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    Home » 50 साल पुराना यूसीआईएल साप्ताहिक हाट बदहाल: टूटे शेड, कीचड़ और बदइंतजामी के बीच जूझ रही हजारों लोगों की रोजी-रोटी
    झारखंड सरायकेला-खरसावां

    50 साल पुराना यूसीआईएल साप्ताहिक हाट बदहाल: टूटे शेड, कीचड़ और बदइंतजामी के बीच जूझ रही हजारों लोगों की रोजी-रोटी

    Aman OjhaBy Aman OjhaJuly 4, 2026No Comments3 Mins Read
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    राष्ट्र संवाद संवाददाता जादूगोड़ा

     

    *जादूगोड़ा।* यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड यानी यूसीआईएल जादूगोड़ा कॉलोनी का साप्ताहिक हाट आज बदहाली की मिसाल बन गया है। करीब 50 साल से ज्यादा पुराना यह बाजार क्षेत्र का सबसे प्राचीन हाट माना जाता है, लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि इसकी सुध लेने वाला आज तक कोई नहीं है।

     

    न यूसीआईएल प्रबंधन ने ध्यान दिया और न ही जनप्रतिनिधियों ने। नतीजा ये कि हजारों लोगों की रोजी-रोटी से जुड़ा यह हाट धीरे-धीरे दम तोड़ रहा है।

     

    दर्जनों गांवों की निर्भरता, पर सुविधाएं शून्य 

    हर सप्ताह आसपास के दर्जनों गांवों से फल, सब्जी, अनाज और रोजमर्रा का सामान बेचने वाले विक्रेता यहां पहुंचते हैं। यूसीआईएल के कर्मचारी, ठेका मजदूर, उनके परिजन और ग्रामीण अपनी दैनिक जरूरतों के लिए इसी हाट पर निर्भर हैं। लेकिन यहां मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव है।

     

    जर्जर ढांचा और जलभराव से व्यापारी परेशान 

    हाट में लगे शेड पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं। कई जगह शेड हैं ही नहीं। पक्के चबूतरे टूटकर बिखर गए हैं और सड़कें जगह-जगह से उखड़ चुकी हैं। बरसात के मौसम में स्थिति सबसे खराब हो जाती है। पूरे बाजार में घुटने भर कीचड़ और जलभराव हो जाता है।

     

    व्यापारियों को अपना सामान बोरे और तिरपाल पर रखकर बेचना पड़ता है। ग्राहकों को भी दलदल में चलकर खरीदारी करनी पड़ती है। बारिश में बिना शेड के भीगते हुए लोग सामान खरीदने को मजबूर हैं।

     

    महिलाओं के लिए सबसे बड़ी दिक्कत

    इस हाट में सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं को होती है। बाजार में महिलाओं के लिए एक भी शौचालय नहीं है। पीने के पानी की व्यवस्था भी नहीं है। जगह-जगह झाड़ियां और कूड़े का ढेर लगा है। इससे गंदगी के साथ-साथ असुरक्षा भी बढ़ गई है। शाम होते ही हाट में अंधेरा हो जाता है क्योंकि पर्याप्त प्रकाश की व्यवस्था नहीं है।

     

    व्यापारियों का आक्रोश: जिम्मेदारी हमें दे दें

    व्यापारियों का कहना है कि अगर यूसीआईएल प्रबंधन इस बाजार को नहीं संभाल सकता तो इसकी देखरेख की जिम्मेदारी उन्हें सौंप दी जाए। उनका कहना है कि हर सप्ताह लगान और अन्य शुल्क तो वसूला जाता है, लेकिन बदले में कोई सुविधा नहीं मिलती।

     

    चैंबर ऑफ कॉमर्स के सदस्य *सुनील साहू* ने कहा, “इस स्थिति में दुकानदारी करना बहुत मुश्किल हो गया है। ग्राहक कीचड़ के कारण आना नहीं चाहते। अगर जल्द सुधार नहीं हुआ तो व्यापार पूरी तरह चौपट हो जाएगा।”

     

    “प्राथमिकता के आधार पर हो सौंदर्यीकरण”: सुखोमुखी

    मुखी समाज विकास समिति, झारखंड के कार्यकारिणी अध्यक्ष *सुखोमुखी उर्फ टिक्की मुखी* ने यूसीआईएल प्रबंधन से मांग की है कि इस जनहित के मुद्दे को प्राथमिकता के आधार पर लिया जाए।

     

    उन्होंने कहा कि हाट के सौंदर्यीकरण के लिए तत्काल चबूतरा निर्माण, इंटरलॉकिंग पथ, समुचित जल निकासी, पर्याप्त स्ट्रीट लाइट, पौधारोपण, कूड़ेदान और नियमित साफ-सफाई की व्यवस्था की जाए। साथ ही महिलाओं के लिए अलग शौचालय और पीने के पानी की स्थायी व्यवस्था हो।

     

    स्थानीय लोगों का कहना है कि यह हाट सिर्फ बाजार नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। अगर इसे जल्द नहीं सुधारा गया तो आने वाले समय में न सिर्फ व्यापार प्रभावित होगा, बल्कि बेरोजगारी भी बढ़ेगी।

     

    अब देखना होगा कि यूसीआईएल प्रबंधन और जिला प्रशासन इस 50 साल पुराने हाट की बदहाली को कब दूर करते हैं।

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