फीचर रिपोर्ट | टेक्नोलॉजी और रोजगार
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI अब सिर्फ चैट, कंटेंट या तस्वीरें बनाने तक सीमित नहीं रह गया है. यह तेजी से ऐसे पेशेवर कामों में भी अपनी क्षमता दिखा रहा है, जिन्हें लंबे समय तक पूरी तरह इंसानी विशेषज्ञता का क्षेत्र माना जाता रहा है. अकाउंटिंग भी अब इसी बदलाव के केंद्र में दिखाई दे रही है. एक नई स्टडी में AI मॉडल्स ने कुछ खास अकाउंटिंग टास्क में अनुभवी मानव अकाउंटेंट्स से कहीं बेहतर प्रदर्शन किया है. इससे एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है—क्या आने वाले समय में AI अकाउंटेंट्स की नौकरियां छीन लेगा या अकाउंटिंग का पूरा काम करने का तरीका बदल जाएगा?
Mercor की एक नई स्टडी ने इस बहस को और तेज कर दिया है. ‘Human Baselines for Benchmarks: AI Now Outperforms Junior Accountants’ नाम से किए गए अध्ययन में 12 मानव अकाउंटेंट्स और अलग-अलग AI मॉडल्स के प्रदर्शन की तुलना की गई. इसमें शामिल सभी मानव प्रतिभागी लाइसेंस प्राप्त Certified Public Accountants (CPAs) थे और उनके पास औसतन 5.5 साल का अकाउंटिंग अनुभव था.
इंसानों के सामने AI ने किया चौंकाने वाला प्रदर्शन
अध्ययन में अकाउंटेंट्स को वास्तविक कंपनियों के रिकॉर्ड पर आधारित महीने के अंत से जुड़े चार अकाउंटिंग परिदृश्य दिए गए. उन्हें दस्तावेजों में से जरूरी जानकारी ढूंढनी थी, सही आंकड़े पहचानने थे, गणना करनी थी और अंतिम परिणाम को एक निर्धारित टेबल में व्यवस्थित करना था.
मानव अकाउंटेंट्स की औसत सटीकता केवल 37 प्रतिशत रही. हालांकि व्यक्तिगत प्रदर्शन में काफी अंतर दिखाई दिया. कुछ प्रतिभागियों का स्कोर शून्य तक रहा, जबकि कुछ करीब 90 प्रतिशत तक पहुंचे. इन कार्यों को पूरा करने में अधिकांश मानव प्रतिभागियों को 30 से 180 मिनट तक का समय लगा.
इसके विपरीत, स्टडी में Claude Opus 5 ने 20 प्रयासों में 100 प्रतिशत सटीकता हासिल की. खास बात यह रही कि AI मॉडल ने हर कार्य को 10 मिनट से भी कम समय में पूरा किया.
यानी जिस काम में इंसानी विशेषज्ञों को आधे घंटे से लेकर तीन घंटे तक लग रहे थे, उसी तरह के निर्धारित कार्य को AI ने कुछ ही मिनटों में पूरा कर दिया. यही अंतर इस अध्ययन को खास बनाता है और अकाउंटिंग पेशे के भविष्य को लेकर चर्चा तेज करता है.
सिर्फ सटीकता नहीं लागत में भी बड़ा अंतर
AI की बढ़त सिर्फ गति और सटीकता तक सीमित नहीं है. अध्ययन में इस काम की लागत की तुलना भी की गई. अमेरिकी अकाउंटेंट्स के औसत वेतन के आधार पर शोधकर्ताओं ने अनुमान लगाया कि एक मानव अकाउंटेंट को एक बेंचमार्क कार्य पूरा करने में औसतन करीब 10.35 डॉलर की लागत आती है.
वहीं उसी कार्य को Claude Opus 5 से कराने की अनुमानित लागत सिर्फ 0.21 डॉलर रही.
इस अंतर का मतलब यह है कि यदि इसी तरह के दोहराए जाने वाले और स्पष्ट नियमों वाले अकाउंटिंग कार्य बड़े पैमाने पर AI से कराए जाने लगें, तो कंपनियों के लिए लागत और समय दोनों में भारी कमी आ सकती है. यही वह पहलू है जो AI को केवल एक तकनीकी प्रयोग से आगे ले जाकर रोजगार और कारोबारी रणनीति का महत्वपूर्ण मुद्दा बनाता है.
