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    Home » बंगाल में पहली भाजपा सरकार: शुभेंदु अधिकारी मंत्रिमंडल | राष्ट्र संवाद
    Headlines पश्चिम बंगाल राजनीति राष्ट्रीय

    बंगाल में पहली भाजपा सरकार: शुभेंदु अधिकारी मंत्रिमंडल | राष्ट्र संवाद

    Devanand SinghBy Devanand SinghMay 10, 2026No Comments6 Mins Read
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    शुभेंदु अधिकारी
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    शुभेंदु मंत्रिमंडल में बंगाल के हर इलाके और समुदाय की झलक

    कोलकाता, नौ मई (भाषा) पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और पांच मंत्रियों ने शनिवार को ब्रिगेड परेड ग्राउंड में शपथ ली जहां पहली बार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार बनी है। राज्य के उत्तरी और दक्षिणी क्षेत्रों के प्रतिनिधियों को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है, लेकिन कोलकाता से किसी को भी शामिल नहीं किया गया है।

    पश्चिम बंगाल की विविधतापूर्ण जातीय संरचना को दर्शाते हुए, मंत्रिमंडल में मतुआ और संथाल सहित विभिन्न समुदायों का प्रतिनिधित्व है।

    अधिकारी की मंत्रिपरिषद के जिन पांच सदस्यों ने शपथ ली, उनके बारे में संक्षिप्त जानकारी इस प्रकार है:

    दिलीप घोष: यदि वर्ष 2026 के विधानसभा चुनावों ने भवानीपुर में ममता बनर्जी को हराकर ‘चुनावी उलटफेर के नायक’ बने शुभेंदु अधिकारी को राजनीति के केंद्र में ला खड़ा किया, तो इन चुनावों ने भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई के पूर्व अध्यक्ष दिलीप घोष की भी उल्लेखनीय वापसी की पटकथा लिखी, जिससे राज्य की राजनीति में उनकी अधिक संतुलित दूसरी पारी की भूमिका मजबूत हुई।

    बंगाल में पार्टी के सबसे जाने-माने और जुझारू चेहरों में से एक, घोष ने भाजपा को एक हाशिए की पार्टी से तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख प्रतिद्वंद्वी के रूप में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    अपने तीखे और अक्सर विवादास्पद बयानों और जमीनी स्तर की राजनीति के लिए मशहूर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के पूर्व प्रचारक घोष ने 2015 से 2021 के बीच राज्य में भाजपा के संगठनात्मक विस्तार की देखरेख की।

    पार्टी को 2019 के लोकसभा चुनाव में बड़ी सफलता मिली, जब उसने बंगाल की 42 में से 18 सीट जीत लीं। यह एक अभूतपूर्व प्रदर्शन था जिसने राज्य के राजनीतिक परिदृश्य को बदल दिया। घोष मेदिनीपुर से सांसद चुने गए, जिससे राजनीतिक रूप से संवेदनशील जंगलमहल क्षेत्र में उनका प्रभाव और मजबूत हो गया।

    हालांकि इसके बाद के वर्षों में, कभी प्रभावशाली रहे यह नेता पार्टी के भीतर एक अजीब राजनीतिक अनिश्चितता में खोते दिखाई दिए, क्योंकि बंगाल भाजपा के आंतरिक समीकरण बदलने लगे थे।

    वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद राज्य नेतृत्व के कुछ वर्गों के साथ मतभेद और भी तीव्र हो गए, जब घोष ने अपने उत्तराधिकारी सुकांत मजूमदार के नेतृत्व में लिये गए संगठनात्मक निर्णयों की सार्वजनिक रूप से आलोचना की।

    मेदिनीपुर स्थित अपने गढ़ से बर्धमान-दुर्गापुर स्थानांतरित होने के बाद, वह सीट हार गए और पार्टी के भीतर “आपसी कलह” और इसके लिए दोषपूर्ण चुनाव प्रचार प्रबंधन को खुले तौर पर दोषी ठहराया। उनके इन बयानों ने प्रदेश इकाई में गुटीय तनाव को उजागर कर दिया।

    तनाव तब और भी स्पष्ट हो गया जब घोष अपनी नवविवाहित पत्नी के साथ दीघा में जगन्नाथ मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल हुए, जहां उन्हें तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से संक्षिप्त बातचीत करते देखा गया। इस कार्यक्रम का बंगाल भाजपा ने आधिकारिक तौर पर बहिष्कार किया था। इस घटना की प्रदेश नेतृत्व के कुछ वर्गों ने आलोचना की।

    फिर भी, इन तनावों को दरकिनार करते हुए, घोष भाजपा की राजनीतिक रणनीति में फिर से उभरे। उनके संगठनात्मक अनुभव और जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं से गहरे जुड़ाव को एक बार फिर मूल्यवान परिसंपत्ति के रूप में देखा गया, क्योंकि पार्टी ने 2026 के विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू कर दी थी, जिसे अंततः भाजपा ने शानदार ढंग से जीता।

