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    Home » भारत की अभिलेखीय विरासत को सिनेमा से जोड़ने पर मंथन, DIFF 2026 में विशेष पैनल चर्चा
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    भारत की अभिलेखीय विरासत को सिनेमा से जोड़ने पर मंथन, DIFF 2026 में विशेष पैनल चर्चा

    Devanand SinghBy Devanand SinghMay 6, 2026No Comments2 Mins Read
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    भारत की अभिलेखीय विरासत को सिनेमा से जोड़ने पर मंथन, DIFF 2026 में विशेष पैनल चर्चा

    राष्ट्र संवाद संवाददाता
    नई दिल्ली : 15वें दिल्ली अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (DIFF 2026) के दूसरे दिन इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के सहयोग से “फ्रॉम आर्काइव्स टू स्क्रीन” विषय पर विशेष पैनल चर्चा आयोजित की गई। चर्चा का केंद्र भारत की समृद्ध अभिलेखीय विरासत को सिनेमा के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाने की संभावनाएं रहीं।
    सत्र में फिल्मकार बप्पा रे, उत्पल बोरपुजारी और लेखक-फिल्म इतिहासकार इकबाल रिज़वी ने भाग लिया, जबकि संचालन आईजीएनसीए मीडिया केंद्र प्रमुख अनुराग पुनेठा ने किया। वक्ताओं ने कहा कि भारत के पास ऐतिहासिक दस्तावेजों, जनजातीय इतिहास और मौखिक परंपराओं का विशाल भंडार है, लेकिन उसका सिनेमाई उपयोग अभी सीमित है। उन्होंने अभिलेखों को “जीवंत कथाएं” बताते हुए फिल्मकारों, इतिहासकारों और संस्थानों के बेहतर समन्वय पर जोर दिया।
    इससे पहले दादासाहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित फिल्मकार अडूर गोपालकृष्णन ने आईजीएनसीए की विशेष प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। प्रदर्शनी में 1950 से 1990 के दशक तक फिल्म सितारों और महान गायकों द्वारा किए गए दुर्लभ प्रिंट विज्ञापन प्रदर्शित किए गए। अडूर गोपालकृष्णन ने इसे “दुर्लभ और अनूठी प्रदर्शनी” बताया।
    यह प्रदर्शनी आईजीएनसीए की फिल्म आर्काइविंग शृंखला का हिस्सा है, जिसे सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी की पहल पर शुरू किया गया। उनका मानना है कि फिल्में और विज्ञापन भी अपने समय और समाज का महत्वपूर्ण दस्तावेज होते हैं, इसलिए उनका संरक्षण आवश्यक है।
    महोत्सव के तहत चित्कारा विश्वविद्यालय के फाइन आर्ट्स विभाग के छात्रों की पेंटिंग प्रदर्शनी का उद्घाटन भी किया गया। वहीं, तीसरे दिन ‘डॉक्यूमेंट्रीज की दृष्टि : क्या डॉक्यूमेंट्री सिनेमा निष्पक्ष होता है?’ विषय पर पैनल चर्चा और आईजीएनसीए निर्मित डॉक्यूमेंट्री ‘अ न्यू पोस्ट बॉक्स’ का प्रदर्शन किया जाएगा।

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