मानगो नगर निगम चुनाव में भावनाओं का सियासी खेल, आंसुओं के सहारे बनता–बिगड़ता माहौल
चर्चा में बन्ना गुप्ता की बुद्धिजीवियों के साथ आम मतदाताओं पर मजबूत पकड़ और सुधा गुप्ता की शालीनता
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जमशेदपुर :मानगो में पहली बार हो रहे नगर निगम चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी अपने चरम पर है। मेयर सीट पर अपनों की टक्कर और दलगत खींचतान के बीच चुनावी माहौल में भावनाएं और आंसू भी अहम भूमिका निभाते नजर आ रहे हैं।
मेयर पद को लेकर मचे घमासान के बीच कांग्रेस प्रदेश नेतृत्व ने रविवार को शाइस्ता परवीन उर्फ जेबा खान को पार्टी से निष्कासित कर दिया। वहीं कांग्रेस नेता और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने एक चुनावी मंच से कार्यकर्ता की बात पर भावुक होते हुए आंसू बहाकर अपनी पत्नी के पक्ष में अपनी निष्ठा जाहिर की क्षेत्र से उनका लगाव जगजाहिर है और बुद्धिजीवियों के बीच उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है, जिसे चुनावी समीकरणों में अहम माना जा रहा है।
सोमवार को निष्कासित जेबा खान भी भावुक नजर आईं। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस पार्टी और पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता पर तीखा हमला बोला। जेबा खान ने कहा कि पार्टी ने उनके साथ अन्याय किया है और समर्पित कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर ऐसे नेताओं को समर्थन दिया जा रहा है, जिनकी विचारधारा पार्टी लाइन से अलग है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह पूरी मजबूती के साथ चुनावी मैदान में डटी रहेंगी और मानगो की जनता ही उनके साथ न्याय करेगी।
कुल मिलाकर मानगो नगर निगम चुनाव में मुद्दों के साथ-साथ भावनाएं, आंसू और व्यक्तिगत प्रभाव भी सियासी हथियार बनते दिख रहे हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता किसके दावे, प्रभाव और आंसुओं पर भरोसा जताती है।
जेबा खान के पति फिरोज खान का राजनीतिक सफर भी चर्चा में है। बताया जाता है कि उन्हें राजनीति की शुरुआती सीख पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता ने दी थी। बाद में वे जेबीएम से चुनाव लड़ चुके हैं और फिर डॉ. अजय के कहने पर कांग्रेस में शामिल हुए। पिछले विधानसभा चुनाव में इन पर कई आरोप भी लगे भीतरघात के। आरोपों के बीच अब पार्टी के घोषित प्रत्याशी सुधा गुप्ता के होते हुए जेबा खान द्वारा नामांकन वापस नहीं लेने को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं

