लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
झारखंड के दिशोम गुरु शिबू सोरेन की प्रस्तावित प्रतिमा को लेकर चल रहे विवाद ने कोल्हान और संथाल परगना के बीच तनाव की स्थिति पैदा कर दी है। इस शिबू सोरेन प्रतिमा विवाद पर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने स्पष्ट रुख अपनाते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने और शांतिपूर्ण समाधान निकालने की अपील की है।
शिबू सोरेन प्रतिमा विवाद पर झामुमो का आधिकारिक पक्ष
दिशोम गुरु शिबू सोरेन की प्रस्तावित प्रतिमा को लेकर चल रहे विवाद के बीच झामुमो ने इसे आपसी सौहार्द और झारखंड की एकता के नजरिए से देखने की अपील की है। शनिवार को चाईबासा स्थित दिशोम गुरु शिबू सोरेन चौक पर आयोजित प्रेस वार्ता में झामुमो जिलाध्यक्ष सोनाराम देवगम ने कहा कि संबंधित मौजा के ग्रामसभा सदस्यों और रैयतों की ओर से प्रतिमा स्थापना पर आपत्ति नहीं जताई गई है। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों द्वारा उठाए जा रहे सवालों का समाधान बातचीत और प्रशासनिक स्तर पर होना चाहिए।
विभाजनकारी तत्वों के खिलाफ चेतावनी
देवगम ने कहा कि झारखंड के सभी शहीद, वीर सपूत और ऐतिहासिक व्यक्तित्व राज्य की साझा धरोहर हैं। किसी एक महापुरुष के सम्मान को दूसरे के सम्मान के विरोध में खड़ा करना उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ तत्व कोल्हान और संथाल परगना के बीच विभाजन की भावना पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं। झामुमो ने सभी पक्षों से संयम बरतते हुए विवाद का शांतिपूर्ण समाधान निकालने की अपील की।
पृष्ठभूमि और ऐतिहासिक महत्व
दिशोम गुरु शिबू सोरेन ने झारखंड अलग राज्य आंदोलन का नेतृत्व किया था और वे झारखंड के प्रथम मुख्यमंत्री भी बने। उनकी प्रतिमा स्थापना की मांग लंबे समय से झामुमो कार्यकर्ताओं और समर्थकों द्वारा की जा रही थी। चाईबासा स्थित दिशोम गुरु शिबू सोरेन चौक का नामकरण भी उनके सम्मान में किया गया है। इस चौक पर प्रतिमा लगाने का प्रस्ताव पारित होने के बाद कुछ स्थानीय संगठनों ने आपत्ति दर्ज कराई, जिसके बाद विवाद गहरा गया।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि महापुरुषों की प्रतिमा स्थापना में किसी भी प्रकार का विवाद नहीं होना चाहिए। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि सभी पक्षों को विश्वास में लेकर निर्णय लिया जाए। वहीं, कांग्रेस ने इस मुद्दे को भाजपा की साजिश करार देते हुए कहा कि विपक्ष राज्य में अस्थिरता फैलाना चाहता है। झामुमो के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने बयान जारी कर कहा कि पार्टी शांति और सौहार्द के लिए प्रतिबद्ध है।
जनमानस की राय
चाईबासा के स्थानीय निवासियों में इस मुद्दे को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया है। कुछ लोगों का मानना है कि शिबू सोरेन झारखंड के गौरव हैं और उनकी प्रतिमा लगना सम्मान की बात है। वहीं, कुछ अन्य का कहना है कि चौक पर पहले से स्थापित अन्य महापुरुषों की प्रतिमाओं का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। सामाजिक कार्यकर्ता रमेश कुमार ने कहा कि प्रशासन को जनसुनवाई आयोजित कर आम राय लेनी चाहिए।
आगे की राह
झामुमो जिलाध्यक्ष सोनाराम देवगम ने स्पष्ट किया कि पार्टी किसी भी प्रकार के टकराव के पक्ष में नहीं है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि ग्रामसभा की अनापत्ति के आधार पर प्रतिमा स्थापना का कार्य जल्द शुरू कराया जाए। साथ ही, उन्होंने चेतावनी दी कि यदि विभाजनकारी तत्वों द्वारा माहौल बिगाड़ने की कोशिश की गई तो पार्टी लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराएगी।
इस बीच, स्थानीय प्रशासन ने भी मामले का संज्ञान लेते हुए दोनों पक्षों को बातचीत के लिए आमंत्रित किया है। चाईबासा के उपायुक्त ने कहा कि प्रतिमा स्थापना के लिए भूमि आवंटन की प्रक्रिया नियमानुसार चल रही है और किसी भी प्रकार के विवाद का निपटारा कानून के दायरे में किया जाएगा।
झारखंड के राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे को लेकर सरगर्मी तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने भी इस पर प्रतिक्रिया देते हुए राज्य सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। वहीं, सामाजिक संगठनों ने शांति बनाए रखने के लिए सद्भावना मार्च निकालने की घोषणा की है।
जानकारों का मानना है कि शिबू सोरेन झारखंड आंदोलन के शीर्ष नेता रहे हैं और उनकी प्रतिमा स्थापना को लेकर विवाद दुर्भाग्यपूर्ण है। इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने के बजाय सर्वसम्मति से हल निकालने की आवश्यकता है। झामुमो की अपील इसी दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।
अधिक जानकारी के लिए आप झारखंड सरकार की आधिकारिक वेबसाइट देख सकते हैं।
