‘राष्ट्र संवाद’ की खबर का बड़ा असर, यूसीआईएल में फेरबदल शुरू, कई अफसरों पर गिरी गाज
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जादूगोड़ा, झारखंड: यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (UCIL), जो भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, इन दिनों अपने आंतरिक प्रबंधन में बड़े बदलावों को लेकर सुर्खियों में है। हाल ही में, ‘राष्ट्र संवाद’ द्वारा प्रकाशित एक खबर के गंभीर प्रभाव के बाद यूसीआईएल में फेरबदल का एक व्यापक अभियान शुरू हो गया है। यह कदम लंबे समय से एक ही पद पर जमे अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों और लगातार मिल रही शिकायतों का सीधा परिणाम है। कंपनी के भीतर पारदर्शिता और दक्षता लाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है, जिसका असर दूरगामी हो सकता है। यह यूसीआईएल में फेरबदल न केवल कंपनी के संचालन को सुव्यवस्थित करेगा बल्कि कर्मचारियों के मनोबल और जवाबदेही को भी बढ़ाएगा।
UCIL जैसी बड़ी सार्वजनिक क्षेत्र की इकाई में, एक स्वस्थ और गतिशील कार्य संस्कृति को बनाए रखने के लिए समय-समय पर रोटेशन पॉलिसी का पालन करना आवश्यक होता है। यह नीति अधिकारियों को विभिन्न विभागों और भूमिकाओं में अनुभव प्राप्त करने में मदद करती है, जिससे उनकी बहुमुखी प्रतिभा बढ़ती है और भ्रष्टाचार की संभावना कम होती है। हालांकि, ‘राष्ट्र संवाद’ की पड़ताल में सामने आया कि यूसीआईएल में इस महत्वपूर्ण नीति की अनदेखी की जा रही थी। अधिकारियों का दशकों तक एक ही कुर्सी पर जमे रहना न केवल कार्यप्रणाली को प्रभावित कर रहा था, बल्कि नए विचारों और ऊर्जा के प्रवाह को भी बाधित कर रहा था।
‘राष्ट्र संवाद’ द्वारा यूसीआईएल की रोटेशन पॉलिसी पर सवाल उठाए जाने के बाद प्रबंधन हरकत में आ गया है। लगातार मिल रही शिकायतों और खबर प्रकाशित होने के बाद यूसीआईएल सीएमडी ने लेखा विभाग सहित कई विभागों में बड़े फेरबदल के आदेश जारी कर दिए हैं।

किसका हुआ तबादला: ताजा यूसीआईएल में फेरबदल
इस शुरुआती चरण में हुए यूसीआईएल में फेरबदल में कई प्रमुख अधिकारियों को उनके पदों से हटाया गया है या उनके विभाग बदले गए हैं:
- लेखा विभाग में उलटफेर: उप प्रबंधक वर्क्स अकाउंट अरविंद कुमार सैनी को हटाकर केस सेक्शन भेजा गया। उनकी जगह विवेक पांडे को केस सेक्शन से लाकर वर्क्स अकाउंट की जिम्मेदारी दी गई है। यह बदलाव वित्तीय प्रबंधन में नई ऊर्जा और पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से किया गया है। लेखा विभाग किसी भी संगठन की रीढ़ होता है, और इसमें ऐसे परिवर्तन सुनिश्चित करते हैं कि वित्तीय प्रक्रियाएं सुचारू और जवाबदेह तरीके से चलें।
- मैकेनिकल विभाग में बदलाव: मुख्य अधीक्षक मिल मैकेनिक अभिजीत कुमार का जादूगोड़ा से बागजाता माइंस तबादला कर दिया गया। उनके स्थान पर कौस्तुभ सेन को जादूगोड़ा लाया जा रहा है। मैकेनिकल विभाग खनन कार्यों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, और इस बदलाव से उपकरणों के रखरखाव और परिचालन दक्षता में सुधार की उम्मीद है। यह तबादला इस बात का भी संकेत है कि प्रबंधन केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि तकनीकी विभागों में भी बदलाव लाने को प्रतिबद्ध है।
