गिरिडीह हाथियों का तांडव, खेत में काम कर रहे किसान को कुचलकर मार डाला, तीन मासूम बच्चों के सिर से उठा पिता का साया
राष्ट्र संवाद संवादाता
बिरनी के जरीडीह गांव में दर्दनाक हादसा, ग्रामीणों में दहशत; वन विभाग की चेतावनी के बावजूद हुई घटना, जनप्रतिनिधियों ने मुआवजे की उठाई मांग
गिरिडीह जिले के बिरनी प्रखंड के जरीडीह गांव में जंगली हाथियों के झुंड ने ऐसा तांडव मचाया कि एक परिवार की खुशियां पलभर में उजड़ गईं। खेत में काम कर रहे 40 वर्षीय उपेंद्र यादव (पिता- टहल महतो) को हाथियों ने कुचलकर मौत के घाट उतार दिया। घटना इतनी भयावह थी कि मौके पर ही उनकी मौत हो गई। इस दर्दनाक हादसे के बाद पूरे गांव में मातम और दहशत का माहौल है।
जानकारी के अनुसार उपेंद्र यादव कजरा गढ़ा जंगल के समीप अपने खेत में काम कर रहे थे। इसी दौरान जंगल से निकले हाथियों के झुंड ने उन पर हमला कर दिया। इससे पहले कि वे अपनी जान बचा पाते, हाथियों ने उन्हें कुचल दिया। घटना की सूचना मिलते ही गांव में चीख-पुकार मच गई।
मृतक अपने पीछे पत्नी निशू देवी, 10 वर्षीय पुत्री तथा 6 और 4 वर्ष के दो मासूम बेटों को छोड़ गए हैं। पति की मौत की खबर सुनते ही निशू देवी की हालत बिगड़ गई। पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
घटना की सूचना मिलते ही बिरनी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया शुरू की। पुलिस ने ग्रामीणों से हाथियों के झुंड के पास नहीं जाने और सतर्क रहने की अपील की।
वहीं प्रभारी वनपाल अबोध महथा ने बताया कि वन विभाग की टीम सुबह चार बजे से ही गांव में माइकिंग कर लोगों को लगातार चेतावनी दे रही थी कि हाथियों का झुंड गांव के आसपास मौजूद है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में ग्रामीण हाथियों को देखने के लिए उनके करीब पहुंच रहे थे। वन विभाग की टीम दिनभर हाथियों को गांव से बाहर निकालने और लोगों को सुरक्षित रखने में जुटी रही।
घटना की जानकारी मिलते ही मध्य भाग जिला परिषद सदस्य प्रतिनिधि डॉ. सलीम अंसारी और बिरनी प्रमुख रामु बैठा घटनास्थल पहुंचे। दोनों ने पुलिस प्रशासन और ग्रामीणों के साथ स्थिति का जायजा लिया तथा पीड़ित परिवार को हरसंभव सहायता का भरोसा दिया। प्रमुख रामु बैठा ने संबंधित अधिकारियों से तत्काल सरकारी मुआवजा और अन्य राहत उपलब्ध कराने की मांग की। उनकी पहल पर एंबुलेंस की व्यवस्था कर आगे की प्रक्रिया पूरी कराई गई।
इस घटना ने एक बार फिर मानव-हाथी संघर्ष की गंभीर समस्या को उजागर कर दिया है। ग्रामीणों ने वन विभाग से हाथियों की लगातार निगरानी, स्थायी सुरक्षा व्यवस्था और पीड़ित परिवार को शीघ्र उचित मुआवजा देने की मांग की है।