    घोष ने खड़गपुर सदर सीट से जीत हासिल की, जहां से उन्होंने कभी चुनावी राजनीति का अपना सफर शुरू किया था। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के मौजूदा विधायक प्रदीप सरकार को करारी शिकस्त दी।

    अग्निमित्रा पॉल: फैशन डिजाइनर से राज्य की नेता बनीं पॉल, भाजपा की बंगाल इकाई के सबसे प्रमुख चेहरों में से एक बनकर उभरीं। विपक्ष की राजनीति में उनकी मुखर भूमिका और विधानसभा में सक्रिय उपस्थिति उनकी पहचान है।

    राज्य के कोयला खनन क्षेत्र, आसनसोल दक्षिण सीट से विधायक पॉल ने 2021 में तृणमूल कांग्रेस की सायनी घोष (जो अब लोकसभा सांसद हैं) को हराकर पहली बार यह सीट जीती और इस बार भी इसे बरकरार रखा।

    वह मार्च 2019 में भाजपा में शामिल हुई थीं। उन्होंने प्रदेश भाजपा महिला मोर्चा अध्यक्ष, पार्टी की बंगाल इकाई की महासचिव जैसे पदों पर कार्य किया और वर्तमान में उपाध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं।

    पॉल ने 2022 का आसनसोल लोकसभा उपचुनाव लड़ा और तृणमूल के शत्रुघ्न सिन्हा से हार गईं। 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने मेदिनीपुर सीट से फिर से चुनाव लड़ा, लेकिन तृणमूल की जून मालिया से हार गईं।

    भाजपा में शामिल होने के बाद से, पॉल लगातार तृणमूल कांग्रेस सरकार के शासन और जवाबदेही से जुड़े मुद्दों को उठाती रही हैं और कथित भ्रष्टाचार, विपक्षी समर्थकों के खिलाफ हिंसा, घुसपैठ और तुष्टीकरण के खिलाफ सदन में विरोध करती रही हैं।

    राजनीति में आने से पहले, पॉल ने फैशन डिजाइनर और उद्यमी के रूप में अपना करियर बनाया।

    निशिथ प्रमाणिक: तृणमूल कांग्रेस के पूर्व युवा नेता प्रमाणिक को 2018 में बंगाल के पंचायत चुनाव के बाद पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था और वह भाजपा में शामिल हो गए। प्रमाणिक ने 2019 के आम चुनाव में अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी परेश अधिकारी को हराया।

    दो साल बाद, 35 वर्ष की आयु में, मंत्रिमंडल में फेरबदल के बाद वे नरेन्द्र मोदी की मंत्रिपरिषद के सबसे युवा सदस्य बने, जहां उन्होंने 2021 से 2024 तक गृह राज्य मंत्री और खेल एवं युवा मामलों के मंत्रालय के केंद्रीय मंत्री के रूप में कार्य किया।

    प्रमाणिक ने एक बूथ अध्यक्ष के रूप में शुरुआत की और तेजी से आगे बढ़ते हुए भाजपा के राज्य नेतृत्व तक पहुंचे। हालांकि, 2024 के आम चुनाव में उन्हें तब झटका लगा जब उत्तरी बंगाल के कूच बिहार से तृणमूल कांग्रेस के जगदीश बसुनिया ने उन्हें हरा दिया।

    प्रमाणिक 2026 में फिर से मैदान में उतरे और विजयी हुए। उन्होंने कूच बिहार की मथभंगा सीट पर तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार सब्लू बर्मन को हराकर जीत हासिल की।

    अशोक कीर्तनिया: बांग्लादेश की सीमा से लगे उत्तरी 24 परगना जिले के मतुआ समुदाय से भाजपा नेता कीर्तनिया ने अपनी बनगावं उत्तर सीट बरकरार रखी, जिसे उन्होंने पहली बार 2021 में तृणमूल के बिस्वजीत दास को हराकर जीता था।

    विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत मतदाताओं के नाम हटाये जाने के बाद, प्रवासी हिंदू नामशूद्र शरणार्थी समुदाय के बीच मताधिकार से वंचित होने की आशंका स्पष्ट थी, कीर्तनिया की इस जीत ने भाजपा विरोधी भावनाओं की अटकलों को शांत कर दिया।

    खुदिराम टुडू: संथाल आदिवासी समुदाय के प्रतिनिधि टुडू ने मध्य बंगाल के वन-आच्छादित ‘जंगल महल’ क्षेत्र में भाजपा की शानदार जीत में अहम योगदान दिया। उन्होंने बांकुड़ा जिले की रानीबांध विधानसभा सीट तृणमूल कांग्रेस से छीन ली और ममता बनर्जी की पार्टी की उम्मीदवार तनुश्री हांसदा को हराया।

    एक ऐसे समुदाय के लिए जो बंगाल में अपने सदस्यों के बीच संथाली भाषा के प्रसार के लिए प्रयासरत है, टुडू का अपनी मातृभाषा में शपथ लेना महत्वपूर्ण है।

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