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    Home » सिस्टर सरिता को मिला सर्वश्रेष्ठ प्राचार्या सम्मान: PSACWA का 15वां स्थापना दिवस
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    सिस्टर सरिता को मिला सर्वश्रेष्ठ प्राचार्या सम्मान: PSACWA का 15वां स्थापना दिवस

    Nikunj GuptaBy Nikunj GuptaMay 17, 2026No Comments5 Mins Read
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    सर्वश्रेष्ठ प्राचार्या सम्मान
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    पटना, 17 मई 2026। प्राइवेट स्कूल्स एंड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन (PSACWA) के 15वें स्थापना दिवस के अवसर पर, सेंट जोसफ कॉन्वेंट मेरीवार्ड की प्राचार्या सिस्टर सरिता सी.जे. को वर्ष 2025-26 के लिए प्रतिष्ठित सर्वश्रेष्ठ प्राचार्या सम्मान से नवाजा गया। यह भव्य समारोह पटना के ऐतिहासिक रवीन्द्र भवन में आयोजित किया गया, जहाँ शिक्षा जगत की महत्वपूर्ण हस्तियों और हजारों निजी विद्यालयों के प्रतिनिधियों ने शिरकत की। यह सम्मान सिस्टर सरिता के शिक्षा के क्षेत्र में असाधारण योगदान और नेतृत्व क्षमता को दर्शाता है, जो उन्हें बिहार के शैक्षणिक परिदृश्य में एक प्रेरणास्रोत बनाता है।

    कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रीय अध्यक्ष सैयद शमायल अहमद ने की। समारोह का उद्घाटन बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी, सिक्किम एवं मेघालय के पूर्व राज्यपाल गंगा प्रसाद, मुख्य सचेतक संजीव चौरसिया तथा अन्य कई प्रतिष्ठित शिक्षाविदों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर मौजूद सभी गणमान्य व्यक्तियों ने निजी विद्यालयों के महत्व और उनके द्वारा समाज में निभाई जा रही भूमिका पर प्रकाश डाला, साथ ही शिक्षा के क्षेत्र में निजी और सरकारी क्षेत्र के बीच समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया।

    शिक्षा में योगदान: सिस्टर सरिता और सर्वश्रेष्ठ प्राचार्या सम्मान

    सिस्टर सरिता सी.जे., जो सेंट जोसफ कॉन्वेंट मेरीवार्ड की प्राचार्या हैं, को उनके उत्कृष्ट शैक्षणिक नेतृत्व और छात्रों के सर्वांगीण विकास में उनके योगदान के लिए यह विशेष प्राचार्या सम्मान प्रदान किया गया। यह पुरस्कार उनके स्कूल में नवाचार, अनुशासन और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देने के प्रयासों की पहचान है। शिक्षा के क्षेत्र में उनके दशकों के अनुभव और अथक प्रयासों ने न केवल उनके संस्थान को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया है, बल्कि अनगिनत छात्रों के जीवन को भी सकारात्मक रूप से प्रभावित किया है। सिस्टर सरिता का यह सम्मान अन्य प्राचार्याओं और शिक्षकों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है, जो उन्हें शिक्षा के मानकों को बनाए रखने और सुधारने के लिए प्रेरित करेगा।

    इस सम्मान समारोह में केवल प्राचार्याओं को ही नहीं, बल्कि दसवीं और बारहवीं के मेधावी छात्रों को भी सम्मानित किया गया। उन्हें मेडल, प्रमाणपत्र और नकद पुरस्कार प्रदान किए गए, ताकि उनकी शैक्षणिक उत्कृष्टता को सराहा जा सके और उन्हें भविष्य में और बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित किया जा सके। यह प्रोत्साहन छात्रों के लिए मील का पत्थर साबित होता है, उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है और शिक्षा के महत्व को समाज में स्थापित करता है।

