अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस पर नेताजी सुभाष विश्वविद्यालय में सेमिनार, विशेषज्ञों ने रखे विचार
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जमशेदपुर। सार्वभौम मानवाधिकार घोषणा (UDHR) की वर्षगांठ पर झारखंड मानवाधिकार संघ, जमशेदपुर और नेताजी सुभाष विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार को विश्वविद्यालय परिसर के सभागार में अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस पर एक दिवसीय सेमिनार आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता संघ के अध्यक्ष मनोज किशोर ने की।

मुख्य अतिथि सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (दुमका) श्री मृत्युंजय महतो, मुख्य वक्ता एवं सम्मानित अतिथि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. प्रभात कुमार पाणी, पूर्व आईएएस अधिकारी श्री बृजमोहन कुमार, सांसद प्रतिनिधि (राज्यसभा) श्री मनोज कुमार सिंह सहित अन्य वक्ता कार्यक्रम में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक स्वागत एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुई। सांस्कृतिक समूह के विद्यार्थियों ने गणेश वंदना और राष्ट्रीय गान प्रस्तुत किया। अतिथियों को शॉल, बुके और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
स्वागत भाषण प्रोफेसर दीपिका पांडे ने दिया।
अध्यक्ष मनोज किशोर ने UDHR, मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 तथा मानवाधिकारों की सार्वभौमिक अवधारणा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विद्यार्थियों में मानवाधिकारों को लेकर जागरूकता पैदा करना संघ का प्रमुख उद्देश्य है।
मुख्य अतिथि श्री महतो ने भारतीय कानूनों और मानवाधिकारों के बीच संबंधों को सरलता से समझाया और कहा कि जागरूकता तथा कर्तव्यों के ईमानदार पालन से मानवाधिकार हनन रोका जा सकता है।
कुलपति प्रो. पाणी ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की उपलब्धियों और कमियों पर विस्तार से चर्चा की।
पूर्व आईएएस अधिकारी बृजमोहन कुमार ने कहा कि कोई कानून तब तक प्रभावी नहीं होता जब तक नागरिक स्वयं अपने अधिकारों के प्रति सजग न हों। कार्यक्रम का संचालन प्रो. दीपिका पांडे ने और धन्यवाद ज्ञापन संघ के सहसचिव शेखर सहाय ने किया।
MBA, Mass Com और Law विभाग के लगभग 150 विद्यार्थियों तथा 100 मानवाधिकार कार्यकर्ताओं सहित कुल 250 प्रतिभागियों ने सेमिनार में भाग लिया। अंत में सभी को प्रमाणपत्र और UDHR के 30 अनुच्छेदों से युक्त वर्ष 2026 का कैलेंडर वितरित किया गया।

