Close Menu
Rashtra SamvadRashtra Samvad
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • होम
    • राष्ट्रीय
    • अन्तर्राष्ट्रीय
    • राज्यों से
      • झारखंड
      • बिहार
      • उत्तर प्रदेश
      • ओड़िशा
    • संपादकीय
      • मेहमान का पन्ना
      • साहित्य
      • खबरीलाल
    • खेल
    • वीडियो
    • ईपेपर
    Topics:
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Home » UCIL जादूगोड़ा की शर्मनाक लापरवाही: बिना नोटिस 10 होमगार्ड सड़क पर, “मेडिकल टेंर” के नाम पर 10 परिवारों की रोजी छीनी
    झारखंड सरायकेला-खरसावां

    UCIL जादूगोड़ा की शर्मनाक लापरवाही: बिना नोटिस 10 होमगार्ड सड़क पर, “मेडिकल टेंर” के नाम पर 10 परिवारों की रोजी छीनी

    Aman OjhaBy Aman OjhaJuly 9, 2026No Comments4 Mins Read
    Share Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Share
    Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link

     

     

    राष्ट्र संवाद संवाददाता

     

    देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने वाला _यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड UCIL_ जादूगोड़ा माइन्स एक बार फिर अपने कर्मचारियों के शोषण को लेकर कठघरे में है। नरवा पहाड़ माइन्स सरिया में पिछले कई वर्षों से ईमानदारी से ड्यूटी कर रहे 10 होमगार्ड जवानों को प्रबंधन ने बिना किसी लिखित सूचना, बिना कारण बताए अचानक “मेडिकल टेंर” का बहाना बनाकर घर बैठा दिया।

     

    मामला सामने आते ही इलाके में आक्रोश है। पीड़ितों का कहना है कि UCIL प्रबंधन श्रम कानूनों को रद्दी की टोकरी में फेंककर मनमानी कर रहा है।

     

    *एक झटके में उजड़े 10 परिवार*

    पीड़ित होमगार्डों ने 01/07/2026 को UCIL के _उपमहाप्रबंधक, शांति/कार्मिक एवं O.S.O_ को लिखित शिकायत दी है।

     

    शिकायत में बताया गया कि 7 जुलाई 2026 को ASI _केशव कुमार वर्मा_ अचानक नरवा पहाड़ माइन्स सरिया पहुंचे और 10 होमगार्ड जवानों को ड्यूटी से हटा दिया। जब जवानों ने नियम संगत लिखित आदेश मांगा तो उनके साथ बदतमीजी की गई। साफ कह दिया गया कि यह _इंचार्ज S.S. प्रदीप_ के आदेश पर हो रहा है।

     

    शिकायतकर्ता _बायुदेव सोरेन, लखन मुर्मू, मोहन हेंब्रम और जोगेश टुडु_ ने कहा, “कोरोना काल में जब सब घरों में थे, तब भी हम माइन्स की सुरक्षा कर रहे थे। आज बिना गलती के हमें बेरोजगार कर दिया गया। हमारे बच्चे भूखे मरने की नौबत पर हैं।”

     

    *UCIL की लापरवाहियों की फेहरिस्त*

    स्थानीय लोगों और श्रमिक नेताओं का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब UCIL ने नियमों को ताक पर रखा है।

     

    1. *श्रम कानूनों का उल्लंघन*: किसी भी सरकारी उपक्रम में बिना लिखित नोटिस, बिना कारण बताए और बिना जांच के किसी कर्मी को हटाना सीधे श्रम कानूनों का उल्लंघन है। लेकिन UCIL को इसकी परवाह नहीं।

    2. *पारदर्शिता का अभाव*: जवानों को हटाने का कोई ठोस कारण नहीं बताया गया। सिर्फ मौखिक रूप से “मेडिकल टेंर खत्म” कहकर पल्ला झाड़ लिया गया। टेंर कब खत्म हुआ, किस आधार पर हुआ, इसका कोई कागज नहीं।

    3. *दमनकारी रवैया*: लिखित मांग करने पर जवानों को डराया-धमकाया गया। अधिकारियों का रवैया तानाशाही वाला रहा।

    4. *पुरानी बीमारी*: जादूगोड़ा क्षेत्र में UCIL पर पहले भी आदिवासी-मूलवासी मजदूरों और ठेका कर्मियों के शोषण के आरोप लगते रहे हैं। ड्यूटी के बाद ESI, PF, बीमा जैसी सुविधाओं में भी गड़बड़ी के मामले सामने आ चुके हैं।

     

    *बाघराय मार्डी: “ये मजदूर विरोधी सोच है”*

    इस अन्याय के खिलाफ पूर्व जिला परिषद सदस्य _बाघराय मार्डी_ मैदान में उतर आए हैं। उन्होंने पीड़ित जवानों से मुलाकात कर आंदोलन का ऐलान किया।

