रिपोर्ट – अमन ओझा (ब्यूरो चीफ, कोल्हान)
सरायकेला-खरसावां जिले के गम्हरिया थाना क्षेत्र स्थित ऊषा मोड़ में हुए कथित जानलेवा हमले का मामला अब नया मोड़ लेता जा रहा है। घटना के बाद थाना परिसर में हुए कथित हंगामे और आरोपियों के समर्थन में पहुंचे कुछ महिला समूहों की भूमिका को लेकर स्थानीय स्तर पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। जानकारी के अनुसार रवि मंडल के बहनोई दिनेश सिंह पर पड़ोस में रहने वाले सुशील लोहार और उसके साथ आए कुछ बाहरी युवकों द्वारा कथित हमला किया गया था। सूचना मिलते ही गम्हरिया थाना पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपितों को हिरासत में लेकर थाना लाई। हालांकि इसके बाद माहौल तब गरमा गया जब कुछ महिला-पुरुष थाना पहुंचकर आरोपियों के पक्ष में दबाव बनाने का प्रयास करते दिखे। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि दिनेश सिंह को पहले से साजिश के तहत निशाना बनाया जा रहा था और पूरे मामले को पलटने के लिए झूठी कहानी गढ़ी गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस किराए के मकान परिसर में घटना हुई वहां कई परिवार रहते हैं, ऐसे में लगाए जा रहे आरोपों को लेकर संदेह की स्थिति बनी हुई है। लोगों ने सवाल उठाया कि यदि किसी महिला के साथ अभद्रता हुई होती तो इसकी शिकायत सीधे पुलिस को दी जाती। वहीं कुछ महिला समितियों की सक्रियता को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि महिला संगठनों का इस्तेमाल विवादित मामलों में दबाव बनाने और आरोपियों को बचाने के लिए नहीं होना चाहिए, क्योंकि इससे वास्तविक महिला अधिकार आंदोलनों की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। इधर पीड़ित पक्ष ने गम्हरिया थाना पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि घायल दिनेश सिंह को पर्याप्त सुरक्षा के बिना स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया। मामले को लेकर क्षेत्र में तनाव और चर्चा दोनों बढ़ गई है। स्थानीय लोगों ने पूरे घटनाक्रम की उच्चस्तरीय जांच कराने तथा थाना परिसर में कथित दबाव और हंगामा करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

