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    ‘मैं ब्रह्म हूं’ की साधना से मिलता है परम आनंद, अंधविश्वास से समाज को होता है नुकसान: सुनील आनंद

    dhiraj KumarBy dhiraj KumarMay 10, 2026No Comments2 Mins Read
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    ‘मैं ब्रह्म हूं’ की साधना से मिलता है परम आनंद, अंधविश्वास से समाज को होता है नुकसान: सुनील आनंद

    राष्ट्र संवाद संवाददाता

    जमशेदपुर। आनंद मार्ग प्रचारक संघ की ओर से गदरा क्षेत्र में आयोजित जागरूकता कार्यक्रमों में वक्ता सुनील आनंद ने कहा कि ‘मैं ब्रह्म हूं’ की साधना से मनुष्य परम आनंद का अनुभव कर सकता है और उसके भीतर आत्मबल तथा संकल्प शक्ति का विकास होता है। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति के मन पर तमोगुण का प्रभाव अधिक होता है, वही समाज को क्षति पहुंचाने का प्रयास करता है।

    उन्होंने कहा कि परमात्मा कोई कामना की वस्तु नहीं, बल्कि कल्याणमय सत्ता हैं, जो प्रत्येक मनुष्य के हृदय में विराजमान हैं। आध्यात्मिक योग साधना, भजन और कीर्तन के माध्यम से मनुष्य उन्हें जान सकता है तथा जीवन की समस्याओं से संघर्ष करने की शक्ति प्राप्त कर सकता है।

    सुनील आनंद ने बलि प्रथा, डायन प्रथा, ओझा-गुणी और तंत्र-मंत्र से जुड़े अंधविश्वासों को समाज के लिए घातक बताते हुए कहा कि तंत्र-मंत्र से किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया जा सकता। उन्होंने लोगों से बीमार होने पर झाड़-फूंक के बजाय अस्पताल में इलाज कराने और वैज्ञानिक, व्यावहारिक तथा आध्यात्मिक दृष्टिकोण अपनाने की अपील की।

    उन्होंने कहा कि देवी-देवताओं के नाम पर पशु बलि देना महापाप है और डायन जैसी कोई वास्तविकता नहीं है, बल्कि यह सामाजिक अंधविश्वास है। समाज को इन कुप्रथाओं से मुक्त करने के लिए शिक्षा और जागरूकता अत्यंत आवश्यक है।

    ‘मैं ब्रह्म हूं’ की साधना से मिलता है परम आनंद अंधविश्वास से समाज को होता है नुकसान: सुनील आनंद
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