18 महीने में बदली AI की तस्वीर
इस अध्ययन की सबसे महत्वपूर्ण बात शायद AI की तेजी से बढ़ती क्षमता है. शोधकर्ताओं के अनुसार करीब 18 महीने पहले तक सबसे बेहतर AI मॉडल भी इस परीक्षण में मानव अकाउंटेंट्स के 37 प्रतिशत औसत प्रदर्शन को पार नहीं कर पा रहे थे.
इसके बाद OpenAI के o3 मॉडल ने मानव औसत को पीछे छोड़ा. GPT-5 ने लगभग 69 प्रतिशत तक प्रदर्शन किया और अब कुछ अत्याधुनिक मॉडल 100 प्रतिशत या उसके बेहद करीब पहुंच गए हैं.
यह बदलाव दिखाता है कि AI की क्षमताएं स्थिर नहीं हैं. जिस काम में आज AI केवल सहायक की भूमिका निभा रहा है, संभव है कि कुछ समय बाद उसी काम को वह अधिक तेज और सटीक तरीके से करने लगे.
क्या अब अकाउंटेंट्स की नौकरी खतरे में है?
यहीं इस पूरी कहानी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा सामने आता है. स्टडी के नतीजों को सीधे यह निष्कर्ष निकालने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता कि AI जल्द ही अकाउंटेंट्स की पूरी नौकरियां खत्म कर देगा.
Mercor ने खुद इस तरह के निष्कर्ष से सावधान रहने को कहा है. अध्ययन में ऐसे कार्यों को चुना गया था जो AI मॉडल्स की क्षमताओं के अनुकूल हैं. इनमें स्पष्ट निर्देशों का पालन करना, बड़ी मात्रा में दस्तावेजों से जानकारी निकालना, आंकड़ों की गणना करना और निर्धारित अकाउंटिंग मानकों के अनुसार परिणाम तैयार करना शामिल था.
लेकिन वास्तविक दुनिया में अकाउंटेंट का काम केवल आंकड़े जोड़ने और दस्तावेज पढ़ने तक सीमित नहीं होता.
अकाउंटिंग सिर्फ कैलकुलेशन का काम नहीं
एक वास्तविक अकाउंटेंट को क्लाइंट से बातचीत करनी होती है. कई बार ग्राहक खुद यह स्पष्ट नहीं कर पाता कि उसकी समस्या क्या है. ऐसे में अकाउंटेंट को सही सवाल पूछकर समस्या की जड़ तक पहुंचना होता है.
कई मामलों में टैक्स, वित्तीय योजना, कारोबारी निर्णय और कानूनी या नियामकीय परिस्थितियों को समझना भी जरूरी होता है. इसके अलावा टीम के साथ काम करना, प्रबंधन को सलाह देना, असामान्य परिस्थितियों में निर्णय लेना और अनुभव के आधार पर किसी वित्तीय स्थिति की व्याख्या करना भी पेशे का हिस्सा है.
इन मानवीय क्षमताओं की इस अध्ययन में परीक्षा नहीं हुई. इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि AI ने अकाउंटेंट को पूरी तरह पछाड़ दिया है.
खतरा नौकरी से ज्यादा काम के पुराने तरीके पर
फिर भी इस अध्ययन को नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा. इसका सबसे बड़ा संकेत यह है कि अकाउंटिंग के संरचित और दोहराए जाने वाले कार्य तेजी से AI की पहुंच में आ रहे हैं.
डेटा एंट्री, दस्तावेजों से आंकड़े निकालना, नियमित मिलान, रिपोर्ट तैयार करना और तय नियमों के आधार पर गणना जैसे काम भविष्य में अधिक स्वचालित हो सकते हैं. इसका अर्थ यह नहीं कि अकाउंटेंट गायब हो जाएंगे, बल्कि उनकी भूमिका बदल सकती है.
एक ऐसा अकाउंटेंट जो केवल नियमित गणना और डेटा प्रोसेसिंग पर निर्भर है, उसके सामने चुनौती अधिक हो सकती है. इसके विपरीत वित्तीय विश्लेषण, रणनीतिक सलाह, क्लाइंट मैनेजमेंट, जोखिम मूल्यांकन और निर्णय लेने की क्षमता रखने वाले पेशेवरों की भूमिका और महत्वपूर्ण हो सकती है.
