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    Home » UCIL जादूगोड़ा की शर्मनाक लापरवाही: बिना नोटिस 10 होमगार्ड सड़क पर, “मेडिकल टेंर” के नाम पर 10 परिवारों की रोजी छीनी
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    UCIL जादूगोड़ा की शर्मनाक लापरवाही: बिना नोटिस 10 होमगार्ड सड़क पर, “मेडिकल टेंर” के नाम पर 10 परिवारों की रोजी छीनी

    Aman OjhaBy Aman OjhaJuly 9, 2026No Comments4 Mins Read
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    राष्ट्र संवाद संवाददाता

     

    देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने वाला _यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड UCIL_ जादूगोड़ा माइन्स एक बार फिर अपने कर्मचारियों के शोषण को लेकर कठघरे में है। नरवा पहाड़ माइन्स सरिया में पिछले कई वर्षों से ईमानदारी से ड्यूटी कर रहे 10 होमगार्ड जवानों को प्रबंधन ने बिना किसी लिखित सूचना, बिना कारण बताए अचानक “मेडिकल टेंर” का बहाना बनाकर घर बैठा दिया।

     

    मामला सामने आते ही इलाके में आक्रोश है। पीड़ितों का कहना है कि UCIL प्रबंधन श्रम कानूनों को रद्दी की टोकरी में फेंककर मनमानी कर रहा है।

     

    *एक झटके में उजड़े 10 परिवार*

    पीड़ित होमगार्डों ने 01/07/2026 को UCIL के _उपमहाप्रबंधक, शांति/कार्मिक एवं O.S.O_ को लिखित शिकायत दी है।

     

    शिकायत में बताया गया कि 7 जुलाई 2026 को ASI _केशव कुमार वर्मा_ अचानक नरवा पहाड़ माइन्स सरिया पहुंचे और 10 होमगार्ड जवानों को ड्यूटी से हटा दिया। जब जवानों ने नियम संगत लिखित आदेश मांगा तो उनके साथ बदतमीजी की गई। साफ कह दिया गया कि यह _इंचार्ज S.S. प्रदीप_ के आदेश पर हो रहा है।

     

    शिकायतकर्ता _बायुदेव सोरेन, लखन मुर्मू, मोहन हेंब्रम और जोगेश टुडु_ ने कहा, “कोरोना काल में जब सब घरों में थे, तब भी हम माइन्स की सुरक्षा कर रहे थे। आज बिना गलती के हमें बेरोजगार कर दिया गया। हमारे बच्चे भूखे मरने की नौबत पर हैं।”

     

    *UCIL की लापरवाहियों की फेहरिस्त*

    स्थानीय लोगों और श्रमिक नेताओं का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब UCIL ने नियमों को ताक पर रखा है।

     

    1. *श्रम कानूनों का उल्लंघन*: किसी भी सरकारी उपक्रम में बिना लिखित नोटिस, बिना कारण बताए और बिना जांच के किसी कर्मी को हटाना सीधे श्रम कानूनों का उल्लंघन है। लेकिन UCIL को इसकी परवाह नहीं।

    2. *पारदर्शिता का अभाव*: जवानों को हटाने का कोई ठोस कारण नहीं बताया गया। सिर्फ मौखिक रूप से “मेडिकल टेंर खत्म” कहकर पल्ला झाड़ लिया गया। टेंर कब खत्म हुआ, किस आधार पर हुआ, इसका कोई कागज नहीं।

    3. *दमनकारी रवैया*: लिखित मांग करने पर जवानों को डराया-धमकाया गया। अधिकारियों का रवैया तानाशाही वाला रहा।

    4. *पुरानी बीमारी*: जादूगोड़ा क्षेत्र में UCIL पर पहले भी आदिवासी-मूलवासी मजदूरों और ठेका कर्मियों के शोषण के आरोप लगते रहे हैं। ड्यूटी के बाद ESI, PF, बीमा जैसी सुविधाओं में भी गड़बड़ी के मामले सामने आ चुके हैं।

     

    *बाघराय मार्डी: “ये मजदूर विरोधी सोच है”*

    इस अन्याय के खिलाफ पूर्व जिला परिषद सदस्य _बाघराय मार्डी_ मैदान में उतर आए हैं। उन्होंने पीड़ित जवानों से मुलाकात कर आंदोलन का ऐलान किया।

     

    > “UCIL की ये पुरानी चाल है। पहले आदिवासी-मूलवासी लोगों से सालों काम करवाओ। जब जरूरत खत्म हो जाए तो बिना कारण बाहर निकाल दो। ये 10 परिवार आज बर्बादी के कगार पर हैं।”

     

    बाघराय मार्डी ने इस मामले की प्रतिलिपि _जिला समादेष्टा कार्यालय डिमना_ और _पूर्व जिला परिषद सदस्य मुसाबनी अंचल-18_ को भी भेजी है।

     

    उन्होंने UCIL प्रबंधन को 7 दिन का अल्टीमेटम दिया है। चेतावनी दी कि “अगर 7 दिनों के अंदर सभी 10 जवानों को सम्मान के साथ ड्यूटी पर बहाल नहीं किया गया, तो UCIL के मुख्य गेट के सामने अनिश्चितकालीन आंदोलन किया जाएगा।”

     

    *जवानों की मांग और प्रबंधन की खामोशी*

    पीड़ित जवानों की एकमात्र मांग है – मामले की निष्पक्ष जांच हो और उन्हें अविलंब ड्यूटी पर बहाल किया जाए।

     

    लेकिन सवाल यह है कि देश के सबसे संवेदनशील संस्थान UCIL में ही जब कानून की धज्जियां उड़ेंगी, तो आम मजदूर कहां जाएगा?

     

    UCIL प्रबंधन की तरफ से अब तक इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। प्रबंधन की यह चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।

     

    *निष्कर्ष*: नरवा पहाड़ का मामला सिर्फ 10 होमगार्डों की नौकरी का नहीं है। यह UCIL प्रबंधन की तानाशाही, श्रम कानूनों की अवहेलना और आदिवासी बहुल क्षेत्र में मजदूरों के शोषण का प्रतीक बन गया है। अब देखना है कि प्रशासन और श्रम विभाग कब इस “मेडिकल टेंर” के नाम पर हो रहे घोटाले पर लगाम लगाते हैं।

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