दरभंगा राज परिवार की अंतिम महारानी कामसुंदरी देवी का निधन, सम्पूर्ण मिथिलांचल में शोक की लहर
राष्ट्र संवाद संवाददाता
दरभंगा/जमशेदपुर। दरभंगा राज परिवार की अंतिम महारानी कामसुंदरी देवी का 96वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन से सम्पूर्ण मिथिलांचल एवं मिथिला वासियों में शोक की लहर दौड़ गई है। महारानी कामसुंदरी देवी, महाराजा कामेश्वर सिंह की तीसरी पत्नी थीं। उनका विवाह वर्ष 1940 में हुआ था। वे सामाजिक, सांस्कृतिक और परोपकारी कार्यों के लिए विशेष रूप से जानी जाती थीं।

महारानी कामसुंदरी देवी ने अपने पति महाराजा कामेश्वर सिंह की स्मृति में महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह कल्याणी फाउंडेशन की स्थापना की थी। इस फाउंडेशन के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए गए, जिससे समाज के कमजोर और वंचित वर्गों को व्यापक लाभ मिला।
भारत-चीन युद्ध के दौरान देशहित में 600 किलो सोना दान कर उन्होंने राष्ट्रसेवा का जो अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया, वह इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित है। उनका संपूर्ण जीवन त्याग, सेवा, सादगी, गरिमा और सांस्कृतिक चेतना से प्रेरित रहा।
महारानी के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए मिथिला सांस्कृतिक परिषद के आजीवन सदस्य एवं भारतीय जनता पार्टी जमशेदपुर महानगर के मंडल मीडिया प्रभारी प्रमोद मिश्रा ने कहा कि यह समाचार अत्यंत दुःखद है। उन्होंने कहा कि महारानी कामसुंदरी देवी न केवल राजपरिवार की गरिमामयी प्रतिनिधि थीं, बल्कि सामाजिक सेवा और मिथिला संस्कृति के संरक्षण में उनका योगदान अविस्मरणीय रहेगा।
उन्होंने दिवंगत आत्मा को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए ईश्वर से प्रार्थना की कि वे उन्हें अपने श्रीचरणों में स्थान दें और शोकाकुल परिजनों को इस दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।

