राष्ट्र संवाद संवाददाता
पूर्वी सिंहभूम के जादूगोड़ा स्थित राखा माइंस से निकल रहा जहरीला पानी अब ग्रामीणों के लिए जानलेवा बनता जा रहा है। HCL यानी हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड की इस तांबा खदान से निकले दूषित पानी ने आसपास के तालाबों और नालों को पूरी तरह लाल कर दिया है। इस पानी के इस्तेमाल से गांव के बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को खुजली, चकत्ते और त्वचा रोग हो रहे हैं।
ग्रामीणों के शिकायत पर हालात का जायजा लेने पहुंचे भाजपा जिला अध्यक्ष सत्या तिवारी, जिला उपाध्यक्ष रोहित सिंह परमार और नेता बिक्रम सिंह के सामने ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा।
ग्रामीणों ने साफ कहा कि अगर 15 दिन में समाधान नहीं हुआ तो सड़क से लेकर खदान तक उग्र आंदोलन होगा।
साथ ही साथ यहां पर पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाया जा रहा है अंधाधुन हजारों पेड़ काटे जा रहे हैं बिना किसी ग्राम सभा के यह भी एक गंभीर मामला है।
*कंपनी का प्रोफाइल: देश की एकमात्र तांबा उत्पादक
*हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड (HCL)* भारत सरकार का उपक्रम है और देश की एकमात्र वर्टिकली इंटीग्रेटेड कॉपर उत्पादक कंपनी है। इसकी स्थापना 1967 में हुई थी। राखा माइंस झारखंड की सबसे पुरानी और बड़ी भूमिगत तांबा खदानों में से एक है। दशकों से यह खदान बंद और चालू होने के दौर से गुजर रही है। हाल ही में इसे साउथ वेस्ट माइनिंग लिमिटेड को MDO यानी माइन डेवलपर एंड ऑपरेटर के तौर पर सौंपा गया है। आरोप है कि रिवाटरिंग का काम शुरू होते ही प्रदूषण नियंत्रण के नियम ताक पर रख दिए गए।
ये हैं कंपनी की बड़ी लापरवाहियां
1. *ETP प्लांट या तो बंद, या नाकाफी*: खदान से निकलने वाले एसिडिक पानी को ट्रीट करने के लिए एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट जरूरी है। ग्रामीणों का आरोप है कि ETP या तो चलता ही नहीं, या उसकी क्षमता बेहद कम है। इसी वजह से बिना ट्रीट हुआ जहरीला पानी सीधे प्राकृतिक जलस्रोतों में छोड़ा जा रहा है।
*मॉनिटरिंग का अभाव*: केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नियमों के मुताबिक भारी धातुओं वाले पानी को खुले में छोड़ने से पहले pH और TDS मानक के अंदर होना चाहिए। ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी न तो नियमित जांच करती है और न ही रिपोर्ट सार्वजनिक करती है।
स्वास्थ्य पर असर: सबसे ज्यादा बच्चे परेशान
दूषित पानी के संपर्क में आने से राखा, माटीगोड़ा और आसपास के गांवों में लोगों को गंभीर स्किन इंफेक्शन हो रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक पानी में कॉपर और सल्फेट की मात्रा ज्यादा होने से एलर्जिक डर्मेटाइटिस हो रहा है। बच्चों की चमड़ी पर छाले पड़ रहे हैं। लंबे समय तक ऐसा पानी पीने से किडनी और लीवर पर भी असर पड़ सकता है।
आगे क्या?
भाजपा नेताओं ने साउथ वेस्ट माइनिंग लिमिटेड के प्रोजेक्ट हेड मलय दरिपा से मिलकर 7 दिन में एक्शन प्लान मांगा है। प्रोजेक्ट हेड ने भरोसा दिया है कि प्रदूषण नियंत्रण के सभी मानकों का पालन करते हुए जल्द स्थायी समाधान निकाला जाएगा। वहीं ग्रामीणों ने दो टूक कहा ।

