इथेनॉल कंपनी पर गंभीर आरोप, नदी-नालों को पाटने और महिलाओं की निजता भंग करने का मामला ग्रामीणों में आक्रोश, एक सप्ताह की चेतावनी, नहीं तो ग्राम सभा करेगी कार्रवाई
राष्ट्र संवाद संवाददाता
मुसाबनी प्रखंड के मुर्गाघुटु टेतुलडांगा क्षेत्र में संचालित एक इथेनॉल कंपनी की गतिविधियों को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी द्वारा क्षेत्र के नदी-नालों को मिट्टी और कचरे से पाट दिया गया है, जिससे प्राकृतिक जलस्रोतों का प्रवाह बाधित हो गया है और पर्यावरण को गंभीर क्षति पहुंच रही है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि बाहर से आए कंपनी से जुड़े लोग स्थानीय ग्रामीणों के साथ दुर्व्यवहार कर रहे हैं। महिलाओं के स्नान स्थलों पर झांकने जैसी घटनाओं से महिलाओं की निजता और सुरक्षा पर प्रश्नचिह्न खड़ा हो गया है, जिससे गांव में भय का माहौल है।
भारतीय जनता पार्टी के नेता विक्रम सिंह ने इस मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि इथेनॉल कंपनी द्वारा शौचालय, बाथरूम और अन्य औद्योगिक गंदगी का पानी सीधे स्वर्णरेखा नदी में बहाया जा रहा है। यह न केवल पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन है, बल्कि ग्रामीणों के स्वास्थ्य और जल सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा है। उन्होंने प्रशासन से अविलंब जांच और कार्रवाई की मांग की है।
मुर्गाघुटु–टेतुलडांगा के ग्राम प्रधान जगदीश गोप ने बताया कि कंपनी को स्पष्ट रूप से एक सप्ताह की अंतिम चेतावनी दी गई है। यदि तय समय सीमा के भीतर नदी-नालों से अतिक्रमण और भराव सामग्री नहीं हटाई गई, तो ग्राम सभा के निर्णय के तहत ग्रामीण स्वयं इसे हटाने के लिए बाध्य होंगे।
वहीं वन अधिकार समिति के सचिव विक्रम सिंह ने कहा कि कंपनी की गतिविधियों से क्षेत्र के पेड़-पौधे क्षतिग्रस्त हो रहे हैं और नदी-नाले गंदगी से पूरी तरह भर चुके हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने शीघ्र ठोस कदम नहीं उठाया, तो ग्रामीण आंदोलन के तहत हुड़का जाम करने को मजबूर होंगे। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभागों से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी कंपनी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीणों की सुरक्षा और गरिमा सुनिश्चित की जा सके।

