हाईकोर्ट में जनहित याचिका के बाद जिला प्रशासन हरकत में
राष्ट्र संवाद संवाददाता
पोटका। आरटीआई एक्टिविस्ट व समाजसेवी सिर्मा देवगम द्वारा झारखंड हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर किये जाने के बाद प्रशासन की नींद खुली है। उन्हें सड़क सुरक्षा सप्ताह की याद आई। सड़क सुरक्षा सप्ताह के बहाने प्रशासन अब हर दिन सड़क पर निकल कर ओवरलोडिंग वाहनों की जांच कर रही है। बता दें कि ओवरलोडिंग पर रोक लगाने की मांग को लेकर समाजसेवी सिर्मा देवगम ने 2 दिसम्बर 2025 को रांची हाइकोर्ट में पीआईएल दायर की है। हाईकोर्ट के अधिवक्ता जैद इमाम के माध्यम से दायर इस जनहित याचिका में श्री देवगम ने पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त और वरीय पुलिस अधीक्षक को पक्षकार बनाया गया है। उन्होंने जनहित याचिका में कहा है कि
जमशेदपुर से उड़ीसा, हाता, चाईबासा, चक्रधरपुर,मुसाबनी,डुमरियाा, घाटसिला, बहरागोड़ा,चाकुलिया सहित अन्य जगहों के लिए चलनेवाली छोटी बड़ी सवारी गाड़ियों में खुलेआम क्षमता से अधिक यात्री बैठाए जाते हैं। पिछले 8-9 महीनों में ओवरलोडिंग के कारण वाहनों के पलटने की 200 से अधिक घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इनमें 100 से अधिक लोगों की मौत हुई है और दर्जनों यात्री घायल हुए हैं। बस के अंदर जगह नहीं मिलने पर यात्रियों को भेड़ -बकरियों की तरह छत और बस की सीढ़ीयों पर बैठा दिया जाता है। थोड़ी सी चूक या असंतुलन यात्रियों की जान पर भारी पड़ सकती है, लेकिन अधिक कमाई के लालच में वाहन संचालक यात्रियों की सुरक्षा को नजर अंदाज कर रहे हैं। समाजसेवी सिर्मा देवगम ने याचिका में यह भी कहा है कि उन्होंने जिले के परिवहन पदाधिकारी, उपायुक्त , वरीय पुलिस अधीक्षक और कोल्हान के पुलिस उपमहानिरीक्षक से ओवरलोडिंग पर रोक लगाने की मांग की थी,लेकिन जब कोई पहल नहीं हुई तो मजबूर होकर हाइकोर्ट में पीआईएल दायर की है।

