सिदगोड़ा थाना प्रभारी की कार्यशैली पर फिर उठे सवाल, गरीब कारीगर को जेल भेजने का आरोप
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जमशेदपुर के सिदगोड़ा थाना की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। बारीडीह बस्ती निवासी राजकुमार प्रसाद वर्मा और उनके परिवार ने थाना प्रभारी पर गंभीर आरोप लगाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। परिवार का आरोप है कि एक चोरी के मामले में वास्तविक दोषियों को बचाकर गरीब कारीगर को फंसाया गया और पैसे के लेनदेन के बाद उसे जेल भेज दिया गया।
परिजनों के अनुसार, राजकुमार प्रसाद वर्मा साकची स्थित महालक्ष्मी ज्वेलर्स में कारीगर के रूप में कार्यरत थे। दुकान के मालिक संतोष वर्मा बताए जा रहे हैं। आरोप है कि भुइयाडीह निवासी आदित्य वर्मा को पुलिस ने चोरी के मामले में उठाया था। इसके बाद 13 अप्रैल को संतोष वर्मा आदित्य वर्मा को लेकर दुकान पहुंचे, जहां से पुलिस दोनों को थाना ले गई। परिवार का आरोप है कि बाद में कथित साठगांठ और पैसे के लेनदेन के बाद संतोष वर्मा को छोड़ दिया गया तथा दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरे भी बदल दिए गए।
आरोप है कि इसके बाद पुलिस ने राजकुमार प्रसाद वर्मा को लगातार परेशान करना शुरू कर दिया। परिवार का कहना है कि 21 अप्रैल को थाना प्रभारी द्वारा एक लाख रुपये लिए गए और भरोसा दिलाया गया कि उन्हें कुछ नहीं होगा। 24 अप्रैल को राजकुमार को थाना बुलाया गया और 24 घंटे के भीतर छोड़ भी दिया गया।
परिवार का आरोप है कि राजकुमार प्रसाद वर्मा एक गरीब कारीगर हैं, जो महज ₹5000 मासिक वेतन पर काम कर अपने चार छोटे बच्चों का पालन-पोषण करते थे। इसके बावजूद 23 मई 2026 को पुलिस ने उन्हें दोबारा उठाया और 24 मई को बिना पर्याप्त सबूत के जेल भेज दिया।
परिजनों ने आरोप लगाया है कि चोरी के मामले में कथित रूप से जुड़े संतोष वर्मा को पुलिस ने मोटी रकम लेकर निर्दोष साबित कर दिया, जबकि गरीब कारीगर को बलि का बकरा बनाया गया। मामले को लेकर परिवार में भारी आक्रोश और भय का माहौल है।
न्याय की मांग को लेकर राजकुमार प्रसाद वर्मा की पत्नी और परिवार के सदस्य अब Hemant Soren, जिला के वरीय पुलिस अधीक्षक, पुलिस अधीक्षक तथा राज्य के डीजीपी से निष्पक्ष जांच और परिवार की सुरक्षा की गुहार लगा रहे हैं।

