पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने एमजीएम पुलिस पर लगे आरोपों को किया खारिज, एसएसपी व ग्रामीण एसपी जमशेदपुर के बयान पर लगी मुहर
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जमशेदपुर।एमजीएम थाना क्षेत्र से जुड़े मामले में सामने आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पुलिस पर लगाए जा रहे आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। रिपोर्ट के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि मृतक के शरीर पर किसी भी प्रकार की एंटीमार्टम बाहरी चोट नहीं पाई गई, जिससे पुलिसिया मारपीट अथवा उत्पीड़न के आरोपों को कोई आधार नहीं मिलता।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार मृतक की उम्र लगभग 19 वर्ष बताई गई है। जांच में यह स्पष्ट किया गया है कि शरीर के बाहरी हिस्सों के साथ-साथ हाथ-पैर (लिम्ब्स) की गहन डिसेक्शन के दौरान भी किसी तरह की चोट नहीं मिली। रिपोर्ट में साफ शब्दों में उल्लेख है कि “There is no any antemortem external injury found on his body” तथा “On deep dissection of back and extremities no any injury found.”
आंतरिक जांच में यह पाया गया कि मृतक के लीवर और प्लीहा (स्प्लीन) में बीमारी से संबंधित जटिलताएं थीं। डॉक्टरों की राय में मौत का कारण “complication of disease of liver and spleen” बताया गया है। यानी मृत्यु स्वाभाविक रोगजन्य कारणों से हुई, न कि किसी बाहरी हिंसा से।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह भी दर्ज है कि मृत्यु का समय पोस्टमार्टम के लगभग 24 से 36 घंटे पूर्व का अनुमानित है। पूरी प्रक्रिया वीडियोग्राफी के साथ की गई, जिससे जांच की पारदर्शिता भी सुनिश्चित हुई।
इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद एसएसपी और ग्रामीण एसपी जमशेदपुर द्वारा पहले दिए गए बयानों की पुष्टि हो गई है, जिसमें उन्होंने पुलिस की भूमिका को लेकर लगाए गए आरोपों को बेबुनियाद बताया था। वहीं, इस मामले को राजनीतिक रंग देने वाले तत्वों को बड़ा झटका लगा है, क्योंकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने तथ्यों के आधार पर उनकी दलीलों को कमजोर कर दिया है।
कुल मिलाकर, पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने एमजीएम पुलिस को क्लीन चिट देते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि मृत्यु का कारण बीमारी से उत्पन्न जटिलताएं थीं, न कि पुलिसिया कार्रवाई।

