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    ग्लोरिया इंजीनियरिंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड में ब्लास्ट: 5 मजदूर डिस्चार्ज, 3 का इलाज जारी, जांच के आदेश

    Devanand SinghBy Devanand SinghAugust 1, 2026No Comments3 Mins Read
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    ग्लोरिया इंजीनियरिंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड
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    लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता

    ग्लोरिया इंजीनियरिंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड में हुए भीषण ब्लास्ट की घटना ने औद्योगिक सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आदित्यपुर स्थित इस फैक्ट्री में गैस रिसाव के कारण हुए विस्फोट में आठ कामगार गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिनमें से पांच को प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है, जबकि तीन श्रमिकों का इलाज अभी भी चल रहा है। प्रशासन ने घटना को गंभीरता से लेते हुए उच्चस्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं।

    ग्लोरिया इंजीनियरिंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड में सुरक्षा जांच के आदेश

    ग्लोरिया इंजीनियरिंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड में हुए ब्लास्ट की दुर्घटना में घायल आठ कामगारों में से पांच को इलाज के बाद अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है, जबकि तीन का इलाज जारी है। दुर्घटना के वास्तविक कारणों की जांच की जा रही है। मुख्य कारखाना निरीक्षक, रांची-सह-सरायकेला-खरसावां प्रभार मनीष कुमार सिन्हा ने ‘राष्ट्र संवाद’ को बताया कि फिलहाल घटनास्थल का निरीक्षण नहीं, बल्कि दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है। जांच प्रतिवेदन से पहले डिस्चार्ज हुए सभी घायलों के बयान लिए जाएंगे।

    उन्होंने बताया कि कंपनी प्रबंधन से सुरक्षा संबंधी कॉम्प्लायंस के आवश्यक कागजात मांगे गए हैं। प्रारंभिक तकनीकी अनुमान के अनुसार कंपनी का ओवन गैस फायर्ड था। आशंका है कि पाइप का वाल्व किसी कारण से बंद नहीं हो पाया और गैस का दबाव बढ़ने से ब्लास्ट हुआ होगा। हालांकि यह अभी केवल तकनीकी अनुमान है और जांच के बाद ही वास्तविक कारण स्पष्ट होगा।

    कंपनी में टेल्को जॉब पर पाउडर कोटिंग की जाती है, जिसे ओवन में करीब 234 डिग्री सेल्सियस तापमान पर ट्रीट किया जाता है। श्री सिन्हा ने कहा कि अंतिम जांच प्रतिवेदन में कंपनी दोषी पाई गई तो प्रबंधन के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

    घटना का तकनीकी विश्लेषण और संभावित कारण

    प्रारंभिक जांच में यह तथ्य सामने आया है कि ओवन गैस फायर्ड था और इसका तापमान लगभग 234 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचाया जाता है। ऐसे उच्च तापमान वाले उपकरणों में गैस वाल्व और प्रेशर रिलीज सिस्टम का सुचारु रूप से कार्य करना अत्यंत आवश्यक होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि वाल्व सही समय पर बंद नहीं होता है तो गैस का जमाव होने लगता है, जिससे दबाव बढ़ता है और अंततः विस्फोट की स्थिति उत्पन्न होती है। मुख्य कारखाना निरीक्षक मनीष कुमार सिन्हा ने स्पष्ट किया है कि यह अभी तकनीकी अनुमान मात्र है और फॉरेंसिक जांच के बाद ही अंतिम निष्कर्ष निकलेगा।

    कंपनी प्रबंधन से मांगे गए सुरक्षा दस्तावेज

    • फैक्ट्री लाइसेंस की प्रमाणित प्रति
    • गैस पाइपलाइन एवं वाल्व के रखरखाव का रिकॉर्ड
    • अग्निशमन उपकरणों की कार्यक्षमता प्रमाणपत्र
    • श्रमिकों के सुरक्षा प्रशिक्षण का विवरण
    • पिछले सुरक्षा ऑडिट की रिपोर्ट

    प्रशासन ने कारखाना अधिनियम, 1948 के तहत प्रबंधन को नोटिस जारी कर 48 घंटे के भीतर सभी अनुपालन दस्तावेज प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। दस्तावेजों में किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर दंडात्मक कार्यवाही तय मानी जा रही है।

    औद्योगिक सुरक्षा के प्रति सख्त रुख जरूरी

    झारखंड के औद्योगिक क्षेत्रों में बीते कुछ महीनों में इस तरह की घटनाओं में इजाफा देखा गया है। सरायकेला-खरसावां जिला प्रशासन ने अब सुरक्षा मानकों के अनुपालन के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्णय लिया है। श्रम विभाग के अधिकारियों का कहना है कि छोटी-बड़ी सभी इकाइयों का औचक निरीक्षण किया जाएगा। घायल श्रमिकों के परिजनों को कर्मचारी क्षतिपूर्ति अधिनियम के तहत उचित मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि औद्योगिक सुरक्षा में लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।

    अधिक जानकारी के लिए श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, भारत सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।

    आदित्यपुर ब्लास्ट औद्योगिक सुरक्षा कारखाना निरीक्षक ग्लोरिया इंजीनियरिंग झारखंड खबर
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