- ज़मीन और अधिकारों की लड़ाई के लिए सड़कों पर उतरा जनसैलाब
राष्ट्र संवाद संवाददाता
पालघर (इंद्र यादव)।
महाराष्ट्र के पालघर जिले में एक बार फिर जनआंदोलन तेज हो गया है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) CPI(M) के नेतृत्व में हज़ारों आदिवासी, किसान और मज़दूर अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतर आए। चारोटी नाका से पालघर कलेक्ट्रेट तक निकाले गए मार्च को ‘लाल तूफान’ नाम दिया जा रहा है, जिससे प्रशासन में हड़कंप मच गया है।
आंदोलन की वजह
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि विकास परियोजनाओं के नाम पर उनकी ज़मीन, आजीविका और अधिकार छीने जा रहे हैं। वन अधिकार अधिनियम (FRA) 2006 के पूर्ण क्रियान्वयन, ज़मीन पर मालिकाना हक और बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर यह आंदोलन खड़ा हुआ है।
मुख्य मांगें
वन अधिकार अधिनियम (FRA) 2006 का पूर्ण पालन
बुलेट ट्रेन, समृद्धि–शक्तिपीठ हाईवे और वधावन बंदरगाह जैसी बड़ी परियोजनाओं का विरोध
स्थानीय किसानों के लिए सिंचाई और पीने के पानी की समुचित व्यवस्था
नेताओं के तेवर
CPI(M) विधायक विनोद निकोले ने कहा कि प्रशासन चाहे तो कई स्थानीय समस्याओं का तुरंत समाधान किया जा सकता है, लेकिन इच्छाशक्ति के अभाव में लोग आंदोलन के लिए मजबूर हैं। उन्होंने दो टूक कहा—“हम विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन हमारी कब्रों पर विकास मंजूर नहीं।”
वर्तमान स्थिति
प्रदर्शनकारी पालघर कलेक्ट्रेट के तीनों प्रवेश द्वारों पर ‘थिय्या आंदोलन’ के तहत डटे हुए हैं। इसके चलते बोईसर–पालघर मुख्य हाईवे पूरी तरह जाम हो गया है और यातायात बुरी तरह प्रभावित है। हालात को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
चेतावनी
आंदोलनकारियों ने मांगें नहीं माने जाने पर आंदोलन और उग्र करने, मुंबई स्थित मंत्रालय की ओर कूच करने तथा मुंबई–दिल्ली रेल मार्ग पर ‘रेल रोको’ आंदोलन की चेतावनी दी है।
फिलहाल पालघर में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और प्रशासन प्रदर्शनकारियों से बातचीत की कोशिश में जुटा है।

