राष्ट्र संवाद संवाददाता
यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (यूसिल) के लेखा विभाग की धीमी कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। बिल पास होने के बाद भी महीनों से भुगतान नहीं मिलने से छोटे-बड़े ठेकेदारों में भारी नाराजगी है। कई ठेकेदारों ने काम बंद करने की चेतावनी दी है।
क्या है पूरा मामला
ठेकेदार संघ के अनुसार सिविल, मैकेनिकल और सप्लाई वर्क से जुड़े 40 से ज्यादा ठेकेदारों का करीब करोड़ रुपये का भुगतान फंसा हुआ है। कुछ बिल तो 6 महीने से लेखा विभाग में पड़े हैं।
ठेकेदार ने बताया, “मजदूरों को पगार देनी है, बैंक की EMI टूट रही है। बिल पर सारे अधिकारियों के साइन हो चुके हैं, फिर भी लेखा विभाग ऑब्जेक्शन पर ऑब्जेक्शन लगा रहा है। हर बार नया कागज मांगते हैं।”
काम पर पड़ रहा असर
भुगतान रुकने से जादूगोड़ा और नरवा पहाड़ माइंस में मेंटेनेंस के कई काम ठप पड़ गए हैं। टेंडर लेने से भी ठेकेदार अब कतरा रहे हैं। एक ठेकेदार ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “यूसिल का काम अब घाटे का सौदा बन गया है। ऊपर ब्याज पर पैसा लेकर काम करो और पेमेंट के लिए साल भर चक्कर काटो।”
ठेकेदार का कहना कि हाल ही के दिन में लेखा विभाग के दो अधिकारी का तबादला किया गया है वही विवेक पांडे के द्वारा प्रभार नहीं लिए जाने के कारण ठेकेदार को काफी परेशानी हो रही है।
ठेकेदार संघ देगा ज्ञापन
यूसिल ठेकेदार संघ के अध्यक्ष सुरेश महतो ने कहा, “अगर 20 जून तक भुगतान शुरू नहीं हुआ तो हम सी एम डी से मिलकर धरना-प्रदर्शन करेंगे। लेखा विभाग जानबूझकर फाइल लटकाता है।” संघ का आरोप है कि स्टाफ की कमी और ‘टेबल से टेबल’ फाइल घुमाने की पुरानी आदत से दिक्कत हो रही है।
स्थानीय अर्थव्यवस्था पर असर
यूसिल जादूगोड़ा क्षेत्र की सबसे बड़ी कंपनी है। ठेकेदारों के भुगतान रुकने से लोकल मार्केट, ट्रांसपोर्ट और हार्डवेयर दुकानदारों का पैसा भी फंस गया है। सप्लायर एसोसिएशन ने भी चिंता जताई है।
_विशेषज्ञों का मानना है कि PSU में पेमेंट सिस्टम को डिजिटल और टाइम-बाउंड करना जरूरी है,

