लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
भारत के महान उद्योगपति, विमानन अग्रदूत और समाजसेवी जेआरडी टाटा की जयंती पर बिष्टूपुर स्थित राजस्थान भवन में कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) की ओर से श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई।
जेआरडी टाटा की जयंती पर व्यापारियों ने दी श्रद्धांजलि
कार्यक्रम में शहर के व्यापारियों एवं उद्यमियों ने उनके चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किए।
कैट के राष्ट्रीय संयुक्त महामंत्री सुरेश सोंथालिया ने कहा कि जेआरडी टाटा का जीवन इस बात का प्रमाण है कि उद्योग केवल आर्थिक विकास का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का सशक्त साधन भी है।
डिस्ट्रीब्यूटर एसोसिएशन के दिलीप गोयल ने उन्हें भारत का पहला लाइसेंस प्राप्त पायलट बताते हुए टाटा एयरलाइंस की स्थापना को ऐतिहासिक उपलब्धि बताया।
कृषि बाजार समिति के दीपक भालोटिया, कैट के भरत वसानी, एशिया के ट्रस्टी संतोष खैतान, कैट के किशोर गोलछा, लघु उद्योग भारती के अध्यक्ष विनोद शर्मा, चैम्बर के पूर्व उपाध्यक्ष आलोक चौधरी तथा कमानी सेंटर ट्रेड एसोसिएशन के सचिव समीर मकानी ने भी जेआरडी टाटा के औद्योगिक विकास, सामाजिक उत्तरदायित्व, कर्मचारी कल्याण, नैतिक व्यावसायिक मूल्यों और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को प्रेरणादायी बताया।
इस अवसर पर सुधीर सिंह, सवार शर्मा, बी.एन. शर्मा, महेश सोंथालिया, पार्षद सत्यनारायण अग्रवाल, पवन शर्मा, आनंद चौधरी, निलेश वोरा, सुनील सोंथालिया, अरुण सोंथालिया, बिट्ठल अग्रवाल, नवीन श्रीवास्तव, शिव सुंदर अग्रवाल, पवन देबुका, शांतनु घोष, समीर मकानी, किशन संघी और बिमल गुप्ता सहित बड़ी संख्या में व्यापारी एवं उद्यमी उपस्थित रहे।
जेआरडी टाटा, जिनका पूरा नाम जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा था, ने भारतीय उद्योग जगत में एक अमिट छाप छोड़ी। वे न केवल टाटा समूह के अध्यक्ष रहे, बल्कि भारत में नागरिक उड्डयन के जनक के रूप में भी प्रसिद्ध हैं। उनकी दूरदर्शिता ने टाटा स्टील, टाटा मोटर्स, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज जैसी कंपनियों को वैश्विक पहचान दिलाई।
कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) देश के करोड़ों व्यापारियों का प्रतिनिधित्व करने वाला सबसे बड़ा संगठन है। यह संगठन समय-समय पर राष्ट्रीय हित के मुद्दों पर आवाज उठाता रहा है। जेआरडी टाटा की जयंती पर आयोजित यह कार्यक्रम व्यापारिक समुदाय के उनके प्रति सम्मान को दर्शाता है।
कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि जेआरडी टाटा के सिद्धांत आज के व्यावसायिक वातावरण में और भी प्रासंगिक हैं। उनके द्वारा स्थापित नैतिक व्यावसायिक मूल्य और कर्मचारी कल्याण की नीतियां कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व का एक मानक हैं। टाटा समूह की आधिकारिक वेबसाइट पर उनके जीवन और योगदान के बारे में विस्तार से पढ़ा जा सकता है।
जमशेदपुर, जिसे टाटा नगर के नाम से भी जाना जाता है, जेआरडी टाटा की कर्मभूमि रही है। इस शहर का विकास उनकी औद्योगिक दृष्टि का प्रत्यक्ष परिणाम है। कैट और अन्य व्यापारिक संगठनों द्वारा आयोजित यह श्रद्धांजलि सभा न केवल उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करती है, बल्कि युवा उद्यमियों को उनके आदर्शों पर चलने की प्रेरणा भी देती है।
सन 1904 में पेरिस में जन्मे जेआरडी टाटा ने 1929 में भारत का पहला पायलट लाइसेंस प्राप्त किया। 1932 में उन्होंने टाटा एयरलाइंस की स्थापना की, जो बाद में एयर इंडिया बनी। उनके नेतृत्व में टाटा समूह की संपत्ति 100 करोड़ रुपये से बढ़कर 10,000 करोड़ रुपये से अधिक हो गई। 1992 में उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
कैट के राष्ट्रीय संयुक्त महामंत्री सुरेश सोंथालिया ने अपने संबोधन में कहा कि जेआरडी टाटा ने हमेशा इस बात पर विश्वास किया कि व्यवसाय का उद्देश्य केवल लाभ कमाना नहीं, बल्कि समाज की सेवा करना है। उनके द्वारा शुरू की गई टाटा स्टील की जमशेदपुर इकाई ने न केवल इस्पात उत्पादन में कीर्तिमान स्थापित किए, बल्कि कर्मचारियों के लिए आवास, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यवस्था कर एक आदर्श औद्योगिक नगरी का निर्माण किया।
इस अवसर पर उपस्थित लघु उद्योग भारती के अध्यक्ष विनोद शर्मा ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए जेआरडी टाटा के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि टाटा समूह ने हमेशा छोटे उद्योगों को अपनी आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा बनाकर उन्हें सशक्त बनाने का कार्य किया है। यह भावना आज के ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान का आधार है।
