केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सिडबी को 5000 करोड़ रुपये के इक्विटी सपोर्ट को दी मंजूरी, 1.12 करोड़ नए रोजगार सृजन का अनुमान
राष्ट्र संवाद संवाददाता
नई दिल्ली:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (SIDBI) को 5000 करोड़ रुपये की इक्विटी पूंजी सहायता देने को मंजूरी दे दी। यह राशि वित्तीय सेवा विभाग (DFS) द्वारा तीन चरणों में सिडबी में निवेश की जाएगी।
निर्णय के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में 3000 करोड़ रुपये का निवेश 31 मार्च 2025 की बुक वैल्यू के आधार पर प्रति शेयर 568.65 रुपये की दर से किया जाएगा। इसके बाद वित्तीय वर्ष 2026-27 और 2027-28 में क्रमशः 1000-1000 करोड़ रुपये का निवेश संबंधित पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष की 31 मार्च की बुक वैल्यू पर किया जाएगा।
इस 5000 करोड़ रुपये की इक्विटी पूंजी निवेश के बाद सिडबी से वित्तीय सहायता प्राप्त करने वाले एमएसएमई की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है। अनुमान है कि वित्तीय वर्ष 2025 के अंत तक जहां 76.26 लाख एमएसएमई लाभान्वित होंगे, वहीं वित्तीय वर्ष 2028 के अंत तक यह संख्या बढ़कर 1.02 करोड़ हो जाएगी। इससे करीब 25.74 लाख नए एमएसएमई लाभार्थी जुड़ेंगे।
एमएसएमई मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट के आंकड़ों (30 सितंबर 2025 तक) के अनुसार, देश में 6.90 करोड़ एमएसएमई कुल 30.16 करोड़ लोगों को रोजगार प्रदान कर रहे हैं। औसतन प्रत्येक एमएसएमई से 4.37 लोगों को रोजगार मिलता है। इस आधार पर 25.74 लाख नए एमएसएमई के जुड़ने से वित्तीय वर्ष 2027-28 के अंत तक लगभग 1.12 करोड़ नए रोजगार के सृजन का अनुमान लगाया गया है।
सरकार ने बताया कि निर्देशित ऋण पर विशेष फोकस और अगले पांच वर्षों में सिडबी के पोर्टफोलियो में संभावित तेज वृद्धि के कारण उसकी जोखिम-भारित परिसंपत्तियों में भी बढ़ोतरी होगी। इसके चलते पूंजी-जोखिम भारित परिसंपत्ति अनुपात (CRAR) को स्वस्थ स्तर पर बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पूंजी की आवश्यकता होगी। इसके अलावा, सिडबी द्वारा विकसित किए जा रहे डिजिटल और डिजिटल रूप से सक्षम, संपार्श्विक-मुक्त ऋण उत्पादों तथा स्टार्ट-अप्स को दिए जा रहे उद्यम ऋण भी जोखिम-भारित परिसंपत्तियों में वृद्धि करेंगे।
सरकार के अनुसार, निर्धारित स्तर से ऊपर स्वस्थ सीआरएआर बनाए रखना सिडबी की क्रेडिट रेटिंग की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। अतिरिक्त इक्विटी पूंजी निवेश से सिडबी को सीआरएआर बनाए रखने में मजबूती मिलेगी और वह उचित ब्याज दरों पर संसाधन जुटा सकेगा। इससे एमएसएमई को प्रतिस्पर्धी लागत पर अधिक ऋण उपलब्ध कराया जा सकेगा। प्रस्तावित चरणबद्ध निवेश से अगले तीन वर्षों में उच्च दबाव परिदृश्य में भी सीआरएआर को पिलर-1 और पिलर-2 के तहत 14.50 प्रतिशत से ऊपर बनाए रखने में सिडबी सक्षम होगा।