AI अकाउंटेंट का विकल्प या नया सहकर्मी?
भविष्य की तस्वीर शायद ‘AI बनाम अकाउंटेंट’ की जगह ‘AI के साथ अकाउंटेंट’ की हो सकती है.
AI यदि घंटों लगने वाले नियमित काम को कुछ मिनटों में पूरा कर देता है, तो अकाउंटेंट अपना समय अधिक जटिल और महत्वपूर्ण कार्यों में लगा सकता है. इससे उत्पादकता बढ़ सकती है और एक अकाउंटेंट पहले की तुलना में ज्यादा क्लाइंट या ज्यादा डेटा संभाल सकता है.
लेकिन इसके साथ एक नई जिम्मेदारी भी आएगी—AI द्वारा दिए गए परिणामों की जांच. 100 प्रतिशत सटीकता का प्रदर्शन किसी एक नियंत्रित परीक्षण में प्रभावशाली है, लेकिन वास्तविक दुनिया के वित्तीय मामलों में गलत डेटा, अधूरे दस्तावेज, अस्पष्ट निर्देश या असामान्य परिस्थितियां परिणाम बदल सकती हैं.
इसलिए अंतिम जिम्मेदारी लेने वाले इंसानी विशेषज्ञ की जरूरत बनी रह सकती है.
आने वाले समय में बदलेगा अकाउंटिंग का कौशल सेट
AI के बढ़ते प्रभाव के साथ अकाउंटेंट बनने के लिए केवल पारंपरिक अकाउंटिंग ज्ञान पर्याप्त नहीं हो सकता. भविष्य के पेशेवरों को AI टूल्स के इस्तेमाल, डेटा विश्लेषण, ऑटोमेशन और डिजिटल सिस्टम की समझ भी विकसित करनी होगी.
इसके साथ क्लाइंट से संवाद, समस्या समाधान, आलोचनात्मक सोच और व्यावसायिक निर्णय जैसी क्षमताएं पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो सकती हैं.
दरअसल Mercor की स्टडी को अकाउंटेंट्स के लिए सिर्फ खतरे की घंटी के रूप में देखने के बजाय बदलाव के संकेत के तौर पर भी देखा जा सकता है. AI उन कामों को अपने हाथ में ले सकता है जो नियम आधारित और दोहराए जाने वाले हैं, जबकि इंसानों के लिए अधिक जटिल और निर्णय आधारित काम बच सकते हैं.
असली सवाल नौकरी खत्म होने का नहीं बदलाव की रफ्तार का
AI के तेजी से आगे बढ़ने के बीच सबसे बड़ा सवाल शायद यह नहीं है कि AI अकाउंटेंट की नौकरी लेगा या नहीं, बल्कि यह है कि अकाउंटेंट का काम कितनी तेजी से बदलने वाला है.
जिस तकनीक ने कुछ समय पहले तक मानव विशेषज्ञों के प्रदर्शन को चुनौती देने में संघर्ष किया था, वही अब एक नियंत्रित अकाउंटिंग परीक्षण में 100 प्रतिशत सटीकता तक पहुंच गई है. यह बदलाव कंपनियों के लिए अवसर है, लेकिन पेशेवरों के लिए खुद को नए कौशल से लैस करने की चेतावनी भी.
आने वाले वर्षों में अकाउंटिंग की दुनिया में इंसान और मशीन के बीच सीधी प्रतिस्पर्धा से ज्यादा सहयोग और भूमिका के पुनर्वितरण की तस्वीर दिखाई दे सकती है. AI आंकड़ों को तेजी से संभालेगा, लेकिन उन आंकड़ों का अर्थ क्या है, उनका कारोबारी असर क्या होगा और किसी महत्वपूर्ण निर्णय की जिम्मेदारी कौन लेगा—इन सवालों का जवाब अभी भी इंसानी विशेषज्ञता के पास ही है.
इसलिए फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि AI ने अकाउंटेंट की नौकरी खत्म कर दी है. लेकिन इतना जरूर कहा जा सकता है कि AI ने अकाउंटिंग पेशे को बदलने की दौड़ शुरू कर दी है—और इस दौड़ में वही पेशेवर आगे रहेंगे जो AI से डरने के बजाय उसे अपने काम का हिस्सा बनाना सीखेंगे.

