझी ने आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान और प्रकृति से उसके सदियों पुराने रिश्ते को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज के लिए जल, जंगल और जमीन महज संसाधन नहीं, बल्कि जीवन, संस्कृति और आस्था का आधार हैं। भाषा, परंपरा और प्रकृति के प्रति सम्मान की विरासत पीढ़ियों से संरक्षित है, जिसे अगली पीढ़ी तक पहुंचाना सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा और विकास के अवसरों से युवाओं को जोड़ना जरूरी है, लेकिन इसके साथ अपनी भाषा और सांस्कृतिक पहचान को बचाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। सांसद ने जल, जीवन, जंगल और जमीन के संरक्षण के लिए सामूहिक भागीदारी का आह्वान किया। उन्होंने वीर शहीदों के संघर्ष और बलिदान से प्रेरणा लेने तथा केंद्र व राज्य सरकार की जनजातीय कल्याणकारी योजनाओं का पात्रता के अनुसार लाभ उठाने की अपील की।

