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    Home » पालघर में ‘अघोरी पूजा’ के नाम पर 13 साल की बच्ची से रेप | राष्ट्र संवाद
    Headlines अपराध राजनीति राष्ट्रीय

    पालघर में ‘अघोरी पूजा’ के नाम पर 13 साल की बच्ची से रेप | राष्ट्र संवाद

    Devanand SinghBy Devanand SinghMay 6, 2026No Comments3 Mins Read
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    पालघर में अघोरी पूजा
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    महाराष्ट्र में आस्था के नाम पर ‘अघोरी’ खेल, पालघर में 13 साल की मासूम से दरिंदगी

    राष्ट्र संवाद संवाददाता
    पालघर (इंद्र यादव) महाराष्ट्र, जिसे संतों और समाज सुधारकों की भूमि कहा जाता है, आज वहां ‘फर्जी बाबाओं’ और पाखंडी पुजारियों का आतंक बढ़ता जा रहा है। नासिक के बहुचर्चित खराट कांड के बाद अब पालघर जिले से एक ऐसी भयावह घटना सामने आई है, जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। एक 55 वर्षीय कलयुगी बाबा ने ‘अघोरी पूजा’ के नाम पर 13 साल की एक नाबालिग बच्ची को अपनी हवस का शिकार बनाया है।

    घटना का विस्तृत विवरण: आस्था की आड़ में हैवानियत

    जानकारी के अनुसार, आरोपी पिछले कुछ समय से इलाके में खुद को तंत्र-मंत्र का ज्ञाता बताकर लोगों को गुमराह कर रहा था। उसने मासूम बच्ची के परिवार को किसी समस्या के समाधान हेतु ‘अघोरी पूजा’ का झांसा दिया।
    अंधविश्वास के अंधेरे में डूबे परिवार को भनक तक नहीं थी कि वे अपनी बेटी को साक्षात काल के गाल में भेज रहे हैं। आरोपी ने पूजा के गुप्त अनुष्ठान के बहाने बच्ची को एकांत में बुलाया और उसके साथ अमानवीय कृत्य किया। घटना के बाद पीड़िता की शारीरिक और मानसिक स्थिति बिगड़ गई, जिसके बाद उसे तत्काल पालघर के एक सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ उसका उपचार जारी है।

    नासिक से पालघर तक: एक ही पैटर्न, बार-बार अपराध

    पिछले कुछ दिनों में राज्य के विभिन्न हिस्सों से ऐसी ही घटनाएं सामने आई हैं। यह एक चिंताजनक ट्रेंड की ओर इशारा करती हैं:
    फर्जी पहचान: अपराधी खुद को पुजारी या तांत्रिक बताकर समाज के कमजोर तबके को निशाना बना रहे हैं।
    अंधविश्वास का हथियार: ‘अघोरी पूजा’, ‘नजर उतारना’ या ‘पवित्र अनुष्ठान’ जैसे शब्दों का उपयोग कर परिवार का विश्वास जीता जाता है।
    नाबालिग सॉफ्ट टारगेट: अक्सर इन घटनाओं में उन बच्चियों को निशाना बनाया जाता है जो विरोध करने की स्थिति में नहीं होतीं।

    पुलिस की कार्रवाई और कानूनी प्रावधान

    मामला प्रकाश में आते ही पालघर पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए 55 वर्षीय आरोपी को हिरासत में ले लिया है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ.
    भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराओं,
    और पोक्सो एक्ट (POCSO) के तहत मामला दर्ज किया है।
    प्रशासन का कहना है कि वे इस मामले में सख्त से सख्त चार्जशीट पेश करेंगे ताकि अपराधी को कड़ी से कड़ी सजा मिल सके।

    तीखे सवाल: कब तक मासूमों की बलि चढ़ता रहेगा अंधविश्वास

    यह घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं है, बल्कि समाज के लिए एक चेतावनी है। यहाँ कई सवाल खड़े होते हैं:
    प्रशासनिक मुस्तैदी: नासिक की घटना के बाद इंटेलिजेंस और पुलिस ने इन फर्जी बाबाओं के ठिकानों पर छापेमारी क्यों नहीं की?
    सामाजिक जागरूकता: क्या हमारी शिक्षा व्यवस्था अंधविश्वास के इस जाल को तोड़ने में विफल रही है?
    सुरक्षा का वातावरण: क्या राज्य में महिलाएं और बच्चियां अब अपरिचितों तो क्या, ‘धर्म के रक्षकों’ के वेश में छिपे भेड़ियों से भी सुरक्षित नहीं हैं!

    महिला संगठनों का आक्रोश

    पालघर की इस घटना के बाद विभिन्न महिला संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया है। उनकी मांग है कि ऐसे ‘नरपिशाचों’ के खिलाफ फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चलाकर उन्हें मृत्युदंड जैसी कठोर सजा दी जाए, ताकि समाज में एक मिसाल कायम हो सके।

    समाज को अब जागना होगा। धर्म और आस्था व्यक्तिगत विषय हैं, लेकिन जब कोई ‘अघोरी पूजा’ या ‘चमत्कार’ के नाम पर शारीरिक शोषण की बात करे, तो समझ लीजिए कि वह पुजारी नहीं, अपराधी है। सतर्क रहें और अपने बच्चों को ऐसे पाखंडियों से दूर रखें।

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