    निजी विद्यालयों की भूमिका और सरकार का आश्वासन

    कार्यक्रम में बिहार के सभी 38 जिलों से आए लगभग 3000 निजी विद्यालयों के निदेशक एवं प्राचार्य सम्मानित किए गए। यह एक महत्वपूर्ण कदम है जो निजी शिक्षा क्षेत्र के व्यापक योगदान को स्वीकार करता है। भारत में शिक्षा के क्षेत्र में निजी स्कूल एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, विशेषकर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच प्रदान करने में और नए शैक्षणिक नवाचारों को बढ़ावा देने में। निजी क्षेत्र के इस योगदान को मान्यता देना राज्य के शिक्षा प्रणाली के लिए आवश्यक है। भारत में शिक्षा के बारे में अधिक जानें।

    शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने अपने संबोधन में निजी विद्यालयों की भूमिका की सराहना की। उन्होंने स्वीकार किया कि निजी स्कूल शिक्षा प्रणाली का एक अभिन्न अंग हैं और वे सरकारी स्कूलों के साथ मिलकर राज्य में शिक्षा के स्तर को ऊपर उठाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। मंत्री महोदय ने निजी विद्यालयों द्वारा सामना की जाने वाली समस्याओं को समझने और उनके समाधान के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने विशेष रूप से "सिंगल विंडो व्यवस्था" लागू करने का आश्वासन दिया, जिससे प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाया जा सके और विद्यालयों को गैर-शैक्षणिक बाधाओं से मुक्ति मिल सके। यह कदम विद्यालयों को अपना ध्यान पूरी तरह से छात्रों की शिक्षा पर केंद्रित करने में मदद करेगा और उनकी परिचालन दक्षता को बढ़ाएगा।

    PSACWA की मांगें और 15 वर्षों की यात्रा

    राष्ट्रीय अध्यक्ष सैयद शमायल अहमद ने इस अवसर का उपयोग करते हुए निजी विद्यालयों से संबंधित कई महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाया। उन्होंने सरकार से निजी विद्यालयों को QR कोड उपलब्ध कराने, लंबित RTE (शिक्षा का अधिकार) राशि जारी करने और एक ‘ज्ञानदीप पोर्टल’ खोलने की मांग की। QR कोड से विद्यालयों की पहचान और प्रमाणीकरण में सुविधा होगी और पारदर्शिता बढ़ेगी, जबकि RTE के तहत लंबित शुल्क जारी करना कई विद्यालयों के लिए वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करेगा, जिससे वे गरीब छात्रों को बेहतर शिक्षा प्रदान कर सकेंगे। ‘ज्ञानदीप पोर्टल’ शिक्षा से संबंधित जानकारी, संसाधनों और अपडेट्स के लिए एक केंद्रीय मंच के रूप में कार्य कर सकता है, जिससे सभी हितधारकों को लाभ होगा।

    सैयद शमायल अहमद ने एसोसिएशन की 15 वर्षों की गौरवपूर्ण यात्रा का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इस अवधि में एसोसिएशन ने डेढ़ लाख शिक्षकों और डेढ़ लाख छात्रों को सम्मानित किया है। यह आंकड़ा PSACWA की शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता और शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों को पहचानने के उसके निरंतर प्रयासों को दर्शाता है। यह एसोसिएशन बिहार में निजी शिक्षा क्षेत्र के विकास और उत्थान के लिए अथक रूप से कार्य कर रहा है, और भविष्य में भी इसी समर्पण के साथ काम करने का संकल्प लिया है।

    कार्यक्रम का संचालन राष्ट्रीय कार्यालय सचिव फौजिया खान ने अपनी दक्षता के साथ किया और अंत में धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। यह भव्य समारोह बिहार में शिक्षा के महत्व को रेखांकित करता है और निजी तथा सरकारी दोनों क्षेत्रों में शिक्षा को बढ़ावा देने की सामूहिक इच्छा को दर्शाता है। ऐसे आयोजनों से न केवल उत्कृष्ट कार्य को मान्यता मिलती है, बल्कि शिक्षा प्रणाली में सुधार के लिए संवाद और सहयोग के नए रास्ते भी खुलते हैं। शिक्षा के क्षेत्र में ऐसे और अधिक सम्मान और पहल के बारे में जानने के लिए, कृपया यहां क्लिक करें।

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