क्यों हुई कार्रवाई: रोटेशन पॉलिसी के उल्लंघन और शिकायतों का संज्ञान
‘राष्ट्र संवाद’ ने यूसीआईएल में 18-20 साल से एक ही कुर्सी पर जमे अधिकारियों को लेकर रोटेशन पॉलिसी पर सवाल खड़े किए थे। साथ ही लेखा विभाग की कार्यशैली को लेकर सीएमडी को लगातार शिकायतें मिल रही थीं। खबर का संज्ञान लेते हुए सीएमडी ने तत्काल प्रभाव से कार्रवाई की है। ये शिकायतें अक्सर कार्य में देरी, निर्णय लेने में पक्षपात, और प्रक्रियाओं में अपारदर्शिता से संबंधित होती थीं। ऐसे में, इन अधिकारियों का स्थानांतरण न केवल एक सुधारात्मक कदम है बल्कि यह भी संदेश देता है कि कंपनी में अब लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अब भी कई निशाने पर: आगे और यूसीआईएल में फेरबदल की संभावना
सूत्रों के मुताबिक, यह सिर्फ शुरुआत है। परचेज डिपार्टमेंट के परवीन पाल, भाटिन माइंस के एसके सिंह और यूसीआईएल मिल के राजेश यादव समेत कई ऐसे अधिकारी हैं जो 18-20 साल से एक ही जगह पर हैं। इन पर अभी तक तबादले की गाज नहीं गिरी है। प्रबंधन के अगले कदम पर सबकी नजरें टिकी हैं। यह दर्शाता है कि प्रबंधन एक चरणबद्ध तरीके से कार्रवाई कर रहा है, और आने वाले दिनों में और भी बड़े फेरबदल की उम्मीद है। इन अधिकारियों की लंबे समय से एक ही पद पर उपस्थिति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं, और उम्मीद है कि प्रबंधन जल्द ही इन मामलों पर भी ध्यान देगा।
खबर का असर: प्रबंधन ने मानी खामियां, सुधार का संकल्प
‘राष्ट्र संवाद’ द्वारा मुद्दा उठाए जाने के बाद यूसीआईएल प्रबंधन ने माना कि रोटेशन पॉलिसी का पालन नहीं हो रहा था। यह एक महत्वपूर्ण स्वीकारोक्ति है, जो मीडिया की शक्ति और जवाबदेही को रेखांकित करती है। अब चरणबद्ध तरीके से सभी विभागों में फेरबदल की तैयारी है। प्रबंधन की इस स्वीकारोक्ति से कंपनी के कर्मचारियों और बाहरी हितधारकों में विश्वास बहाल होने की उम्मीद है, क्योंकि यह दिखाता है कि शिकायतें सुनी जा रही हैं और उन पर कार्रवाई हो रही है। यह दीर्घकालिक संगठनात्मक स्वास्थ्य के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (UCIL) के बारे में अधिक जानकारी के लिए, आप उनकी आधिकारिक वेबसाइट ucil.gov.in पर जा सकते हैं, या विकिपीडिया पर यूसीआईएल के बारे में पढ़ सकते हैं।
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यह यूसीआईएल में फेरबदल का अभियान न केवल कंपनी के भीतर एक नई कार्यसंस्कृति को बढ़ावा देगा, बल्कि यह भी संकेत देता है कि मीडिया की निगरानी और जनहित में उठाई गई आवाज का गहरा प्रभाव हो सकता है। आने वाले समय में देखना होगा कि प्रबंधन अन्य विभागों में कब और कैसे बदलाव करता है, और क्या ये कदम यूसीआईएल की समग्र दक्षता और पारदर्शिता में अपेक्षित सुधार लाते हैं। कर्मचारियों और हितधारकों की नजरें अब प्रबंधन के अगले कदमों पर टिकी हैं, क्योंकि यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि रोटेशन पॉलिसी का सख्ती से पालन हो और किसी भी अधिकारी को एक ही पद पर अनावश्यक रूप से लंबे समय तक न रखा जाए, जिससे कार्यप्रणाली में गतिरोध पैदा न हो।

