लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
ग्लोरिया इंजीनियरिंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड में हुए ब्लास्ट की दुर्घटना में घायल आठ कामगारों में से पांच को इलाज के बाद अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है, जबकि तीन का इलाज जारी है। दुर्घटना के वास्तविक कारणों की जांच की जा रही है। मुख्य कारखाना निरीक्षक, रांची-सह-सरायकेला-खरसावां प्रभार मनीष कुमार सिन्हा ने ‘राष्ट्र संवाद’ को बताया कि फिलहाल घटनास्थल का निरीक्षण नहीं, बल्कि दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है। जांच प्रतिवेदन से पहले डिस्चार्ज हुए सभी घायलों के बयान लिए जाएंगे।
उन्होंने बताया कि कंपनी प्रबंधन से सुरक्षा संबंधी कॉम्प्लायंस के आवश्यक कागजात मांगे गए हैं। प्रारंभिक तकनीकी अनुमान के अनुसार कंपनी का ओवन गैस फायर्ड था। आशंका है कि पाइप का वाल्व किसी कारण से बंद नहीं हो पाया और गैस का दबाव बढ़ने से ब्लास्ट हुआ होगा। हालांकि यह अभी केवल तकनीकी अनुमान है और जांच के बाद ही वास्तविक कारण स्पष्ट होगा।
कंपनी में टेल्को जॉब पर पाउडर कोटिंग की जाती है, जिसे ओवन में करीब 234 डिग्री सेल्सियस तापमान पर ट्रीट किया जाता है। श्री सिन्हा ने कहा कि अंतिम जांच प्रतिवेदन में कंपनी दोषी पाई गई तो प्रबंधन के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
ग्लोरिया इंजीनियरिंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड: जांच और कार्रवाई
झारखंड में औद्योगिक सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू करने के लिए कारखाना निरीक्षालय लगातार निगरानी करता है। डीजीएफएएसएलआई के दिशानिर्देशों के अनुसार, प्रत्येक कारखाने को सुरक्षा ऑडिट और नियमित रखरखाव सुनिश्चित करना अनिवार्य है।
आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र में कई बड़ी इकाइयां संचालित होती हैं, जहां हजारों श्रमिक कार्यरत हैं। ऐसे में किसी भी प्रकार की लापरवाही गंभीर परिणाम दे सकती है। स्थानीय प्रशासन और श्रम विभाग इस घटना को गंभीरता से ले रहे हैं और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि गैस-फायर्ड ओवन में वाल्व और प्रेशर रिलीज सिस्टम की नियमित जांच बेहद महत्वपूर्ण है। थोड़ी सी चूक भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। कंपनी प्रबंधन को चाहिए कि वह सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करे और कर्मचारियों को उचित प्रशिक्षण प्रदान करे।
इस घटना ने एक बार फिर औद्योगिक सुरक्षा के प्रति गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। झारखंड सरकार ने हाल ही में कारखाना अधिनियम के तहत नए नियम अधिसूचित किए हैं, जिनमें खतरनाक प्रक्रियाओं वाले संयंत्रों के लिए त्रैमासिक सुरक्षा ऑडिट अनिवार्य किया गया है। ग्लोरिया इंजीनियरिंग जैसी इकाइयों को इन मानकों का पालन सुनिश्चित करना होगा। श्रम संगठनों ने मांग की है कि दोषी पाए जाने पर प्रबंधन के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाए और पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, जांच दल अगले सप्ताह तक अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंप सकता है।
आदित्यपुर थाना प्रभारी ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और घायलों को अस्पताल पहुंचाने में मदद की। फोरेंसिक टीम ने भी घटनास्थल से नमूने एकत्र किए हैं। वहीं, कंपनी प्रबंधन ने मीडिया से बात करने से इनकार कर दिया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि तेज धमाके की आवाज कई किलोमीटर तक सुनी गई थी, जिससे आसपास के इलाके में दहशत फैल गई थी।
