23 साल बाद जेल से बाहर आने की राह पर फहीम खान, सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा हाईकोर्ट का रिहाई आदेश
राष्ट्र संवाद संवादाता
धनबाद: झारखंड के चर्चित वासेपुर हत्याकांड के दोषी और कुख्यात गैंगस्टर फहीम खान की रिहाई का रास्ता अब लगभग साफ हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार की अपील खारिज करते हुए झारखंड हाईकोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें फहीम खान को रिहा करने का निर्देश दिया गया था। शीर्ष अदालत के इस फैसले के बाद अब जेल प्रशासन द्वारा आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी किए जाने के बाद फहीम की रिहाई संभव मानी जा रही है।
फहीम खान वर्ष 1989 में वासेपुर के चर्चित सगीर हसन सिद्दीकी हत्याकांड में दोषी ठहराए गए थे। सत्र न्यायालय ने 15 जून 1991 को उन्हें दोषसिद्ध किया था, जबकि बाद में झारखंड हाईकोर्ट ने 2009 में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। वर्ष 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने भी इस सजा को बरकरार रखा था। इसके बाद लंबे समय तक जेल में रहने, बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य संबंधी कारणों को आधार बनाकर उनकी रिहाई की मांग की गई।
झारखंड हाईकोर्ट ने 7 नवंबर 2025 को अपने फैसले में कहा था कि फहीम खान की रिहाई पर विचार करते समय सरकार ने 2007 की संशोधित रिमिशन नीति लागू की, जबकि उनके मामले में 1991 में प्रभावी 1984 की रिहाई नीति लागू होनी चाहिए थी। अदालत ने इसे अनुचित मानते हुए सरकार को छह सप्ताह के भीतर फहीम को रिहा करने का निर्देश दिया था। आदेश का पालन नहीं होने पर फहीम की ओर से अवमानना याचिका भी दायर की गई थी।
इसके बाद झारखंड सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी और हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। इस फैसले के साथ फहीम खान की रिहाई का कानूनी रास्ता और मजबूत हो गया है।
कानूनी जानकारों का मानना है कि यह फैसला केवल फहीम खान के मामले तक सीमित नहीं है, बल्कि उन अन्य मामलों के लिए भी महत्वपूर्ण है जिनमें सजा के समय लागू रिमिशन नीति और बाद में संशोधित नियमों के बीच विवाद रहा है।
फहीम खान का नाम फिल्म ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ के कारण भी लंबे समय से चर्चा में रहा है। हालांकि फिल्म और वास्तविक घटनाओं में कई रचनात्मक अंतर हैं, फिर भी वासेपुर की आपराधिक पृष्ठभूमि को लेकर उनका नाम अक्सर सुर्खियों में रहा है।
अब सभी की निगाहें जेल प्रशासन पर हैं। यदि आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं समय पर पूरी हो जाती हैं, तो लगभग 23 वर्षों से अधिक समय जेल में बिताने के बाद फहीम खान जल्द ही रिहा हो सकते हैं। वहीं राज्य सरकार ने संकेत दिया है कि वह उपलब्ध कानूनी विकल्पों पर विचार करेगी।