     

    > “UCIL की ये पुरानी चाल है। पहले आदिवासी-मूलवासी लोगों से सालों काम करवाओ। जब जरूरत खत्म हो जाए तो बिना कारण बाहर निकाल दो। ये 10 परिवार आज बर्बादी के कगार पर हैं।”

     

    बाघराय मार्डी ने इस मामले की प्रतिलिपि _जिला समादेष्टा कार्यालय डिमना_ और _पूर्व जिला परिषद सदस्य मुसाबनी अंचल-18_ को भी भेजी है।

     

    उन्होंने UCIL प्रबंधन को 7 दिन का अल्टीमेटम दिया है। चेतावनी दी कि “अगर 7 दिनों के अंदर सभी 10 जवानों को सम्मान के साथ ड्यूटी पर बहाल नहीं किया गया, तो UCIL के मुख्य गेट के सामने अनिश्चितकालीन आंदोलन किया जाएगा।”

     

    *जवानों की मांग और प्रबंधन की खामोशी*

    पीड़ित जवानों की एकमात्र मांग है – मामले की निष्पक्ष जांच हो और उन्हें अविलंब ड्यूटी पर बहाल किया जाए।

     

    लेकिन सवाल यह है कि देश के सबसे संवेदनशील संस्थान UCIL में ही जब कानून की धज्जियां उड़ेंगी, तो आम मजदूर कहां जाएगा?

     

    UCIL प्रबंधन की तरफ से अब तक इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। प्रबंधन की यह चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।

     

    *निष्कर्ष*: नरवा पहाड़ का मामला सिर्फ 10 होमगार्डों की नौकरी का नहीं है। यह UCIL प्रबंधन की तानाशाही, श्रम कानूनों की अवहेलना और आदिवासी बहुल क्षेत्र में मजदूरों के शोषण का प्रतीक बन गया है। अब देखना है कि प्रशासन और श्रम विभाग कब इस “मेडिकल टेंर” के नाम पर हो रहे घोटाले पर लगाम लगाते हैं।

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Previous Articleपांच साल बाद पुलिस के शिकंजे में आया फरार आरोपी, आत्महत्या के लिए उकसाने के चर्चित मामले में गिरफ्तारी
    Next Article जोड़ा-जेएसडब्ल्यू कंपनी के स्लरी पाइप योजना ने क्षेत्र के मुख्य सड़को को किया अवरूद्ध

    Related Posts

    स्वर्णरेखा-खरकाई उफान पर, जमशेदपुर के निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा

    September 1, 2026

    अमलगम स्टील की भूमि व लीज व्यवस्था की उच्चस्तरीय जांच की मांग

    August 31, 2026

    गुड़ाबांधा में बालू के अवैध कारोबार का आरोप, घाट से 100 मीटर पर बना स्टॉक यार्ड

    August 31, 2026

    Comments are closed.

    अभी-अभी

    बीईएमएल में 1346 अप्रेंटिस पदों पर भर्ती का मौका फ्रेशर्स भी कर सकेंगे आवेदन

    बिना चाशनी और मावे के झंझट के 15 मिनट में तैयार करें सिंघाड़े के आटे की स्वादिष्ट बर्फी

    चोट से जूझने के बाद फिर काम पर लौटेंगी रश्मिका मंदाना, घर की सुकून भरी दुनिया को कहा अलविदा

    सुप्रीम कोर्ट ने सीजेपी के 5 सितंबर मार्च पर रोक लगाने से किया इनकार, कहा- कानून व्यवस्था बनाएं रखेें

    हरियाणा : एक्सप्रेस-वे पर दर्दनाक हादसा, खड़े ट्रक में घुसी श्रद्धालुओं से भरी पिकअप, 6 की मौत, 14 घायल

    अर्थव्यवस्था की तूफानी रफ्तार जारी, अप्रैल-जून तिमाही में 7.8 प्रतिशत रही भारत की विकास दर

    एवरेस्ट के मसालों पर लगा बैन, एफएसएसएआई की जांच में सामने आई चौंकाने वाली बात, जानें क्या है पूरा मामला

    बिहार में न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 62 साल करने का रास्ता साफ, पटना हाईकोर्ट ने लिया बड़ा फैसला

    कई आपराधिक मामले दर्ज होना शहर-निकाले का आधार नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ का आदेश रद्द किया

    असम में दर्दनाक हादसा : डिवाइडर पार कर ट्रक से टकराई कार, 6 की मौत, कई घायल, 2 की हालत नाजुक

    Facebook X (Twitter) Telegram WhatsApp
    © 2026 News Samvad. Designed by Cryptonix Labs .

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.