राष्ट्र संवाद संवाददाता
_पोटका-मुसाबनी में सरकारी रेट से दोगुने दाम पर बिक रही बालू, ग्रामीणों को योजनाओं के लिए नहीं मिल रही बालू।अवैध पत्थर खनन जोरो पर अवैध ईट भट्ठा पर सवाल रेत_पूर्वी सिंहभूम जिले में बालू का अवैध कारोबार अब माफिया के लिए ‘काला सोना’ बन गया है। जिला खनन पदाधिकारी (डीएमओ) कार्यालय की निगरानी में ही पोटका, मुसाबनी और डुमरिया क्षेत्र में करोड़ों रुपए का अवैध खनन धड़ल्ले से चल रहा है। सरकार को हर महीने लाखों के राजस्व का नुकसान हो रहा है।
कैसे चल रहा है खेल?
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, हराढया बालू की सरकारी दर करीब 17 हजार रुपए प्रति गाड़ी है। इसमें लोडिंग और परिवहन का खर्च शामिल है। लेकिन माफिया इसी बालू को बाजार में 30 से 35 हजार रुपए प्रति गाड़ी बेच रहे हैं। यानी एक गाड़ी पर सीधे 13 से 18 हजार का मुनाफा।
‘एंट्री सिस्टम’ पर उठे सवाल
सबसे बड़ा सवाल डीएमओ कार्यालय की कार्यशैली पर है। बताया जा रहा है कि जिन वाहनों को ‘एंट्री’ मिल जाती है, उन्हें रास्ते में कोई नहीं रोकता। एक बार एंट्री मिल गई तो समझो गाड़ी पास हो गई। इस सिस्टम की वजह से अवैध कारोबार को बढ़ावा मिल रहा है। जिला बीस सूत्री सदस्य टिको मुखी की शिकायत के बाद पूरे नेटवर्क की परतें खुल रही हैं।
ग्रामीण परेशान, माफिया मालामाल
एक तरफ सरकारी योजनाओं के लिए ग्रामीणों को बालू नहीं मिल रही, वहीं दूसरी तरफ माफिया रातों-रात अमीर हो रहे हैं। ग्रामीणों ने शिकायत की है कि पीएम आवास जैसी योजनाओं के लिए बालू उपलब्ध नहीं है, लेकिन बाजार में अवैध बालू आसानी से मिल जाती है। बालू के साथ-साथ पत्थर का भी अवैध खनन किया जा रहा है।
विभाग मौन, कार्रवाई का इंतजार
इस पूरे मामले में जिला खनन पदाधिकारी कार्यालय की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बड़ी मात्रा में खनन और परिवहन होने के बावजूद प्रभावी नियंत्रण नहीं दिख रहा। सड़क सुरक्षा और नियमों के अनुपालन पर भी चिंता जताई जा रही है।

